क्या मलेरिया की दवाओं का असर धीरे-धीरे हो रहा है कम?

पिछले कुछ वर्षों की तुलना में भारत में मलेरिया के मामलों में काफी हद तक गिरावट देखी गई है, लेकिन इस अच्छी खबर के साथ एक और चिंता करने वाली चीजें सामने आ रही हैं। कई रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि मलेरिया की दवाओं का असर धीरे-धीरे कम हो रहा है। आइए जानते हैं इस बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : April 23, 2026 6:01 PM IST

Worl Malaria Day : आज भी मलेरिया दुनियाभर के कई देशों की एक बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं बना हुआ है। भारत को 2030 तक मलेरिया फ्री बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए भारत सरकार और कई स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा प्रयास भी किए गएं हैं, जिसकी वजह से पिछले कुछ वर्षों में इसके मामलों में कमी आई है, लेकिन अब एक नई चिंता सामने आ रही है, ऐसा का जा रहा है कि मलेरिया की दवाएं धीरे-धीरे अपना असर खो रही हैं? क्या इस बात में सच्चाई है? इसके बारे में अधिक जानने के लिए आइए जानते हैं कुछ रिपोर्ट्स और डॉक्टर द्वारा कही बातें-

डॉक्टर की क्या है राय?

इस सवाल का जवाब पूरी तरह हां या नहीं, दोनों की कहना बिल्कुल सही नहीं होगा। वर्तमान में मलेरिया के इलाज के लिए सबसे प्रभावी मानी जाने वाली दवाएं, जिन्हें आर्टेमिसिनिन-आधारित कॉम्बिनेशन थेरेपी (ACT) कहा जाता है, अभी भी ज्यादातर मरीजों में कारगर हैं।

लेकिन कुछ दावे किए जा रहे हैं कि मलेरिया पैरासाइट कुछ दवाओं के खिलाफ रेसिस्टेंस विकसित कर रहा है। इससे दवा का असर धीरे-धीरे कम हो सकता है। WHO की रिपोर्ट के अनुसार, अब कई देशों में आर्टेमिसिनिन दवाओं के प्रति पार्शियल रेजिस्टेंस देखा गया है, यानी दवा काम तो करती है लेकिन असर धीमा हो गया है।

दवाओं का असर कम होना, नहीं है कोई नई बात

डॉक्टर कहते हैं कि दवाओं के प्रति रेसिस्टेंस कोई नई बात नहीं है। पहले भी मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली क्लोरोक्विन और सल्फाडॉक्सिन-पाइरीमेथामिन जैसी दवाएं बहुत प्रभावी थीं, लेकिन समय के साथ पैरासाइट ने इनके खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लिया, जिसके कारण इनका उपयोग कई क्षेत्रों में कम हो गया या बंद करना पड़ा। अब यही चिंता नई दवाओं के साथ भी देखने को मिल रही है।

क्या मलेरिया की दवाओं का असर कम हो रहा है? Malaria - Ai Generated Image

एशिया के कुछ देशों में मिले दवा का असर कम होने के संकेत

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में आर्टेमिसिनिन दवाओं के प्रति पार्शियल रेजिस्टेंस के संकेत मिले हैं। इसका मतलब है कि दवा परजीवी को खत्म तो करती है, लेकिन इसमें अधिक समय लग सकता है। इससे इलाज लंबा खिंच सकता है और गंभीर मामलों में जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

दवा का पूरा कोर्स न लेने समस्या को बना देता है गंभीर

डॉक्टर कहते हैं कि दवाओं का असर कम होने की स्थिति को गंभीर लेने के बजाय दवाओं का कोर्स पूरा करने पर ध्यान देने की जरूरत होती है। दरअसल, कई बार मरीज दवाओं का पूरा कोर्स नहीं लेते या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेते हैं। इससे शरीर परजीवी को दवा के खिलाफ मजबूत होने का मौका मिलता है। इसके साथ ही नकली या घटिया दवाओं का इस्तेमाल भी इस समस्या को बढ़ा सकता है।

अभी क्या है भारत का हाल

अगर हम भारत की बात करें, तो यहां मलेरिया के मामलों में काफी गिरावट आई है और सरकार “Test, Treat, Track” रणनीति के जरिए इसे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है। फिर भी कुछ क्षेत्रों में दवा प्रतिरोध के शुरुआती संकेत मिले हैं, जिससे सतर्क रहना जरूरी हो जाता है।

India's Malaria Elimination Milestones India's Malaria Elimination Milestones

इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक नई दवाओं और वैक्सीन पर लगातार काम कर रहे हैं। साथ ही, यह जरूरी है कि लोग मलेरिया के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का पूरा कोर्स लें।

Disclaimer : ध्यान रखें कि मलेरिया की दवाएं अभी भी प्रभावी हैं, लेकिन परजीवियों में बढ़ता रेजिस्टेंस एक चेतावनी है। अगर समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में मलेरिया का इलाज और कठिन हो सकता है। इसलिए जागरूकता, सही इलाज और दवाओं का पूरा कोर्स करना बहुत ही जरूरी है। ताकि स्थिति की गंभीरता को कम किया जा सके।

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