
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 16, 2024 7:51 PM IST
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World Hypertension Day 2024: हाइपरटेंशन एक लाइफस्टाइल डिजिज है और एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर यह लम्बे समय तक अनियंत्रित रहे तो इससे हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थितियां बन सकती हैं। जानकारों के अनुसार अगर हाइपरटेंशन के मरीजों का ब्लड प्रेशर लेवल लम्बे समय तक हाई रहता है तो इससे किडनी से जुड़ी समस्याएं, हार्ट फेलियर (Heart Failure) और स्ट्रोक का खतरा (risk of stroke) भी पैदा हो सकता है।
बता दें कि हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (World Hypertension Day 2024) मनाया जाता है। इस साल वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे की थीम है, ‘मेजर योर ब्लड प्रैशर एक्युरेटली, कंट्रोल इट, लिव लॉन्गर।
रेसिस्टैंट हाइपरटैंशन एक ऐसी स्थिति है जिसमें दवाएं खाने के बाद भी किसी का ब्लड प्रेशर लेवल 140/90 से ऊपर होता है। यह एक अच्छी स्थिति नही मानी जाती। डॉक्टरों के अनुसार, हाई बीपी या उच्च रक्तचाप वाले लगभग 20 प्रतिशत मरीज रेसिस्टेंट होते हैं। नारायण हेल्थ के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. देवी शेट्टी (Dr. Devi Shetty) ने कहा कि, अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर लेवलनिस्संदेह सबसे गंभीर स्वास्थ्य चिंताओं में से एक मानी जाती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि रेसिस्टेंट हाइपरटेंशन की स्थिति में कई महीनों और वर्षों तक किसी भी तरह के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन यह आपके स्वास्थ्य के लिए गम्भीर खतरा पैदा करता है।
डॉ. शेट्टी के अनुसार दवा लेने में लापरवाही जैसी कुछ गलतियां और कुछ अन्य करणों से हाइपरटेंशन की समस्या गम्भीर बन सकती है-
इन सब कारणों से रेसिस्टेंट हाइपरटेंशन बढ़ सकता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि, रेसिस्टेट हाइपरटेंशन को प्रभावी ढंग से अंडर कंट्रोल करने के लिए दवाओं के साथ-साथ अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है। साथ ही तनाव को कम करनाभी महत्वपूर्ण है।
डॉ. शेट्टी के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health organisation) के आंकड़ों से पता चलता है कि, भारत में 188.3 मिलियन लोग हाई ब्लड प्रेशर लेवल से प्रभावित हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि, इनमें से केवल 37 फीसदी लोगों को ही सही इलाज मिल पाया है और बहुत से लोगों को अपनी बीमारी के बारे में पूरी तरह से जानकारी भी नहीं है। इसकी बड़ी वजह लोगों में लापरवाही भरा रवैया है। लोग अपने बीपी लेवल की जांच नहीं कराना चाहते और 20 साल की उम्र के बाद के लोग बहुत जरूरी होने पर ही ब्लड प्रेशर लेवल चेक कराते हैं। इससे उन्हें बीमारी का पता देर से चलता है और तब तक बहुत अधिक नुकसान हो चुका होता है।
(IANS)
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