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आज 2 अक्टूबर है और दिन है महात्मा गांधी की जयंती का। इस मौके पर गांधी जी से जुड़ा एक किस्सा आपके लिए जानना बहुत ही जरूरी है। बात सन् 1924 के जनवरी महीने की है, क्योंकि इसी दिन महात्मा गांधी को उनके अपेंडिक्स के ऑपरेशन के लिए ससून अस्पताल लाया गया था। हैरानी की बात ये है कि उस दिन माहौल इतना खराब था कि आंधी के कारण बिजली चली गई और एक टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। लेकिन इस वक्त का तकाजा ही कहा जाएगा क्योंकि वो टार्च भी बंद हो गया ब्रिटिश सेना के सर्जन स्केलपेल ने लैंप में ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
बता दें कि 95वें साल बाद सरकार द्वारा संचालित इस अस्पताल को एक स्मारक में बदल दिया गया है, हालांकि यह जनता के लिए अभी खुला नहीं है। इस कमरे में जरूरी चीजों के अलावा एक मेज, एक ट्रॉली और महात्मा गांधी की सर्जरी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ उपकरण हैं। इसके साथ ही एक दुर्लभ पेंटिंग भी है, जिसमें गांधी का ऑपरेशन किया जा रहा है।
अमेरिकी पत्रकार लुइस फिशर ने अपनी पुस्तक "महात्मा गांधी - हिज लाइफ एंड टाइम्स" में सर्जरी का सारा विवरण दर्शाया गया है।
बता दें कि 18 मार्च 1922 को देश के सफल स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने वाले महात्मा गांधी को छह साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। दो दिन बाद उन्हें गुजरात की साबरमती जेल से स्पेशल ट्रेन से पुणे की यरवदा जेल शिफ्ट किया गया।
फिशर की पुस्तक के अनुसार, महात्मा गांधी को अचानक ही अपेंडिक्स का दर्द उठा, जिसके बाद उन्हें 12 जनवरी, 1924 को यरवदा जेल से ससून अस्पताल ले जाया गया था। सरकार, मुंबई से भारतीय डॉक्टरों के लाने का इंतजार करने को तैयार थी। लेकिन आधी रात से ठीक पहले, ब्रिटिश सर्जन कर्नल मैडॉक ने महात्मा गांधी को सूचित किया कि उन्हें तुरंत ऑपरेशन करना होगा, जिसकी सहमति मिल गई।
जब ऑपरेशन थियेटर सर्जरी के लिए तैयार किया जा रहा था तब सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी के प्रमुख वी.एस. श्रीनिवास शास्त्री और महात्मा गांधी के मित्र डॉ. फाटक को गांधी जी के अनुरोध पर वहां बुलाया गया।
जिसके बाद उन्होंने एक सार्वजनिक बयान का मसौदा तैयार किया, जिसमें ये कहा गया था कि महात्मा गांधी ऑपरेशन के लिए तैयार हैं और डॉक्टर उनके साथ अच्छा व्यवहार कर रहे हैं और सरकार विरोधी आंदोलन नहीं होना चाहिए, चाहे कुछ भी हो जाए।
अस्पताल के अधिकारी और महात्मा गांधी इस बात को जानते थे कि अगर ऑपरेशन सफल नहीं हुआ, तो भारत आग की लपटों में जलने लगेगा।
घोषणा तैयार होने पर महात्मा गांधी ने उसपर पेंसिल में हस्ताक्षर किए, जिसे फिशर ने अपनी पुस्तक में नोट भी किया है। महात्मा गांधी ने हंसते हुए मैडॉक से कहा, "देखो मेरा हाथ कैसे कांपता है, आपको इसे ठीक करना होगा।"
मैडॉक ने जवाब दिया: "हम इसमें ढेर सारी ताकत डालेंगे।" इसके बाद महात्मा गांधी को एनेस्थीसिया दिया गया।
ऑपरेशन के दौरान बाहर तेज आंधी के कारण बिजली ठप हो गई। उस दौरान डॉक्टरों ने एक टॉर्च का प्रयोग लेकिन थोड़ी देर बाद ही ऑपरेशन थियेटर में मौजूद तीन नर्सों में से एक के हाथ में मौजूद ये टार्च भी बुझ गई। उसके बाद गांधी जी के ऑपरेशन को एक लैंप की रोशनी में पूरा किया गया था।
फिशर ने आखिर में लिखा कि महात्मा गांधी ने सफल सर्जरी के बाद मैडॉक को बहुत धन्यवाद दिया और 5 फरवरी, 1924 को सरकार ने महात्मा गांधी की शेष सजा को माफ कर दिया और उन्हें बिना शर्त रिहा कर दिया।