अगर आप लेते हैं ये दवाइयां तो वैक्सीन लगवाने के बाद भी पहनना होगा आपको मास्क, जानें कौन सी हैं ये दवाइयां

रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के हालिया निर्देशों के अनुसार, जो लोग इम्यूनोसप्रेसेन्ट लेते हैं, उन्हें सार्वजनिक स्थानों के लिए बाहर जाने पर मास्क जरूर पहनना चाहिए।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : September 7, 2021 10:38 PM IST

वैक्सीन लेने के साथ-साथ कोरोना नियमों का पालन करने के अलावा संक्रमण के जोखिम को कम करने का कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है। कोरोना वैक्सीन की दो डोज लेने के बाद भी बहुत से लोग वायरस के संपर्क में आ रहे हैं, जिसके बाद भी श्वसन संक्रमण होने का खतरा होने की संभावना बनी रहती है। टीकाकरण केवल गंभीरता के जोखिम को कम करने में कारगर है। एक्सपर्ट भी इस बात को दोहराते हैं कि टीकाकरण पूर्ण सुरक्षा प्रदान नहीं करता है और आपको सार्वजनिक रूप से मास्क पहनने के साथ-साथ दूसरे सभी नियम फॉलो करना सभी के लिए जरूरी है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के हालिया निर्देशों के अनुसार, जो लोग इम्यूनोसप्रेसेन्ट लेते हैं, उन्हें सार्वजनिक स्थानों के लिए बाहर जाने पर मास्क जरूर पहनना चाहिए।

लोगों को इन कारणों से रहना होगा सावधान

आज बहुत से देशों में कोरोना वैक्सीनेशन बहुत तेजी से चल रहा है लेकिन इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि कोई भी वैक्सीन कोरोना वायरस से पूर्ण सुरक्षा नहीं दे सकती है। ऐसे में सभी को संक्रमित होने का समान रूप से खतरा है। लेकिन संक्रमण का खतरातब और अधिक होता है जब दवा के नियमित सेवन या किसी व्यक्ति की बीमारियों के कारण आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। उनकी इम्यूनिटी इतनी मजबूत नहीं होती है कि शरीर में वायरस को पनपने से रोक सके, जिसके परिणामस्वरूप वे आसानी से बीमार हो सकते हैं।

क्यों जरूरी है टीकाकरण

टीकाकरण, हमें इम्यूनिटी देता है लेकिन हर दूसरे व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग होते हैं। टीकाकरण सिर्फ हमें वायरस से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करता है बशर्ते हम हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो कर रहे हों। जामा में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जिन व्यक्तियों को अंग प्रत्यारोपण हुआ होता है उनमें टीके की पहली डोज लेने के बाद 17 प्रतिशत कोविड एंटीबॉडी बनती हैं।

इम्यूनोसप्रेसेन्ट दवाएं इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए मास्क जरूरी

इम्यूनोसप्रेसेन्ट दवाएं, दवाओं का एक अलग वर्ग है, जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली की ताकत को कम या कमजोर करती है। इन वर्गों में से कुछ दवाएं लिवर, हृदय या गुर्दे जैसे अंग प्रत्यारोपण के मामले में दी जाती हैं ताकि शरीर द्वारा प्रत्यारोपित अंग को अस्वीकार करने की संभावना कम हो। अन्य प्रकार की इम्यून सरपास दवाओं का उपयोग ल्यूपस, सोरायसिस और रुमेटीइड गठिया जैसे ऑटोइम्यून विकारों के इलाज के लिए किया जाता है। इसलिए इन रोगों के शिकार लोगों को घर से बाहर निकलते वक्त मास्क जरूरी पहनना चाहिए।

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