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मेनोपॉज के दौरान बहुत ज्यादा भूख लगना कहीं ये गंभीर बीमारी तो नहीं? इन बातों का ध्यान जरूर रखें महिलाएं

Jyada bhukh lagne ka karan: ज्यादा भूख लगना कई बार मेनोपॉज के कारण हो सकता है और यह शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है जिसे इग्नोर नहीं किया जाना चाहिए।

मेनोपॉज के दौरान बहुत ज्यादा भूख लगना कहीं ये गंभीर बीमारी तो नहीं? इन बातों का ध्यान जरूर रखें महिलाएं

Written by Mukesh Sharma |Published : February 11, 2025 7:34 PM IST

Increased appetite in menopause: स्वास्थ्य से जुड़ी बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती है और कम जानकारी के कारण हमारी सेहत को उनसे नुकसान होने लगता है। महिलाओं को रजोनिवृत्ति से जुड़ी बहुत ही कम जानकारियां होती हैं। दरअसल मेनोपॉज या रजोनिवृत्ति, महिलाओं के जीवन में वह समय होता है, जब उनकी माहवारी स्थायी रूप से बंद हो जाती है। यह आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की आयु के बीच होता है और इसका कारण ओव्यूलेशन (अंडकोष) द्वारा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन बंद हो जाना है। मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण शरीर में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव होने लगते हैं, जैसे कि मूड स्विंग्स, नींद की समस्याएं और अत्यधिक भूख लगना। असल में मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति, महिलाओं के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव का समय होता है, जिसमें हार्मोनल परिवर्तनों के कारण कई शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं। इस दौरान कई महिलाओं को अत्यधिक भूख लगने की समस्या का सामना करना पड़ता है। मगर भूख ही क्यों ज्यादा लगती हैं आइए इसके पीछे के कारणों के बारे में जानें।

1. हार्मोन का असंतुलन (Hormonal imbalance)

मेनोपॉज के दौरान, शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की मात्रा में गिरावट आती है। इन हार्मोनल परिवर्तनों के कारण भूख बढ़ सकती है, क्योंकि एस्ट्रोजन शरीर में भूख को नियंत्रित करने वाली प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। इस असंतुलन के कारण भूख का स्तर बढ़ सकता है।

उपाय: संतुलित आहार लें, जिसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक हो, ताकि पेट लंबे समय तक भरा रहे। इसके अलावा, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करें, जिससे हार्मोनल असंतुलन को नियंत्रित किया जा सके।

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2. इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin resistance)

मेनोपॉज के बाद शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ सकता है, जिससे शरीर की कोशिकाएं ग्लूकोज का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पातीं। इससे ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित हो सकता है और अत्यधिक भूख महसूस हो सकती है।

उपाय: शर्करा और कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन कम करें और अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे सब्जियां, फल और साबुत अनाज खाएं।

3. मूड स्विंग्स व तनाव (Mood swings and stress)

मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव मानसिक स्थिति पर भी असर डालते हैं, जिससे तनाव, चिंता और मूड स्विंग्स हो सकते हैं। ऐसे में कुछ महिलाएं तनाव से निपटने के लिए अधिक खाना खाने लगती हैं, खासकर मीठा या उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ।

उपाय: तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग, ध्यान और गहरी श्वास की तकनीकों का अभ्यास करें। इसके अलावा, अच्छे नींद की आदतें डालें, जो मानसिक स्थिति को बेहतर बनाए रखें।

4. नींद की कमी (Lack of sleep)

मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को नींद से जुड़ी समस्याएं होती हैं, जैसे कि अनिद्रा या रात में बार-बार जागना। नींद की कमी भूख बढ़ाने वाले हार्मोन (जैसे कि घ्रेलिन) को उत्तेजित कर सकती है, जिससे अधिक भूख लगती है।

उपाय: सोने से पहले शांतिपूर्ण वातावरण बनाएं, कैफीन और भारी भोजन से बचें, और नियमित रूप से सोने की आदत डालें।

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अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।