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मालवीय नगर अग्निकांड में आग से ज्यादा धुआं बना मौत की वजह, धुएं में फंसने पर सबसे पहले क्या करें?

मालवीय नगर में एक होटल में लगी भीषण आग ने लोगों को डरा दिया। इसकी वजह से कई मासूम लोगों ने अपनी जान गंवाई है। लेकिन, कहा जा रहा है कि लोगों की जान आग की वजह से नहीं, बल्कि धुएं से गई है।

Written By Anju Rawat
Updated : June 4, 2026 7:08 PM IST

smoke malviya nagar case

हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर में एक भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस हादसे में विदेशी नागरिकों समेत 21 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हैं। दरअसल, होटल में आग तेजी से फैल गई और धुआं भर गया। इससे लोगों को बाहर निकलने में मुश्किल हुई, कुछ लोग खिड़कियों से कूदने पर मजबूर हो गए तो कुछ लोगों ने अपनी जान गंवा दी। लेकिन, इस घटना की सबसे चौंकाने वाली बात है कि ज्यादातर लोगों की मौत जलने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई है यानी धुएं की वजह से। आइए, इस लेख में एशियन हॉस्पिटल के रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर और एचओडी डॉ. मानव मनचंदा से जानते हैं कि धुआं कितना खतरनाक होता है और इस स्थिति में लोगों को अपना बचाव कैसे करना चाहिए?

धुआं जानलेवा कब बनता है?

मालवीय नगर के अग्निकांड में लोगों को बाहर निकलने का समय ही नहीं मिला और धुएं की वजह से कुछ ही मिनटों में कई लोगों की जान चली गई। आपको बता दें कि जब आग की वजह से धुआं फैलता है, तो यह सिर्फ धुंध नहीं होती है। यह धुआं कई जहरीली गैसों का मिश्रण होता है। इसमें सबसे ज्यादा खतरनाक होता है-कार्बन मोनोऑक्साइड। धुएं में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड साइलेंट किलर की तरह काम करता है, इसके संपर्क में आने से लोगों की जान चली जाती है।

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  • इस गैस की वजह से शरीर के जरूरी अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड दिमाग और दिल को सबसे पहले प्रभावित करता है, इससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
  • जब ऑक्सीजन की जगह पर धुआं भर जाता है, तो कुछ ही मिनटों में व्यक्ति बेहोश हो जाता है और उसकी जान तक चली जाती है।

धुएं में सबसे पहले क्या होता है?

जब आग ज्यादा फैल जाती है, तो धुएं का असर धीरे-धीरे नहीं बल्कि तेजी से होता है। धुआं कुछ ही मिनटों में आग लोगों की जान ले सकता है। इस दौरान कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं।

जब ये संकेत नजर आते हैं, तो इसका मतलब है कि धुएं की वजह से व्यक्ति को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है और उसके शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो गई है।

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शरीर पर धुएं का असर कैसे पड़ता है?

  • सबसे पहले शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। कार्बन मोनोऑक्साइड की वजह से सिर चकराने लगता है और कोई व्यक्ति सही फैसला नहीं ले पाता है।
  • सांस की नली चोक हो जाती है। धुएं में मौजूद बारीक कण फेफड़ों में जाकर बैठ जाते हैं। इससे फेफड़ों में पानी भर जाता है और सांस की नली सिकुड़ जाती है।

ज्यादातर लोग आग की लपटों को सबसे खतरनाक मानते हैं। लेकिन, आग से ज्यादा इसका धुआं ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। मालवीय नगर अग्निकांड ही नहीं,कई मामलों में देखा जाता है कि लोगों की मौत आग की तुलना में धुआं से ज्यादा होता है।

आग या धुएं में फंस जाएं तो क्या करें?

आग या धुएं में फंसने पर कुछ उपायों को आजमाकर आप अपनी जान बचाने की कोशिश कर सकते हैं।

  • धुआं गर्म होता है, इसलिए यह ऊपर की तरफ उठता है। वहीं, फर्श के पास हवा साफ और ठंडी होती है। इसलिए खड़े होकर भागने के बजाय घुटनों के बल रेंगकर बाहर निकलने की कोशिश करें।
  • एक कपड़े को गीला करें और अपने नाक-मुंह को ढक लें। यह एक फिल्टर की तरह काम करता है। इससे धुएं के मोटे कण फेफड़ों तक पहुंचने से बच सकते हैं और आपकी जान बच सकती है।
  • अगर आप एक कमरे में बंद है और बाहर निकलने का रास्ता बंद है, तो आप दरवाजे के नीचे की दरारों को गीले कपड़ों से बंद कर दें। इससे धुआं अंदर नहीं आ पाएगा।

Disclaimer: मानवीय नगर अग्निकांड में कई लोगों ने अपनी जान गवां दी। लेकिन, इस मामले मेंकई लोगों ने धुएं की वजह से अपनी जान गंवाई। इस स्थिति में आप ऊपर बताए गए टिप्स को फॉलो कर सकते हैं।