
डॉ. पंकज शर्मा
डॉ. पंकज शर्मा दिल्ली एक प्रसिद्ध जनरल, लैप्रोस्कोपिक और बैरिएट्रिक सर्जन हैं। इस समय वह फोर्टिस ... Read More
Written By: Dr. Pankaj Sharma | Updated : February 24, 2026 3:09 PM IST
Connection Between Metabolism and Weight: मेरे क्लिनिक में रोज ऐसे लोग आते हैं, जो थके-हारे मन से एक ही बात कहते हैं—“डॉक्टर, हमने सब कुछ कर लिया। डाइट बदल ली, खाना कम कर लिया, कभी-कभी भूखे भी रहे, लेकिन वजन टस से मस नहीं हो रहा है।” यहा पर यह समझना जरूरी हो जाता है कि वजन बढ़ना या कम न होना सिर्फ खाने की मात्रा का मसला नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ी भूमिका हमारे मेटाबॉलिज्म की होती है। पेट के आसपास जमा चर्बी इस बात का संकेत है कि शरीर के अंदर मेटाबॉलिक असंतुलन चल रहा है।
मेटाबॉलिज्म एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिये हमारा शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलता है। अगर मेटाबॉलिज्म संतुलित रहता है, तो शरीर जरूरत के अनुसार कैलोरी बर्न करता है। लेकिन, जब मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, तब खाना फैट में बदलने लगता है और व्यक्ति का वजन तेजी से बढ़ने लगता है या कम होने का नाम ही नहीं लेता है। इस स्थिति में कई बार लोग डाइटिंग करते हैं, खाना कम खाते हैं, इसके बावजूद भी वजन कम नहीं हो पाता है। दरअसल, मेटाबॉलिज्म खराब या स्लो होने पर शरीर फैट को बचाकर रखने लगता है और व्यक्ति को मोटापे का शिकार बना देता है।
खराब लाइफस्टाइल ही, स्लो मेटाबॉलिज्म का एक प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अलावा,
ये सभी मेटाबॉलिज्म को खराब कर सकते हैं और मोटापे का कारण बन सकते हैं।
एक बैरिएट्रिक सर्जन के रूप में मेरा अनुभव कहता है कि वजन घटाने का इलाज सिर्फ तराजू पर दिखने वाले नंबर को कम करना नहीं है। असली लक्ष्य होना चाहिए शरीर के अंदर चल रही प्रक्रियाओं को ठीक करना। जब मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है, तो वजन अपने आप धीरे-धीरे कम होने लगता है। सबसे अहम बात है कि वजन दोबारा से नहीं बढ़ता है।
बैरिएट्रिक सर्जरी को लेकर भी कई गलतफहमियां हैं। लोग इसे “आखिरी रास्ता” या “आसान उपाय” मान लेते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि यह सर्जरी मेटाबॉलिज्म को रीसेट करने का एक वैज्ञानिक तरीका है। यह सर्जरी सिर्फ पेट के साइज कम नहीं करती, बल्कि भूख और शुगर कंट्रोल से जुड़े हार्मोन्स पर असर डालती है। आज रोबोटिक तकनीक की मदद से यह सर्जरी पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, सटीक और कम दर्द वाली हो चुकी है।
यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को सर्जरी की जरूरत हो। कई लोग सही प्रोटीन डाइट, नियमित वॉक या एक्सरसाइज, अच्छी नींद और तनाव को कंट्रोल करके भी अपना मेटाबॉलिज्म सुधार सकते हैं। लेकिन जब तमाम कोशिशों के बावजूद भी वजन कम न हो या मोटापे के साथ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और जोड़ों का दर्द जुड़ जाए, तब विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी हो जाता है।