बार-बार मूड स्विंग होना कहीं दिमागी सूजन का संकेत तो नहीं? न्यूरोलॉजिस्ट से जानें कैसे करें इसका पता

Dimag me Sujan: आजकल मानसिक समस्याएं बहुत आम होती जा रही हैं, किसी को बार-बार मूड स्विंग तो किसी को बार-बार चिंता, तनाव या डिप्रेशन जैसी समस्याएं होने लग जाती हैं, लेकिन कई बार ये किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण भी हो सकता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : December 24, 2025 7:45 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Aparna Gupta

Encephalitis in Hindi: जरूरी नहीं कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े ये लक्षण किसी मानसिक बीमारी के कारण ही हो बल्कि इसके पीछे शारीरिक बीमारी भी हो सकती है। डॉ. अपर्णा गुप्ता, एसोसिएट डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, आईएसआईसी मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल के अनुसार एन्सेफेलाइटिस यानी मस्तिष्क में होने वाली सूजन के कारण भी कई बार ऐसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। एन्सेफेलाइटिस मस्तिष्क में होने वाली सूजन की एक गंभीर बीमारी है। आमतौर पर इसे बुखार, दौरे (सीजर) और बेहोशी से जोड़ा जाता है, लेकिन कई बार इसके लक्षण मानसिक बीमारियों जैसे दिखते हैं। यही कारण है कि कई मरीजों में इसका सही और समय पर पता नहीं चल पाता। एन्सेफलाइटिस में व्यक्ति को अवसाद, घबराहट, भ्रम, वहम (भ्रम या डर), अचानक गुस्सा, असामान्य व्यवहार या मानसिक असंतुलन जैसे लक्षण हो सकते हैं। ये लक्षण डिप्रेशन, साइकोसिस, एंग्जायटी या बाइपोलर डिसऑर्डर से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।

एन्सेफेलाइटिस कब होता है

एन्सेफेलाइटिस आमतौर पर मस्तिष्क में संक्रमण के कारण होता है और इसके अलावा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा कई बार गलती से मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है और इसके कारण सूजन आने लगती है लेकिन ज्यादातर मामलों में एन्सेफेलाइटिस संक्रमण के कारण होता है इसमें वायरल संक्रमण ज्यादा पाया जाता है जैसे हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस, जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस या मच्छरों से फैलने वाले वायरस के इन्फेक्शन। कुछ मामलों में शरीर की इम्यून सिस्टम ही दिमाग के टिश्यू पर हमला कर देती है, जिसे ऑटोइम्यून एन्सेफलाइटिस कहते हैं। इसमें एंटी-NMDA रिसेप्टर एन्सेफलाइटिस और हाशिमोटो एन्सेफलाइटिस प्रमुख हैं, जिनमें मानसिक लक्षण काफी स्पष्ट होते हैं।

जब सूजन मानसिक बीमारी जैसी लगे

एन्सेफेलाइटिस की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि यह मानसिक बीमारी की तरह दिखाई देता है। मरीज के स्वभाव में अचानक बदलाव आ सकता है, मूड बदल सकता है, भ्रम, आवाजें सुनाई देना, बेचैनी या याददाश्त कमजोर होना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। युवाओं में अचानक साइकोसिस जैसे लक्षण दिख सकते हैं, जबकि बुजुर्गों में भ्रम, भूलने की बीमारी या डिप्रेशन नजर आ सकता है। कई बार मरीज पहले मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचते हैं, क्योंकि शुरुआती लक्षण न्यूरोलॉजिकल नहीं लगते।

खासकर एंटी-NMDA रिसेप्टर एन्सेफलाइटिस की शुरुआत चिंता, नींद न आना, अजीब व्यवहार या वहम से होती है, जिससे इसे स्किज़ोफ्रेनिया समझ लिया जाता है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, तब दौरे, असामान्य हरकतें, बोलने में दिक्कत या बेहोशी जैसे लक्षण सामने आते हैं।

समय पर पहचान क्यों जरूरी है?

अगर एन्सेफलाइटिस को केवल मानसिक बीमारी समझकर इलाज किया जाए, तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। मानसिक बीमारियों में दी जाने वाली दवाएं एन्सेफलाइटिस में असरदार नहीं होतीं। इस बीमारी में तुरंत एंटीवायरल दवाएं, इम्यून थेरेपी या आईसीयू देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। इलाज में देरी होने से स्थायी मस्तिष्क क्षति, याददाश्त की समस्या या मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

  • इन संकेतों को न करें इग्नोर
  • लक्षणों का बहुत तेजी से बढ़ना
  • बुखार या तेज सिरदर्द
  • दौरे पड़ना
  • होश में उतार-चढ़ाव
  • असामान्य शरीर की हरकतें
  • मानसिक दवाओं से कोई सुधार न होना

ऐसे मामलों में न्यूरोलॉजिस्ट, साइकियाट्रिस्ट और अन्य डॉक्टरों की संयुक्त भूमिका बहुत जरूरी होती है।

एन्सेफेलाइटिस की जांच और इलाज

एन्सेफलाइटिस की पहचान के लिए एमआरआई, ईईजी, खून की जांच और लंबर पंक्चर द्वारा दिमागी तरल (CSF) की जांच की जाती है। यह जानना जरूरी होता है कि कारण संक्रमण है या ऑटोइम्यून। इलाज कारण के अनुसार किया जाता है, जिसमें एंटीवायरल दवाएं, स्टेरॉइड्स, आईवीआईजी या प्लाज्मा एक्सचेंज शामिल हो सकते हैं।

न्यूरोलॉजी और साइकियाट्री के बीच की दूरी को समझना

एन्सेफलाइटिस यह याद दिलाता है कि अचानक आने वाले मानसिक लक्षणों के पीछे कोई गंभीर शारीरिक कारण भी हो सकता है। जागरूकता, समय पर पहचान और डॉक्टरों के बीच बेहतर समन्वय से मरीज की जान बचाई जा सकती है और लंबे समय तक दिमाग को नुकसान होने से रोका जा सकता है।

जब मस्तिष्क की सूजन मानसिक बीमारी जैसी दिखने लगे, तो खतरा बढ़ जाता है। एन्सेफलाइटिस हमें सिखाता है कि केवल लक्षणों पर नहीं, बल्कि उनके कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है। समय रहते सही पहचान और इलाज से न केवल जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि मरीज के भविष्य को भी सुरक्षित किया जा सकता है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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