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ज्यादा तनाव, अप्रत्याशित दुर्घटनाओं और अनावश्यक दबाव के चलते मानसिक बीमारियों (Mental disorder Agoraphobia) में इजाफा हो रहा है। ऐसी बीमारियां सामने आ रहीं हैं, जिनके बारे में अभी तक लोग सोच भी नहीं सकते थे। ऐसी ही एक बीमारी है एगोराफोबिया। इसमें व्यक्ति को भीड़ में जाने से डर लगने लगता है। यह डर कई बार बहुत ज्यादा खतरनाक, यहां तक कि जानलेवा भी हो सकता है। आइए जानते हैं क्या है मानसिक बीमारी एगोराफोबिया (Mental disorder Agoraphobia)।
दुनिया भर में पिछले एक दशक में मानसिक बीमारियों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। भारत में भी मानसिक अवसाद एवं तनाव ग्रस्त लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसी ही एक बीमारी है एगोराफोबिया (Mental disorder Agoraphobia)। इस मानसिक बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को भीड़ में जाने से डर लगने लगता है। यहां तक कि वह सामाजिक-पारीवारिक आयोजनों या शॉपिंग पर जाने से भी कतराने लगता है।
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एगोराफोबिया मानसिक बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को भीड़ में जाने से डर लगने लगता है। यहां तक कि वह सामाजिक-पारीवारिक आयोजनों या शॉपिंग पर जाने से भी कतराने लगता है। © Shutterstock[/caption]
इस बीमारी (Mental disorder Agoraphobia) के लक्षण 20 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में अधिक नजर आते हैं। उन्हें किसी भी भीड़ वाली जगह जाने पर घबराहट होने लगती है। यात्रा से भी वे घबराने लगते हैं। इसका जिक्र छिड़ते ही उन्हें पसीना आना, गला सूखने और दिल की धड़कन तेज होने की समस्या होने लगती है। कई बार हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं और व्यक्ति बेहोश भी हो जाता है।
विशेषज्ञ अब भी एगोराफोबिया के कारण का स्पष्ट रूप से पता नहीं लगा पाए हैं। अधिकांश मामलों में भीड़ से जुड़ा कोई बुरा अनुभव इसकी वजह के रूप में सामने आया है। कई बार मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर में बदलाव आने की वजह से भी लोगों को छोटी-छोटी बातों से घबराहट होने लगती है। अनुवांशिकता की वजह से भी व्यक्ति को यह समस्या हो सकती है।
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किसी भी मानसिक बीमारी को पागलपन मानकर छोड़ देना सबसे बड़ी लापरवाही है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि हर तरह की मानसिक बीमारी की ही तरह एगोराफोबिया (Mental disorder Agoraphobia) का भी इलाज संभव है। इसके लिए दवाओं और काउंसलिंग दोनों का इस्तेमाल करना पड़ता है। बिहेवियर थेरेपी के जरिये ग्रस्त व्यक्ति का खोया आत्मविश्वास फिर से लौटाया जा सकता है।