बरगद के पत्तों और दूध में छिपे हैं कई गुणकारी लाभ ऐसे करें इस्तेमाल

बरगद की गणना पीपल के समान पूजनीय वृक्षों में की जाती है।

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Written By: Editorial Team | Updated : October 5, 2018 11:05 AM IST

बरगद या वट वृक्ष भारत का एक महत्वपूरेण वृक्ष है यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक विशाल वृक्ष है। यह भारत और पाकिस्तान सहित कुछ अन्य देशों में भी पाया जाता है। भारत में यह लगभग सभी स्थानों पर मिलता है। इसे हिमालय के तराई वाले भागों में भी देखा जा सकता है, लेकिन यह हिमालय के उँचाई वाले भागों में नहीं मिलता है। बरगद की गणना पीपल के समान पूजनीय वृक्षों में की जाती है। यह भारत में पाए जाने वाले वृक्षों में सबसे विशाल व अधिक फैलने वाला वृक्ष है।

बरगद की तासीर ठंडी होती है जो कफ, पित्त जैसी समस्याओं को दूर कर अन्य कई रोगों का भी नाश करता है। बुखार , स्त्री रोग संबंधी समस्याएं उल्टी व त्वचा के रोगों में बरगद के दूध, पत्तों और जड़ का प्रयोग फायदेमेंद होता है।

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पत्ते हैं उपयोगी

बरगद की कोपलें चहरे की कांति बढ़ाने का काम करती हैं। इसकी जड़ों में एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं। इसकी ताजी जड़ों को पीसकर चेहरे पर लगाने से झुर्रियां कम होती हैं। इसके पत्तों को तवे पर सेककर फोड़े के उपर बांधने से लाभ मिलता है। इसके पत्तों की लुग्दी बनाकर शहद और शक्कर के साथ लेने से नकसीर की समस्या में लेने से आराम मिलता है। बरगद के बीजों को पीसकर पीनें से उल्टी की समस्या दूर होती है।

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दूध भी है गुणकारी

जिस दांत में कीड़ा लग गया हो वहां इसके दूध में भीगा फोहा रखने से लाभ मिलता है। लगबग 10 ग्राम बरगद की छाल, कत्था और 2 ग्राम काली मिर्च बारीक पीसकर पाउडर बना लें, इससे मंजन करने से दातों का हिलना,सड़न और बदबू दूूर हो जाती है। बरगद का दूध शक्कर के साथ लेने से बवासीर में भी लाभ मिलता है और इसे चोट पर लगाने से सूजन कम हो जाती है।

अगर बरगद के दूध को कमर पर लेप के रूप में लगाया जाता है तो कमर दर्द में भी आराम मिलता है। फटी पड़ी एडियों में अगर बरगद का दूध लगाया जाय तो इससे काफी ज्यादा राहत मिलती है। बरगद की ताजी कोमल पत्तियों को पाउडर बनाकर खाने से मेमोरी भी अच्छी होती है। इसके पत्तों की राख को अलसी के तेल में मिलाकर सिर पर लगाने से सिर के बाल भी उगने लगते हैं तथा इसके पत्तों को तेल में पकाकर लगाने से बालों से संबंधित सबी तरह के विकार दूर हो जाते हैं। जले हुए स्थान पर इसके पत्तों को पीसकर दही में मिलाकर लगाने पर जलन से आराम मिलता है।

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