भारतीय पुरुषों को होती है अक्सर ये दो मानसिक बीमारी, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

सामान्यतया पुरूषों में होने वाली इन दो बीमारियों के बारे में अक्सर लोग ध्यान नहीं देते और गंभीर रूप से इसकी जद में आ जाते हैं।

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Written By: Editorial Team | Updated : June 15, 2018 5:27 PM IST

इस समय मेंस हेल्थ वीक (पुरूष स्वास्थ्य सप्ताह) चल रहा। सामान्यतया पुरूषों में होने वाली इन दो बीमारियों के बारे में अक्सर लोग ध्यान नहीं देते और गंभीर रूप से इसकी जद में आ जाते हैं। इन बीमारियों से सतर्क रहने के लिए हम आज फोर्टिस हीरानंदानी अस्पताल, वाशी के मनोचिकित्सक और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ केदार तील्वे से बात की, आइए जानते हैं इस दो समस्याओं और इनसे बचने के उपाय और इलाज के बारे में।

चिंता विकार (Anxiety)

डॉ तील्वे कहते हैं कि ''कुछ चिंता विकार सामान्य नहीं होते हैं उनके लिए पुरुषों को क्लिनिकल मदद की जरुरत होती है।''

सामाजिक चिंता विकार बेहद गंभीर समस्या होती है। इसका कारण यह है कि इंसान समाज में घुलने मिलने से भी डरने लगता है। इससे उसके मानसिक स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सेक्सुअल परफॉर्मेंस चिंता विकार भी उन पुरूषों में सामान्यतया होती है जो सामाजिक चिंता विकार से परेशान होते है। यह स्थिति तब आती है जब पुरूषों में शीघ्र पतन जैसी समस्या होती है। इसके कारण पुरूषों में अपने साथी को संतुष्ट न कर पाने का मानसिक दबाव बनने लगता है। यह एक खतरनाक स्थिति होती है, इसका सार्थक उपचार आवश्यक होता है।

उपचारः डॉ तील्वे कहते हैं कि ''इसका आसानी से इलाज किया जा सकता है। इसके लिए कुछ दवाओं और व्यक्तिगत थेरपी की जरूरत होती है। इसका इलाज जितना जल्द हो सके करना चाहिए।''

बाइपोलर मूड डिसऑर्डर

Men’s Health Week 2

डॉ तील्वे कहते हैं कि ''यह गहरा मानसिक अवसाद होता है। इसमें बहुत तेज गति से मूड स्विंग होता है जो पूरे दिन तक रहता है।''

जब इंसान इस बीमारी की जद में होता है तो गहरे मानसिक अवसाद से गुजर रहा होता है। इसमें मूड स्विंग होना आम बात होती है, जिसमें कभी इंसान निराश या उदास महसूस करता है तो कभी उत्तेजना या ज्यादा खुशी का भी मूड आ जाता है। इसीलिए इसे बाइपोलर मूड डिसऑर्डर कहा जाता है।

इस बीमारी में कभी-कभी इंसान में ज्यादा खतरे लेने की स्थिति देखी जा सकती है। वह कुछ भी करने की कोशिश करने की कोशिश करने लगता है जिससे उसे नुकसान हो सकता है। इस समस्या से कुछ दवाओं और व्यवहार में परिवर्तन के साथ इस पर काबू पाया जा सकता है।

उपचार

मूड स्टेबलाइजर जैसी साइकोट्रॉपिक दवाएं इसके इलाज के लिए सबसे अधिक कारगर हैं। इसके साथ ही साथ मनोचिकित्सक की देखरेख में इसके असर को आसानी से कम किया जा सकता है। इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि इस तरह की कोई भी स्थिति अगर आती है तो फौरन विशेषज्ञ डॉक्टर से इसके बारे में बात करनी चाहिए और उचित इलाज कराना चाहिए।

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अनुवादक – Akhilesh Dwivedi

चित्रस्रोत:Shutterstock.

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