Mammography: जानें ब्रेस्‍ट कैंसर की जांच की इस प्रक्रिया के बारे में

महिलाओं में होने वाले ब्रेस्‍ट कैंसर की जांच करने के लिए मैमोग्राफी एक जरूरी प्रक्रिया है। कुछ महिलाओं को इसके नाम से ही डर लगने लगता है। पर घबराएं नहीं यह ऐसी प्रक्रिया नहीं है, जिससे डरा जाए।

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Written By: Yogita Yadav | Published : July 9, 2019 8:17 PM IST

इन दिनों कैंसर इस तरह बढ़ रहा है जैसे कभी संक्रामक बीमारियां बढ़ा करती थीं। महिलाओं में होने वाले ब्रेस्‍ट कैंसर की जांच करने के लिए मैमोग्राफी (Mammography) एक जरूरी प्रक्रिया है। कुछ महिलाओं को इसके (Mammography) नाम से ही डर लगने लगता है। पर घबराएं नहीं यह ऐसी प्रक्रिया नहीं है, जिससे डरा जाए। आइए बताते हैं आपको इस (Mammography) पूरी प्रक्रिया के बारे में।

क्‍यों जरूरी है मैमोग्राफी

जब भी किसी महिला को अपने स्‍तन में किसी तरह की असामान्‍यता या गांठ महसूस होती है तो उसे डॉक्‍टर आत्‍म निरीक्षण की सलाह देते हैं। पर कई बार इसमें बीमारी का पता नहीं लग पाता। ऐसी स्थिति में मैमोग्राफी (Mammography) करवाने की सलाह दी जाती है। मैमोग्राफी में यह पूरी तरह स्‍पष्‍ट हो जाता है कि ब्रेस्‍ट के भीतर जो गांठ या तरल बन गया है, वह असल में क्‍या है।

क्‍या है मैमोग्राफी

मैमोग्राफी (Mammography) आधुनिक तकनीक का एक ऐसा हिस्सा है जो महिलाओं के स्तनों की जांच कर उन्हें ब्रेस्ट कैंसर के बारे में अवगत कराता है। समय रहते ब्रेस्‍ट कैंसर की जांच का यह एक बेहतर विकल्‍प है। मैमोग्राफी को किसी अस्पताल के एक्स रे विभाग द्धारा किया जाता है। डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि 30 की उम्र के बाद हर दो साल में महिलाओं को मैमोग्राफी करवानी चाहिए।

क्‍या है पूरी प्रक्रिया

इसके लिए आपको कमर के ऊपर के वस्त्र खोलने को कहा जाएगा। हालांकि पहनने के लिए अस्पताल का गाऊन दिया जाता है। बेहतर होगा कि जिस दिन आप मैमोग्राफी (Mammography) करवाने जाएं उस दिन ऐसे कपड़े पहनें, जिनका उपर और नीचे का हिस्‍सा अलग-अलग हो। जैसे जींस-टी शर्ट या साड़ी ब्‍लाउज। मैमोग्राफी करवाने से पहले आभूषण भी खुलवा दिए जाते हैं।

दोनों ब्रेस्‍ट का अलग-अलग

आपको अपने दोनों ब्रेस्‍ट का एक्‍स-रे (Mammography) अलग-अलग करवाना होगा। इस प्रक्रिया के दौरान आपको कुछ सेकंड के लिए सांस रोकने को कहा जायेगा। आपके स्तन संक्षिप्‍त और संकुचित करने के लिए दो प्लास्टिक की प्लेटों के बीच रखे जाते हैं ताकि उनका मैमोग्राम स्‍पष्‍ट हो सके।

गलत नहीं है ब्रेस्‍ट को दबाना

इस प्रक्रिया में डॉक्‍टर कई बार ब्रेस्‍ट को दबाते हैं। स्तन को दबाने से स्तन के टिशू फैलते हैं और स्तन का मोटे क्षेत्रों की एक स्पष्ट छवि उभर कर आती है। आपके स्तनों के आकार और संवेदनशीलता पर निर्भर करता है कि वे कैसे हैं, मैमोग्राफी के इस भाग के दौरान आपको कुछ हलकी असुविधा महसूस होगी।

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सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है यह प्रक्रिया

30 वर्ष की उम्र के बाद डॉक्‍टर सभी महिलाओं को मैमोग्राफी करवाने की सलाह देते हैं। जरूरी नही कि मैमोग्राफी सिर्फ उन्हीं महलाओं को करानी चाहिए जो ब्रेस्‍ट कैंसर से जूझ रही हैं या फिर जिनको ब्रेस्‍ट कैंसर होने की आशंका है। बल्कि एक स्‍वस्‍थ स्‍त्री भी अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे करवा सकती है।

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