Coronavirus: पुरुषों का प्लाज़्मा है कोविड-19 ट्रीटमेंट में ज़्यादा मददगार, जानें क्या है प्लाज़्मा थेरेपी

छ स्टडीज़ में कहा गया है कि पुरुषों के रक्त में महिलाओं की तुलना में एधिक एंटी-बॉडीज़ होती हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसे पुरुष जिन्हें, कोरोना वायरस हुआ था और वे ठीक हो गए हैं, वे बहुत से लोगों की जान बचाने में मदद कर सकते हैँ। क्योंकि, पुरुषों में बहुत अधिक बीमार होने की संभावना होती है। इसीलिए, अगर कोई पुरुष कोविड इंफेक्शन से बच निकला है, तो उसके शरीर में एंटी-बॉडीज़ का निर्माण भी काफी अधिक मात्रा में होता है। ऐसे में पुरुषों का रक्त या प्लाज़्मा ज़्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 23, 2020 5:45 PM IST

Male Plasma for Covid-19: प्लाज़्मा थेरेपी कोविड-19 मरीज़ों के इलाज के लिए कारगर पायी गयी है। कुछ स्टडीज़ में कहा गया है कि पुरुषों के रक्त में महिलाओं की तुलना में एधिक एंटी-बॉडीज़ होती हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसे पुरुष जिन्हें, कोरोना वायरस हुआ था और वे ठीक हो गए हैं, वे बहुत से लोगों की जान बचाने में मदद कर सकते हैँ। क्योंकि, पुरुषों में बहुत अधिक बीमार होने की संभावना होती है। इसीलिए, अगर कोई पुरुष कोविड इंफेक्शन से बच निकला है, तो उसके शरीर में एंटी-बॉडीज़ का निर्माण भी काफी अधिक मात्रा में होता है। ऐसे में पुरुषों का रक्त या प्लाज़्मा ज़्यादा उपयोगी साबित हो सकता है। ( Male Plasma for Covid-19 in hindi)

पुरुषों का प्लाज़्मा है कोविड-19 ट्रीटमेंट में ज़्यादा मददगार:

एनएचएस ब्लड एंड ट्रांसप्लांट, यूके (NHS Blood and Transplant) के अनुसार, इस प्रकार के प्लाज़्मा अगर ट्रायल में पास हो जाते हैं तो इनका इस्तेमाल अस्पताल में भर्ती मरीज़ों के इलाज के लिए किया जा सकता है। ये दावा यूके में अप्रैल-मई महीने में की गयी प्लाज़्मा थेरेपीज़ और उनके 600 डोनर्स का निरीक्षण करने के बाद किया गया। इन सभी डोनेशन्स में से 43 फीसदी पुरुषों के प्लाज़्मा में एंटी-बॉडीज़ का स्तर बहुत अधिक था और उन्हें ट्रायल के लिए उपयुक्त भी पाया गया। जबकि, केवल 29 फीसदी महिलाओं के प्लाज्मा में एंटी-बॉडीज़ का स्तर अच्छा रहा।  इसी तरह एशियाई मूल के लोगों और अधिक उम्र वाले ऐसे मरीज़ों में एंटी-बॉडीज़ काफी ज़्यादा थीं, जिनका कोविड-19 का इलाज अस्पताल में किया गया।

प्लाज्मा क्या है ? ( What is Plasma Therapy)

ब्लड वॉल्यूम का तकरीबन आधा हिस्सा एक पीली रंगत वाले लिक्विड से बनता है। इसे, ही प्लाज़्मा कहते हैं। प्लाज़्मा में ब्लड प्लेटलेट्स के अलावा रेड ब्लड सेल्स और व्हाइट ब्लड सेल्स होती हैं। जब कोई व्यक्ति किसी इंफेक्शन से संक्रमित हो जाता है, तो प्लाज्मा में मौजूद एंटी-बॉडीज़ उस संक्रमण से लड़ने और शरीर को सुरक्षित रखने का काम करती हैं। एंटी-बॉडीज़ वाले प्लाज्मा को कान्वलेसन्ट प्लाज्मा  (convalescent plasma) कहा जाता है। जो कि, कोविड-19 जैसे इंफेक्शन से ठीक हुए मरीज़ों में बनता है। आमतौर पर बीमार पड़ने के 28 दिनों के बाद इन एंटी-बॉडीज़ का निर्माण होता है। (Male Plasma for Covid-19 contains more antibodies)

क्यों है प्लाज़्मा थेरेपी कारगर? (Why Plasma Therapy effective in Covid-19 Treatment):

कान्वलेसन्ट प्लाज़्मा थेरेपी कोविड-19 के मरीज़ों को दिया जा सकता है और इससे उन्हें संक्रमण से उबरने और मरीज़ की जान बचाने में सहायता हो सकती है। फिलहाल यूनाइटेड किंगडम में इस तरह के प्लाज़्मा के 2 ट्रायल्स चल रहे हैं। इसी तरह अमेरिका और अन्य देशों में भी इस प्रकार के ट्रायल पर तेज़ गति से काम चल रहा है।

कौन कर सकता है प्लाज़्मा डोनेट ? (Who can donate Plasma):

चूंकि, एंटी-बॉडीज़ के निर्माण में समय लगता है। इसीलिए, केवल ऐसे व्यक्ति ही प्लाज़्मा डोनेट कर सकते हैं, जो कोविड-19 संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। अच्छी बात यह है कि प्लाज्मा देने के केवल 48 घंटों में डोनर के शरीर में दोबारा प्लाज़्मा का निर्माण हो जाता है और उसकी इम्यूनिटी या सेहत पर इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। ( Male Plasma for Covid-19)

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