
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Medically Verified By: Dr. Naveen Sanchety
फेफड़ों की बीमारी से लोगों की मौत भी हो सकती है।
सांस लेना सबसे नेचुरल काम है। लेकिन जब तक सांस लेने में तकलीफ न हो, हम फेफड़ों का ख्याल नहीं रखते है। इन दिनों प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और लाइफस्टाइल की वजह से फेफड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे खतरनाक बात ये है कि फेफड़ों की बीमारी शुरुआत में बहुत हल्के लक्षण देती है। फेफड़ों की शुरुआती बीमारी को अक्सर लोग सामान्य थकान, मौसम का असर और आसपास का प्रदूषण का इफेक्ट समझकर टाल देते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च बताती है कि भारत में हर 7 में से 1 व्यक्ति 45+ उम्र में obstructive lung disease से जूझ रहा है, लेकिन 90% को इसका पता ही नहीं है।
फरीदाबाद के सेक्टर- 8 स्थित सर्वोदय हॉस्पिटल के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नवीन संचेती कहते हैं कि शुरुआती स्टेज में पहचान लेने पर फेफड़ों की बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है।इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं फेफड़ों से जुड़ी बीमारी के 5 शुरुआती लक्षण जिस पर हर किसी को गौर करना चाहिए।
फेफड़ों की बीमारी घातक होती है।
डॉ. नवीन संचेती बताते हैं कि अगर आपकी खांसी 8 हफ्ते से ज्यादा समय तक रह रही है तो इसे क्रॉनिक कफ कहते हैं। खासकर अगर खांसी के साथ कफ में खून आ रहा है, सीटी की आवाज आ रही है या कफ का रंग बदल गया है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। ये लक्षण ब्रोंकाइटिस, टीबी या शुरुआती लंग कैंसर का संकेत हो सकते हैं।
सीढ़ी चढ़ते समय, थोड़ा चलने पर या बिना काम के ही सांस फूलना नॉर्मल नहीं है। अगर आपको लगता है कि हवा पूरी तरह फेफड़ों तक नहीं पहुंच रही, या सांस लेते समय सीटी/घरघर की आवाज आ रही है तो अलर्ट हो जाएं।ये अस्थमा, COPD या फेफड़ों में सूजन का लक्षण हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि डिस्पनिया यानी सांस की तकलीफ COPD के शुरुआती और सबसे जरूरी लक्षणों में से एक है। इसलिए किसी भी स्थिति में सांस लेने में तकलीफ या घरघराहट होने पर तुरंत फेफड़ों की जांच करवाना जरूरी है।
लगातार खांसी फेफड़ों की बीमारी का संकेत है।
किसी भी कारण से आपकी आवाज बैठ गई है या 2 सप्ताह से ज्यादा समय से आवाज में लगातार बदलाव महसूस हो रहा है? या बिना ज्यादा काम के भी बहुत ज्यादा थकान महसूस हो रही है? तो यह स्थिति लंग कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती है। डॉ. नवीन संचेती कहते हैं कि लंग कैंसर के शुरुआती केस में आवाज में खराश और लगातार थकान देखी जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर को ऑक्सीजन कम मिल रहा होता है।
कई बार फेफड़ों की समस्या सीने में भारीपन, जकड़न या हल्के दर्द के रूप में शुरू होती है। ये दर्द सांस लेते समय, खांसते समय या गहरी सांस लेने पर बढ़ सकता है। डॉक्टर कहते हैं कि इसे अक्सर गैस या मांसपेशियों का दर्द समझ लिया जाता है। लेकिन अगर दर्द लगातार है तो इसे नजरअंदाज न करें। National Heart, Lung, and Blood Institute द्वारा की गई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि निमोनिया जैसे इंफेक्शन में सीने में तेज दर्द फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है।
हमारे साथ खास बातचीत के दौरान डॉक्टर कहते हैं- साल में 2-3 बार निमोनिया, ब्रोंकाइटिस या सीने का इन्फेक्शन होना इस बात का संकेत है कि आपके फेफड़े कमजोर हैं और बैक्टीरिया व वायरस से लड़ नहीं पा रहे। अगर एंटीबायोटिक लेने के बाद भी इंफेक्शन जल्दी ठीक नहीं हो रहा तो ये COPD या सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है। बार- बार सांस का संक्रमण होने पर व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए और अपना इलाज करवाना चाहिए।
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को अपने अंदर सांस से जुड़ी गंभीर समस्या से जुड़ा लक्षण 2 सप्ताह से ज्यादा नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टर से बात करना जरूरी है। इसके साथ ही किसी व्यक्ति को सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत, होंठ या नाखून नीले पड़ना, तेज बुखार के साथ खांसी, कफ में खून आने की परेशानी हो रही है तब भी डॉक्टर से बात करना जरूरी है।
फेफड़ों की बीमारी से बचाव करने के लिए आप नीचे बताए गए उपायों को अपना सकते हैं:
Disclaimer: प्रदूषण, धूल और अन्य कारणों से फेफड़ों की बीमारी होना बहुत ही आम समस्या है। इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है। अगर आपको खुद में फेफड़ों की बीमारी का कोई लक्षण नजर आ रहा है तो इस बारे में तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें और इलाज करवाएं।