
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. Vighnesh Y
Malaria Symptoms
बरसात का मौसम आते ही जहां एक ओर मौसम खुशनुमा हो जाता है। वहीं, दूसरी ओर कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इन्हीं में से एक सबसे गंभीर और लगातार चिंता का विषय बनने वाली बीमारी है मलेरिया। हर साल बारिश के दौरान इसके मामले तेजी से बढ़ते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ जाती है। मलेरिया दुनिया की सबसे पुरानी और खतरनाक संक्रामक बीमारियों में से एक है, जो आज भी लाखों लोगों को प्रभावित करती है। यह बीमारी मुख्य रूप से प्लाज्मोडियम नामक पैरासाइड के कारण होती है, जो संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से इंसान के शरीर में प्रवेश करता है और खून को प्रभावित करना शुरू कर देता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मलेरिया आज भी कई देशों में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां जलवायु उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय है। ऐसे इलाकों में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिलती हैं, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है। हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. विघ्नेश वाई से कहा कि भारत जैसे देशों में मानसून और गर्मी का मौसम मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण बनता है, क्योंकि जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए आदर्श वातावरण तैयार करता है। यही कारण है कि इस मौसम में मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से बचाव और जागरूकता बेहद जरूरी हो जाती है।
मलेरिया का संक्रमण मुख्य रूप से मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है। जब यह मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति का खून चूसता है, तो उसके शरीर में मौजूद प्लाज्मोडियम पैरासाइट मच्छर में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद जब वही मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो यह पैरासाइट उसके खून में पहुंच जाता है। CDC के अनुसार, संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में आमतौर पर 7 से 30 दिन लग सकते हैं, यह पैरासाइट के प्रकार पर निर्भर करता है।
मलेरिया सिर्फ बुखार की बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर एक जटिल बायोलॉजिकल प्रोसेस शुरू करता है। जिसका असर शरीर के अलग-अलग अंगों में होता है। आइए जानते हैं-
1. लिवर स्टेज : मच्छर के काटने के बाद पैरासाइट सबसे पहले लिवर में पहुंचता है और वहां मल्टीप्लाई करता है। इस स्टेज में मरीज को कोई लक्षण महसूस नहीं होते।
2. ब्लड स्टेज : इसके बाद पैरासाइज ब्लड में प्रवेश करता है और रेड ब्लड सेल्स को नष्ट करना शुरू करता है। यहीं से असली लक्षण सामने आते हैं।
मलेरिया के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य वायरल बुखार जैसे लगते हैं, जिससे लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे-
जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, मलेरिया के लक्षण और स्पष्ट हो जाते हैं।
एक पैटर्न में बुखार आना: मलेरिया में बुखार एक पैटर्न में आता है, जैसे ठंड के साथ तेज बुखार आना और फिर पसीना आकर बुखार उतरना। यह साइकल पैरासाइट के आरबीसी के टूटने से जुड़ा होता है।
अत्यधिक पसीना आना : बुखार उतरने के बाद शरीर बहुत ज्यादा पसीना छोड़ता है और मरीज कमजोर महसूस करता है।
एनीमिया होना : रेड ब्लड सेल्स नष्ट होने के कारण शरीर में खून की कमी हो जाती है।
चक्कर आना और कमजोरी : ऑक्सीजन की कमी के कारण दिमाग पर असर पड़ता है और चक्कर आने लगते हैं।
अगर समय पर इलाज न मिले तो मलेरिया गंभीर रूप ले सकता है।
मानसिक भ्रम या बेहोशी : मरीज को समझने में कठिनाई होती है या वह बेहोश हो सकता है।
सांस लेने में दिक्कत होना : फेफड़ों पर असर पड़ सकता है, जिससे सांस लेने में मुश्किल हो जाती है।
दौरे पड़ना : कुछ मामलों में नर्वस सिस्टम भी प्रभावित हो सकता है।
अंगों का फेल होना : लिवर और किडनी पर गंभीर असर पड़ सकता है।
WHO के अनुसार, मलेरिया के गंभीर लक्षण मेडिकल इमरजेंसी है और इलाज में देरी जानलेवा हो सकती है।
मलेरिया की पुष्टि के लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, जैसे-

CDC के अनुसार, सही डायग्नोसिस के बिना इलाज करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
मलेरिया से बचाव इलाज से कहीं ज्यादा आसान और प्रभावी होता है। इसके लिए आपको बस कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-
WHO के अनुसार, मच्छरों को कंट्रोल करना ही, मलेरिया रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
किन लोगों को है मलेरिया का ज्यादा खतरा?
कुछ लोगों को मलेरिया होने का ज्यादा खतरा रहता है, जैसे-
| मलेरिया | डेंगू |
| पैरासाइट के कारण होता है। | वायरस के कारण होता है। |
| एनोफिलीज नामक मच्छर के काटने से होता है। | एडीज नामक मच्छर के काटने से होता है। |
| ठंड लगकर बुखार आता है। | अचानक तेज बुखार आता है। |
| रेड ब्लड सेल्स नष्ट होने लगता है। | प्लेटलेट्स कम होने लगता है। |
अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, जैसे-
Disclaiemr : मलेरिया एक गंभीर लेकिन पूरी तरह कंट्रोल की जा सकने वाली बीमारी है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती देर से पहचान है। अगर शुरुआती लक्षणों को समय पर समझ लिया जाए और सही इलाज शुरू कर दिया जाए, तो मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।