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Written By: Anshumala | Published : February 7, 2020 9:34 AM IST
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मदरहुड हॉस्पिटल्स ने बुलंदशहर, उत्तरप्रदेश के एक 32 सप्ताह के प्रीटर्म बेबी को नया जीवन दिया है। अस्पताल की आधुनिक नियोनेटल केयर युनिट ने अपनी आधुनिक मशीनों, अत्याधुनिक वेंटीलेटर/सीपीएपी मशीनों के साथ बच्चे की जान बचाई। बेबी आर्यन (बदला हुआ नाम) का जन्म बुलंदशहर के एक अस्पताल में गर्भावस्था के 32 सप्ताह में ही हो गया। इस हॉस्पिटल में नियोनेटल इंटेन्सिव केयर युनिट लेवल III युनिट है, जो अपने अनुभवी एवं प्रशिक्षित नियोनेटोलॉजिस्ट्स की टीम के साथ 24/7 हाई-इन्टेन्सिटी नियोनेटल केयर उपलब्ध कराती है। नियोनेटल टीम की प्रशिक्षित नर्सें नवजात शिशुओं की देखभाल में विशेषज्ञ हैं, वे खासतौर पर प्रीटर्म, बीमार और उन नवजात बच्चों की देखभाल में निपुण हैं, जिन्हें एनआईसीयू में विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
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मदरहुड हॉस्पिटल (नोएडा) के पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी कन्सलटेंट डॉ. रमानी रंजन ने कहा, ‘‘आर्यन पहला बच्चा है, जो अस्पताल के बाहर पैदा हुआ और हॉस्पिटल के एनआईसीयू में उसका इलाज किया गया। प्रीटर्म होने के कारण उसके फेफड़े (Lung Malfunction) और अंग पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे। इसके लिए जन्म के दूसरे दिन से उसे कई समस्याएं होने लगीं। अस्पताल में उसका तुरंत इलाज शुरू किया गया। शुरुआती दो दिनों में उसकी हालत बहुत खराब थी। उसे अनुभवी डाॅक्टरों और नर्सों की निगरानी में रखा गया। जल्द ही उसमें सुधार होने लगा। 5 दिनों में उसे छुट्टी दे दी गई और इसके बाद वह बुलंदशहर लौट गया। यह प्रीटर्म बीमार बच्चे का अच्छा उदाहरण है, जिसे सही समय पर नियोनेटल युनिट लाया गया, परिणामस्वरूप आधुनिक सुविधाओं के साथ उसका सही इलाज किया जा सका। अभी वह ठीक है।
भारत में हर साल 0.75 मिलियन नवजात शिशुओं की मृत्यु हो जाती है। यह आंकड़ा दुनिया में सबसे अधिक है। नियोनेटल अवधि यानि जीवन के पहले 28 दिन बहुत अधिक जोखिम भरे होते हैं। पहले 4 सप्ताहों में जोखिम बाद की अवधि से 30 गुना अधिक होता है। फिर भी हमारे देश में नवजात शिुशओं की उचित देखभाल नहीं की जाती। हालांकि, प्रयासों के परिणामस्वरूप देश में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में धीमी गिरावट आई है। जन्म से पहले जटिलताएं और इन्फेक्शन भारत में नवजात शिशुओं की मृत्यु के मुख्य कारण हैं। अगर ऐसे मामलों में जल्द से जल्द उचित कदम न उठाए गए, तो नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करना संभव नहीं है।