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मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बुरी तरह प्रभावित करती है युद्धाेेेन्‍मादी सामग्री, समझें इसके संकेत और निदान

इन दिनों देश भर में जंग जैसे हालात की दस्तक महसूस की जा रही है पर क्या आप जानते हैं कि आशंकाओं के ये बादल मानसिक स्वास्थ्य को कितनी बुरी तरह से प्रभावित करते हैं !

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बुरी तरह प्रभावित करती है युद्धाेेेन्‍मादी सामग्री, समझें इसके संकेत और निदान
आशंकाओं के ये बादल मानसिक स्वास्थ्य को कितनी बुरी तरह से प्रभावित करते हैं ! ©Shutterstock.

Written by Yogita Yadav |Published : February 28, 2019 3:00 PM IST

अचानक दुर्घटना का घट जाना जहां शरीर को चोट पहुंचाता है, वहीं दुर्घटना, हादसा, युद्ध होने की आशंका, संभावना मानसिक स्‍तर पर बहुत अधिक प्रभावित करती है। कई बार तो व्‍यक्ति होने न होने की आशंका के बीच ही दहशतजदा हो जाता है। एंग्‍जाइटी यानी व्‍यग्रता मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अलार्मिंग स्थिति मानी जाती है, यदि इस दौरान जरा सी भी लापरवाही की जाए तो कई गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। मनोविज्ञान की भाषा में इसे पेनिक डिसऑर्डर भी कहा जाता है। जो कई बार केवल माहौल में व्‍याप्‍त बहुत ज्‍यादा डर के कारण उत्‍पन्‍न हो जाती है।

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समझें आशंकाओं के नुकसान

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व्‍यग्रता वह स्थिति है जिसके बाद मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य कई तरह की गंभीर स्थितियों में पहुंच सकता है। आप एक से अधिक प्रकार की व्यग्रता का अनुभव कर सकते हैं। मनोविज्ञान की भाषा में इसे पेनिक डिसऑर्डर भी कहा जाता है। जो कई बार केवल माहौल में व्यांप्ता बहुत ज्यापदा डर के कारण उत्पकन्न  हो जाती है।

सामान्यकृत व्यग्रता विकार (Generalized Anxiety Disorder (GAD) )

जीएडी व्यग्रता का सबसे सामान्य रूप है। यह एक अत्यधिक, तीव्र और बेतुकी व्यग्रता है, जो आमतौर पर रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी होती है। जीएडी के साथ लोग रोज़मर्रा की चीजों जैसे कि पैसे, दोस्ती, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों, काम और जीवन से जुड़ी दुर्घटनाओं की आशंका जाहिर करते हैं। जीएडी के शारीरिक प्रभावों में थकान, मतली, सिरदर्द, मांसपेशियों में तनाव, बेचैनी, अनिद्रा और पसीना शामिल है।

आकस्मिक भय विकार (Panic Disorder)

यदि आप निरंतर हलचल पैदा करने वाले हमलों का अनुभव कर रहे हैं, तो संभव हो सकता है कि आपको आकस्मिक भय विकार है इस विकार के साथ-साथ व्यवहार में बदलाव भी होता है जैसे कि बेचैनी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पीड़ित एक अगले हमले की आशंका कर रहा है। आकस्मिक भय विकार के शारीरिक प्रभावों में तेजी से दिल का धड़कना, पसीना, चक्कर आना, हाइपरवेंटिलेशन, छाती का दर्द और रोना शामिल है।

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सामाजिक भय (Social Phobia)

हो सकता है आपने अपने जीवन में कम से कम एक बार मंच पर जाने का भय या शर्म महसूस की होगी। यह बिल्कुल सामान्य है, लेकिन अगर आप पूरी तरह से लोगों के आसपास होने से डरते हैं, तो हो सकता है आप सोशल फ़ोबिया का सामना कर रहे हों। सोशल फ़ोबिया एक सामाजिक स्थिति में होने और अन्य लोगों द्वारा आपको आंके जाने की लगातार सोच का गहन भय है। यदि आप साथी के साथ घूमने, पार्टी, बैठकों और लोगों के समूह के साथ बाहर जाने से डरते हैं, तो हो सकता है आपको सामाजिक भय का सामना करना पड़ रहा है।

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आघात के बाद का तनाव विकार (Post Traumatic Stress Disorder (PTSD))

यदि आपको अतीत में अस्त-व्यस्त कर देने वाली शारीरिक, या भावनात्मक परेशानी का अनुभव हुआ है और आप उस स्मृति को दोबारा ध्यान में लाते रहते हैं, तो हो सकता है कि आप पोस्ट ट्रॉमैटिक तनाव विकार से गुजर रहे हैं। पीटीएसडी, जीवन की किसी दर्दनाक घटना के बाद और कभी-कभी तो घटना के कई वर्षों बाद तक रहता है। यदि आपको लगता है कि आप पीटीएसडी से प्रभावित हैं, तो सबसे अच्छी सलाह यह है कि आप किसी पेशेवर से संपर्क करें। पीटीएसडी के शारीरिक प्रभावों में गंभीर अनिद्रा और निरंतर होने वाली थकान शामिल है।

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सनक से भरा बाध्यकारी विकार (Obsessive Compulsive Disorder (OCD))

यदि आप कुछ विशेष प्रकार के ही विचार रखते हैं या किसी निश्चित क्रिया को बार-बार दोहराते हैं और उन्हें नियंत्रित करने में असमर्थ होते हैं, तो आपको ओसीडी से पीड़ित हो सकते हैं। किसी एक विशेष प्लेट में ही भोजन करना मामूली ओसीडी हो सकता है, लेकिन उस प्लेट के न मिलने पर भोजन ही न करना तीव्र ओसीडी है। ओसीडी के बहुत गंभीर मामलों के उदाहरण हैं - प्रत्येक 10 मिनट में हाथों को धोना और दरवाज़ा बंद होने के बाद भी लगातार जांचना। मूल रूप से एक सनक, जो दैनिक जीवन को प्रभावित करती है।

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खतरनाक हो सकती है स्थिति

  • बार-बार वही चीजें देखना, जो आपमें व्‍यग्रता पैदा करें आपके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसमें हिंसक सामग्री और हिंसा की आशंका पैदा करने वाली दोनों तरह की सामग्री शामिल हैं।
  • मौजूदा समय में इसमें भड़काउ वाट्सएप संदेश, सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हिंसक वीडियो, आक्रामक शब्‍दावली, डर की आशंका जताते संदेश आदि शामिल हैं।
  • जब लंबे समय तक व्यग्रता पर ध्यान नहीं दिया जाता तब इसके साथ कई सह मौजूदा स्थितियों मिलकर बिगड़ सकती हैं। इसके बाद उस व्यक्ति को अधिक नकारात्मकता का सामना करना पड़ सकता है जिससे यह और अधिक जटिल हो जाता है।
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