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Written By: Anshumala | Updated : November 20, 2018 11:34 AM IST
Researchers said the hope is that gene therapy will free patients from nearly monthly eye injections by offering a potential "one-and-done" treatment. © Shutterstock.
मैक्यूलर डिजनेरेशन को आयु से संबंधित धब्बेदार अध: पतन (Macular degeneration) के रूप में भी जाना जाता है। इस समस्या के होने पर रेटिना में कमी आ जाती है यानी रेटिना क्षतिग्रस्त होने लगता है। इस समस्या के होने पर आपकी आंखों की देखने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती है। इसका चिकित्सा जगत में कोई इलाज तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन विटामिन, लेजर थेरेपी, दवाओं द्वारा इसे कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यह समस्या ज्यादातर 60 वर्ष से ऊपर के लोगों में होती है।
क्या होता है मैक्यूलर डिजनेरेशन?
यह दो प्रकार का होता है। एक ड्राई मैक्यूलर डिजनेरेशन और दूसरा वेट मैक्यूलर डिजनेरेशन।
ड्राई मैक्यूलर डिजनेरेशन
ड्राई मैक्यूलर डिजनेरेशन में आंख के मैक्युला में एक पीले रंग का पदार्थ इकट्ठा हो जाता है जिसे ड्रुसन (पीले रंग के गुच्छे या गढ्ढे) कहा जाता है। गुच्छे कम होंगे तो आपकी देखने की क्षमता अधिक प्रभावित नहीं होगी लेकिन यदि इनकी संख्या और आकार बढ़ते हैं तो व्यक्ति को पढ़ते या किसी चीज को ध्यान से देखते समय कम दिखाई देने लगता है।
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वेट मैक्यूलर डिजनेरेशन
मैक्यूलर डिजनेरेशन की नम अवस्था वह होती है, जिसमें मैक्युला के नीचे कोरोज से रक्त वाहिकाओं की असामान्य बढ़ोत्तरी हो जाती है। अत्यधिक फुलाव के कारण इन रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुचती है। इससे रेटिना में रक्त और तरल का रिसाव होना शुरू हो जाता है। इसके कारण आंखों की सतह पर लहरदार पंक्तियों के साथ-साथ जगह-जगह चकते बन जानते हैं। यही चकते देखने की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं।
क्या है कारण
बढ़ती उम्र इस बीमारी के होने का मुख्य कारण है। 60 से 65 वर्ष के बीच यह समस्या आम हो जाती है। घर में पहले से किसी को यह रोग है, तो आने वाली पीढ़ी में भी इसके होने की आशंका बढ़ जाती है। जो लोग धूम्रपान करते हैं या सेकेंड हैंड स्मोकर्स हैं, उनमें भी मैक्यूलर डिजनेरेशन के होने की आशंका बढ़ जाती है। वजन अधिक है, तो भी यह बीमारी तेजी से बढ़ सकती है। इसके अलावा हृदय रोग से पीड़ित लोगों में भी मैक्यूलर डिजनेरेशन होने की आशंका अधिक रहती है। मैक्यूलर डिजनेरेशन बिमारी के बढ़ने की अवस्था में व्यक्ति को तनाव और मतिभ्रम जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं मैक्यूलर डिजनेरेशन जिसकी शुरुआत ड्राई (सूखे) मैक्यूलर डिजनेरेशन से होती है, बढ़ते-बढ़ते यह खुद ही नम मैक्यूलर डिजनेरेशन में भी परिवर्तित हो सकता है इसलिए इसकी समय पर जांच और रोकथाम आवश्यक है।