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मेनोपॉज और हार्ट हेल्थ के बीच क्या है कनेक्शन?

मेनोपॉज के बाद महिलाओं को कई तरह की परेशानियां होती हैं, जिसमें हार्ट से जुड़ी परेशानी शामिल है। अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर मेनोपॉज और हार्ट के बीच क्या कनेक्शन है? आइए समझते हैं-

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Written By: Kishori Mishra | Published : June 24, 2026 12:23 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Madhavi Reddy Vennapusa

मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक नैचुरल स्टेप है, लेकिन यह सिर्फ पीरियड्स बंद होने तक सीमित नहीं है। इस दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनका असर पूरे स्वास्थ्य पर पड़ता है, मुख्य रूप से उनके हार्ट पर इसका असर दिखता है।

हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स में सीनियर कंसल्टेंट ऑब्सटेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी रेड्डी वेन्नापुसा का कहना है कि मेनोपॉज से पहले महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन हार्ट और ब्लड वेसेल्स को सुरक्षा प्रदान करता है। लेकिन जैसे ही यह हार्मोन घटता है, शरीर की नैचुरल सुरक्षा कमजोर होने लगती है और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।

हार्ट की सेहत पर असर कैसे पड़ता है?

मेनोपॉज के बाद शरीर में कई बदलाव एक साथ होते हैं। इनमें सबसे प्रमुख निम्न हैं, जैसे-

  • ब्लड प्रेशर का बढ़ना
  • खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ना
  • गुड कोलेस्ट्रॉल का कम होना, इत्यादि।

इन बदलावों के कारण आर्टरी में धीरे-धीरे फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। यह स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बन सकती है।

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉ. माधवी का कहना है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट डिजीज का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है, क्योंकि एस्ट्रोजन की कमी शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा को कमजोर कर देती है।

क्या कहती है रिसर्च?

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट डिजीज का जोखिम पुरुषों के बराबर या कभी-कभी उससे अधिक हो सकता है। मुख्य रूप से अगर मेनोपॉज 45 साल से पहले हो जाए, तो कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

हार्मोनल बदलाव और अन्य जोखिम

NIH की रिपोर्ट के मुताबिक, मेनोपॉज के बाद सिर्फ हार्ट ही नहीं, बल्कि पूरा मेटाबॉलिक सिस्टम प्रभावित होता है। वजन बढ़ना, शुगर का खतरा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैट जमा होना जैसी स्थिति मिलकर हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इसके अलावा, धमनियों में प्लाक जमने की प्रोसेस भी तेज हो सकती है, जिससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है।

बचाव कैसे करें?

डॉक्टर सलाह देते हैं कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं को अपनी लाइफस्टाइल पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, नमक और तेल कम करना, धूम्रपान से दूरी और समय-समय पर ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल की जांच बहुत जरूरी है।

Disclaimer : ध्यान रखें कि मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह शरीर को एक जरूरी संकेत देता है कि अब हार्ट की सेहत को पहले से ज्यादा देखभाल की जरूरत है। सही लाइफस्टाइल अपनाकर महिलाएं इस चरण के बाद भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकती हैं।