
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 28, 2025 2:33 PM IST
Masik dharm ke dauran saaf safai kyun jaruri hai: आज के समय में माहवारी से जुड़ा कलंक केवल महिलाओं का विषय नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बन चुका है। यह एक स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रिया है, फिर भी अधिकांश लड़कियों और महिलाओं को इसके प्रबंधन व स्वच्छता से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती। इसके बजाय, इसे अब भी सामाजिक कलंक, चुप्पी और गलत सूचनाओं से घेर दिया गया है। डॉ. मनन गुप्ता, चेयरपर्सन एवं विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, एलांटिस हेल्थकेयर, नई दिल्ली ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता दिवस एक ऐसा दिन है जो हमें याद दिलाता है कि यह एक सामान्य और नियमित प्रक्रिया है, जिससे जुड़ी चुप्पी अब खत्म होनी चाहिए। यह चिंता की बात है कि आज भी माहवारी से जुड़े विषय पर बात करना शर्म का कारण माना जाता है, जिससे कई लड़कियां और महिलाएं न सिर्फ शारीरिक बल्कि भावनात्मक रूप से भी चुपचाप पीड़ित होती हैं।
आज मासिक धर्म स्वच्छता सिर्फ सैनिटरी पैड या अन्य उत्पादों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें स्वच्छ और सुरक्षित सामग्री का उपयोग, साफ-सुथरी जगह पर बदलाव की सुविधा, उचित जानकारी और सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था भी शामिल है। दुर्भाग्य से, ग्रामीण क्षेत्रों और निम्न-आय वाले समुदायों में आज भी कई लड़कियां और महिलाएं इन मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित हैं। स्कूलों में स्वच्छ शौचालय या सैनिटरी उत्पादों की अनुपलब्धता के कारण अनेक छात्राएं इन दिनों स्कूल नहीं जातीं या पढ़ाई छोड़ देती हैं। खराब मासिक धर्म स्वच्छता यूरिन इन्फेक्शन (UTI), रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इन्फेक्शन (RTI) और त्वचा से जुड़ी समस्याओं का कारण बनती है।
लेकिन इससे भी गंभीर है इसका भावनात्मक असर शर्म, हीन भावना और अकेलेपन का बोझ, जो उनके आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाता है। यही आने वाले समय में लड़कियों और महिलाओं के जीवन पर काफी गहरा असर डाल देता है।
1. यूटीआई और संक्रमण: अगर पैड साफ न हो या समय पर न बदला जाए तो बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे दर्दनाक संक्रमण हो सकते हैं। कुछ मामलों में ये दीर्घकालिक प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। यूरिन इंफेक्शन से बचने केलिए इसका ध्यान रखना जरूरी है।
2. रैशेज और स्किन इरिटेशन का खतरा: एक ही पैड को लंबे समय तक पहनने या अनुपयुक्त सामग्री के उपयोग से खुजली, फंगल इंफेक्शन या चकत्ते हो सकते हैं।
3. एचपीवी संक्रमण का खतरा बढ़ना: बार-बार संक्रमण से गर्भाशय ग्रीवा (cervix) में लगातार सूजन हो सकती है, जो एचपीवी जैसे गंभीर संक्रमणों का रास्ता खोल देती है।
1. स्वच्छता और आराम: वह सैनेटरी उत्पाद चुनें जो साफ-सुथरा और आरामदायक हो जैसे सैनिटरी पैड, टैम्पॉन, मेंस्ट्रुअल कप या पुन: प्रयोज्य कपड़े का पैड।
2. नियमित बदलाव: हर 4-6 घंटे पर पैड बदलना चाहिए या इससे पहले यदि आवश्यक हो।
3. साफ पानी से धोना: हर बार बदलाव के दौरान गुनगुने पानी से सफाई पर्याप्त होती है, कठोर साबुन या इंटिमेट वॉश से बचें।
4. सही निस्तारण: इस्तेमाल किए गए पैड को कागज में लपेटकर फेंके। यदि कपड़े का पैड इस्तेमाल कर रही हैं, तो उसे ठीक से धोकर धूप में सुखाएं।
आज भी कई घरों में माहवारी को ‘चुप रहने’ वाला विषय माना जाता है। कई लड़कियां इसे फुसफुसाहटों में जानती हैं। भारत के कुछ हिस्सों में तो आज भी लड़कियों को माहवारी के दौरान शुद्ध माना जाता है, उन्हें रसोई में जाने, मंदिर जाने या घर के सामान्य स्थानों पर बैठने से रोका जाता है। यह सोच बदलनी होगी।
मांओं को चाहिए कि वे अपनी बेटियों से उनके पहले पीरियड (menarche) पर खुलकर बात करें और उन्हें सहज महसूस कराएं। साथ ही, स्कूलों में लड़कों को भी इस विषय में शिक्षित किया जाना चाहिए। जितना ज्यादा हम इसे सामान्य बनाएंगे, उतना ही कम इसका कलंक होगा।
मासिक धर्म एक अधिकार है, कोई विशेषाधिकार नहीं। और यह समय है, जब हम सब मिलकर इस सामान्य प्रक्रिया को सामान्य रूप से स्वीकारें।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।