
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr Dinesh Pendharkar
Symptoms of Lymphoma: लिम्फोमा, लिम्फ नोड्स यानी लसीका ग्रंथियों की बीमारी है। लिम्फ नोड्स हमारे शरीर के लसीका तंत्र Lymphatic System का हिस्सा होते हैं। यह तंत्र हमारे शरीर को संक्रमणों से बचाने और प्रतिरक्षा (Immunity) को मजबूत बनाने का काम करता है। जैसे खून शरीर में पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाता है , वैसे ही लसीका तंत्र शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। डॉ. दिनेश पेंढारकर, डायरेक्टर ऑफ सर्वोदय कैंसर इंस्टीट्यूट, सर्वोदय हॉस्पिटल फरिदाबाद, दिल्ली एनसीआर के अनुसार जब हमारे शरीर में कोई संक्रमण होता है, तो लिम्फ नोड्स सक्रिय हो जाते हैं और इनमें लड़ने वाली विशेष कोशिकाएं, जिन्हें लिम्फोसाइट्स कहते हैं, जमा हो जाती हैं। ये लिम्फोसाइट्स खून में जाकर बैक्टीरिया, वायरस या किसी भी बाहरी आक्रमणकारी से शरीर की रक्षा करते हैं।
लिम्फ नोड्स में कई तरह के लिम्फोसाइट्स पाए जाते हैं। लेकिन कभी-कभी इनमें से किसी कोशिका में असामान्यता (Mutation) आ जाती है। जब यह कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और नियंत्रित नहीं रहतीं, तो वहां गांठ या सूजन बनने लगती है। यही स्थिति लिम्फोमा कहलाती है । लिम्फोमा शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है क्योंकि लिम्फ नोड्स लगभग पूरे शरीर में मौजूद रहते हैं, जैसे गर्दन, बगल, छाती के भीतर और पेट के अंदर।
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डॉ. पेंढारकर के अनुसार लिम्फोमा के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर के किस हिस्से का लिम्फ नोड प्रभावित है और उसका आकार कितना बढ़ा है।
गर्दन में: यहां पर लिम्फोमा गांठ या सूजन के रूप में दिखाई दे सकता है ।
छाती मध्य भाग में: शुरुआत में कोई परेशानी नहीं होती , लेकिन जब यह बड़ा हो जाता है तो सांस की नली पर दबाव डाल सकता है । इससे खांसी , भारीपन या सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। (और पढ़ें - सांस लेने में दिक्कत हो तो क्या करें)
पेट के पीछे: बढ़े हुए लिम्फ नोड नसों पर दबाव डाल सकते हैं , जिससे दर्द महसूस हो सकता है ।
कमर या पैरों में: यहां लिम्फोमा त्वचा के नीचे सूजन जैसा दिखाई दे सकता है ।
इसके अलावा, कुछ मरीजों में लगातार बुखार, रात को पसीना आना, थकान, भूख कम लगना और अचानक वजन घटना जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं ।
कभी-कभी लिम्फोमा अस्थि मज्जा (Bone Marrow ) को भी प्रभावित करता है, जो खून बनाने का मुख्य केंद्र होता है। अगर अस्थि मज्जा प्रभावित हो जाए, तो खून की गिनती बिगड़ जाती है। इसका असर इस तरह दिखाई दे सकता है बार-बार बुखार आना आसानी से खून बहना या न रुकना खून की कमी एनीमिया बार-बार संक्रमण होना नकल करने वाली बीमारी लिम्फोमा की चुनौती यह है कि इसके लक्षण कई बार साधारण बीमारियों जैसे संक्रमण, सूजन या खून की सामान्य समस्याओं जैसे लग सकते हैं। इस वजह से कई बार इसका निदान देर से होता है।
अच्छी बात यह है कि लिम्फोमा का उपचार संभव है और यह बीमारी अक्सर इलाज को अच्छी प्रतिक्रिया देती है । डॉक्टर लिम्फोमा के प्रकार और उसकी स्टेज देखकर इलाज तय करते हैं । इसमें दवाइयाँ कीमोथेरेपी , रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और कभी-कभी बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी शामिल हो सकता है । हाल के वर्षों में इसमें और प्रगति हुई है। CAR-T कोशिकाएं नाम की नई थेरेपी ने काफी उम्मीद जगाई है । इसमें रोगी की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को बदलकर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है । यह उन मरीजों के लिए बहुत मददगार हो सकती है , जिन पर पारंपरिक इलाज काम नहीं करता ।
लिम्फोमा एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारी है । शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
लिम्फोमा एक प्रकार का कैंसर है और इसके प्रमुख कारण जेनेटिक हो सकते हैं। इसके अलावा केमिकल व अलग-अलग गैसों के संपर्क में आना भी इसका कारण बन सकता है।
लिम्फ नोड्स में सूजन होना इसका सबसे प्रमुख लक्षण हो सकता है। इसके अलावा दिनभर थकान रहना, अकारण शरीर वजन कम होने लगना, रात के समय ज्यादा पसीना आना, बेचैनी रहना और बुखार आना आदि भी इसके लक्षण हो सकते हैं।
लिम्फोमा एक प्रकार का कैंसर है जो लसीका ग्रंथि यानी लिम्फैटिक सिस्टम में होता है। जब लिम्फैटिक की कोशिकाएं में यह कैंसर युक्त कोशिकाएं बनने लग जाती है, तो यह रोक विकसित हो जाता है।