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lung transplant (AI generated image)
हम अक्सर कहते है कि हार्ट हमारे शरीर का बेहद जरूरी अंग है, जो बिना रुके काम करता हैं लेकिन कभी हमारे फेफड़ों के बारे में हम ऐसा नहीं सोचते हैं। फेफड़े भी दिन-रात बिना रुके ही काम करते रहते हैं और शरीर के एक-एक ऊतक को जिंदा रखते हैं। वहीं फेफड़े शरीर के अंदर होते हुए भी बाहरी वातावरण के संपर्क में काफी ज्यादा आते हैं और आजकल दिल्ली जैसे शहरों में खराब प्रदूषण फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचाता है। यही कारण है कि फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिन्हें शुरू में इग्नोर कर दिया जाता है। बाद में यही बीमारियां गंभीर हो जाती हैं और आखिरी स्टेज में पहुंच जाती हैं, जहां सिर्फ दवाओं और देखभाल से मरीज का जीवन नहीं बच पाता बल्कि उसके लिए ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। लंग ट्रांसप्लांट अपने आप में ही एक बेहद जटिल सर्जिकल प्रोसीजर है और काफी महंगी भी है।
सीओपीडी, इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस, सिस्टिक फाइब्रोसिस और पल्मोनरी आर्टरी हाइपरटेंशन जैसे खतरनाक बीमारियों के लिए आमतौर पर लंग ट्रांसप्लांट किया जाता है। इसलिए फेफड़े खराब होने के शुरुआती लक्षण कभी भी इग्नोर नहीं किए जाने चाहिए। आज भी समय पर डोनर मिलना, मरीज की उम्र, सर्जरी के बाद हाइजीन बनाए रखना और नियमित इम्यूनोस्प्रासांट दवाइयों का सेवन जैसी बहुत की चुनौतियों का सामना हम कर रहे हैं।
बढ़ती फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए लंग ट्रांसप्लांट जैसी सर्जिकल प्रोसीजर को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है और इसके चलते 5 अगस्त, 2026 को बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने अपना कम्प्रेहैन्सिव लंग ट्रांसप्लांट प्रोग्राम शुरू किया है। इसी के साथ अस्पताल ने एंड स्टेज लंग डिजीज से पीड़ित मरीजों के लिए अपनी एडवांस्ड थोरेसिक सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन सर्विसेज का विस्तार किया है।
lung transplant procedure (AI generated image)
यह खासतौर पर उन मरीजों को ध्यान में रखकर किया गया जिनकी फेफड़ों की बीमारी बहुत ज्यादा बढ़ गई है, यानी एंड स्टेज लंग डिजीज विकसित हो चुकी है और अब दवाएं या सामान्य ट्रीटमेंट काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके तहत मरीजों की पूरी जांच, लंग ट्रांसप्लांट सर्जरी और ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक देखभाल की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे इंटरस्टीशियल लंग डिजीज, सीओपीडी, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, पल्मोनरी हाइपरटेंशन, ब्रोन्किइक्टेसिस और फेफड़ों की अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को लाभ मिलेगा, जिनकी वजह से सांस लेने में परेशानी होती है और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
सरल शब्दों में यह एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसमें किसी व्यक्ति के खराब हुए एक या दोनों फेफड़ों को सर्जरी की मदद से निकाल कर किसी हेल्दी डोनर से प्राप्त हुए फेफड़ों को उनकी जगह पर ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। लंग ट्रांसप्लांट आमतौर पर उन मरीजों का किया जाता है जिनकी लंग डिजीज एंड स्टेज यानी आखिरी चरण में आ जाती है और सामान्य ट्रीटमेंट या दवाओं से काम नहीं चल पाता है। बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल का कम्प्रेहैन्सिव लंग ट्रांसप्लांट प्रोग्राम थोरैसिक सर्जरी एवं लंग ट्रांसप्लांटेशन के सीनियर डायरेक्टर डॉ. प्रमोज जिंदल के नेतृत्व में संचालित किया। उनके साथ थोरेसिक सर्जन्स, पल्मनोलॉजिस्ट्स, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञों, इंटेंसिविस्ट्स, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट्स, रीहैबिलिटेशन एक्सपर्ट्स, फिजियोथेरेपिस्ट्स, इन्फेक्शियस डिजीज स्पेशलिष्ट औ ट्रेन्ड नर्सिंग स्टाफ व मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम काम कर रही है। यह इंटीग्रेटेड टीम ट्रांसप्लांट के लिए इवैल्यूएशन करने से लेकर सर्जरी, रिकवरी तथा लंबी अवधि में मॉनिटरिंग की व्यवस्था संभालती है।
organ transplant complication
लंग ट्रांसप्लांट करना अपने आप में एक बहुत कॉम्पलिकेटेड सर्जिकल प्रोसीजर होती है, सर्जरी सफलतापूर्वक होने के बाद भी डॉक्टर्स के सामने एक चैलेंज होता है और वह है रिजेक्शन। क्योंकि हमारा इम्यून सिस्टम किसी भी बाहरी चीज को स्वीकार नहीं करता है, चाहे फिर वह कोई अंग ही क्यों न हो। इसलिए शरीर को बाहर के अंग की पहचान होते ही वह उस पर अटैक करना शुरू कर देता है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में इसे इम्यूनोसप्रासांट्स दवाओं की मदद से रोका जा सकता है। किसी भी ट्रांसप्लांट के बाद ऐसा सामान्य है कि मरीज को जीवनभर इम्यूनोसप्रासांट्स दवाएं खानी पड़ती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य बातों का ध्यान रखना पड़ता है।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी उद्देश्य केवल केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है, जिसमें यह बताया गया है कि फेफड़ों से जुड़ी कोई बीमारी जब बहुत गंभीर और आखिरी चरणों में आ जाती है तो कई बार मरीज का जीवन बचाने का एक अंतिम रास्ता लंग ट्रांसप्लांट ही रह जाता है। Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।