
Also Read
ऑनलाइन क्लासेज के कारण बच्चों में बढ़ गया है गैजेट्स का इस्तेमाल, हो रहे हैं मानसिक समस्याओं के शिकार।
Effects of Gadgets on Children: कोरोना महामारी की वजह से सभी स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेज हो रहे हैं। इस वजह से बच्चे अब इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे मोबाइल और लैपटॉप पर अपना समय ज्यादा बिता रहे हैं। इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। इस बढ़ती समस्या को लेकर माता-पिता भी परेशान हैं। स्मार्टफोन और लैपटॉप पर लगातार काम करते रहने से बच्चों के कंधों, पीठ और आंखों में दर्द होने लगा है। माता-पिता के रोकने पर बच्चों में चिड़चिड़ापन (Effects of Gadgets on Children) देखने को मिल रहा है। इस समस्या को लेकर स्कूल प्रशासन भी माता-पिता से सुझाव ले रहे हैं।
दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मॉडर्न पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल अलका कपूर ने बताया, "कोविड 19 की वजह से बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। बच्चों की एक्टीविटी और पढ़ाई भी अब ऑनलाइन हो रही है। इसको लेकर हमने बच्चों को गुड स्क्रीन टाइम ओर बैड स्क्रीन टाइम के सेशन दिए कि किस तरह से पढ़ाई करनी है। हमने इस बात पर भी जोर दिया कि एक क्लास के बाद यानी हर 20 मिनट के बाद आंखों की एसक्ससाइस कराएं, ताकि उनकी आंखें स्वस्थ रहें। बच्चों को ब्लू स्क्रीन का मतलब भी समझाया और ये भी बताया कि रोशनी में पढ़ना है, ताकि आंखों पर असर न पड़े।
अलका कपूर ने कहा, "हमने एक सर्वे भी माता-पिता के साथ कराया, जिसमें जानने की कोशिश की कि स्क्रीन टाइम (Effects of Gadgets on Children's health) जो हम स्कूल में दे रहे हैं, क्या उससे माता-पिता संतुष्ट हैं? लगभग सभी ने जो हमें सुझाव दिए, हमने उसके अनुसार टाइम टेबल में भी बदलाव किया।" हालांकि, बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ने को लेकर पहले भी चिंता जाहिर की गई है। बच्चा 24 घंटों में अपना कितना वक्त फोन और लैपटॉप पर बिता रहा है, इसको हम स्क्रीन टाइम कहते हैं।
आंखों की डॉक्टर श्रुति महाजन ने बताया, "ज्यादा मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने से बच्चों के सर में दर्द, आंखों में जलन, आंखों में भारीपन और आंखें लाल होना शुरू हो जाती हैं। बच्चों के आंखों से पानी बहना शुरू हो जाता है।" बच्चों को एक घंटे मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने के बाद ब्रेक लेना चाहिए। अंधेरे में बच्चों को फोन नहीं चलाना चाहिए, इससे उनकी आंखों पर सीधा असर पड़ता है। खास तौर पर बच्चे लेटकर फोन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
बच्चों को अपने बैठने के तरीके में बदलाव करना होगा, लैपटॉप या फोन (smartphone hazards in kids) लेटकर ना देखें, कुर्सी और टेबल का इस्तेमाल करें, लैपटॉप चलाते वक्त आपकी आंखें एक उचित दूरी पर होनी चाहिए। वहीं, डॉ. नीलम मिश्रा (मनोचिकित्सक) ने कहा कि इस वक्त बहुत सारे माता-पिता की शिकायत है कि उनके बच्चे बहुत ज्यादा फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बात से मां-बाप बहुत ज्यादा परेशान हैं।
उन्होंने कहा, "हम ऑनलाइन क्लासेज को नहीं रोक सकते। मगर माता-पिता को बच्चों के प्रति व्यवहार में बदलाव करना होगा। हमें बच्चों को किसी और एक्टिविटी में भी लगाना होगा। हफ्ते में 5 दिन क्लास के बाद शनिवार और रविवार को बच्चों को आर्ट्स एंड क्राफ्ट में इन्वॉल्व कर सकते हैं। बच्चों को अन्य खेलों के प्रति प्रेरित कर सकते हैं, जैसे साइकिल चलाना, कैरम बोर्ड खेलना, चेस खेलना आदि।"
इस समस्या को देखकर सरकार भी गंभीर हुई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बच्चों की डिजिटल पढ़ाई के शारीरिक और मानसिक प्रभावों को देखते हुए 'प्रज्ञाता' नाम से डिजिटल शिक्षा संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार, "प्री प्राइमरी छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं 30 मिनट से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि कक्षा 1 से 8वीं तक के 30 से 45 मिनट के दो ऑनलाइन सत्र होने चाहिए, कक्षा 9वीं से 12वीं के लिए 30 से 45 मिनट के 4 सत्र आयोजित होने चाहिए।"