लंग कैंसर के शुरुआती संकेत क्यों छूट जाते हैं? जानें किसे करानी चाहिए स्क्रीनिंग

लंग कैंसर को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इस बीमारी का पता अक्सर स्टेज 3 या स्टेज 4 में चलता है। इसलिए समय रहते लंग कैंसर की स्क्रीनिंग करवानी जरूरी है। आइए डॉक्टर से जानते हैं इसके बारे में-

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : August 5, 2026 7:43 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Naveen Sanchety

सर्दी लग गई होगी, धूल की वजह से खांसी है, काम का स्ट्रेस है, इसलिए थकान रहती है। लंग कैंसर के साथ सबसे बड़ा धोखा यही है। किसी व्यक्ति को लंग कैंसर आता है, लेकिन चुपके से। और हम इसके शुरुआती अलार्म को रोजमर्रा की थकान और मौसम समझकर इग्नोर कर देते हैं। नतीजा? जब पता चलता है, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। फरीदाबाद के सेक्टर- 8 स्थित सर्वोदय अस्पताल के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नवीन संचेती कहते हैं कि भारत में इतनी तकनीक आने के बावजूद लंग कैंसर का पता तीसरे या चौथे स्टेज में चलता है। इसका मुख्य कारण है लोग लंबे समय तक चलने वाली खांसी को ज्यादा गंभीर नहीं मानते हैं और इससे राहत पाने के लिए बाजार में मिलने वाले कफ सिरप का इस्तेमाल करने लगते हैं।

सांकेतिक तस्वीर

क्यों देरी में पहचान में आता है लंग कैंसर?

फेफड़े हमारे शरीर का वो हिस्सा हैं जिनमें दर्द के नर्व नहीं होते। इसलिए जब ट्यूमर छोटा होता है, तो आपको दर्द या कोई तेज लक्षण महसूस ही नहीं होता है। दूसरी वजह लंग कैंसर के पहचान में देरी से आने की यह भी है कि इसके लक्षण सामान्य बीमारी जैसे लगते हैं। आइए जानते हैं किन लक्षणों पर हमें गौर करना चाहिए-

  1. 3 सप्ताह से ज्यादा खांसी- सामान्य खांसी 2-3 हफ्ते में ठीक हो जाती है। लेकिन अगर खांसी 3 हफ्ते से ज्यादा है, या खांसी का पैटर्न बदल गया है - पहले सूखी थी अब कफ वाली हो गई है, तो ध्यान देने की जरूरत होती है।
  2. सांस लेने में परेशानी- सीढ़ी चढ़ते वक्त हांफना, थोड़ा चलने पर सांस फूलना। हम इसे उम्र हो गई है या एक्सरसाइज नहीं करते कहकर टाल देते हैं। पर सांस लेने में परेशानी की वजह अगर लगातार बनी रहती है तो इस बारे में डॉक्टर से बात करना जरूरी है।
  3. आवाज में किसी प्रकार का बदलाव- गला बैठ जाना जो 2 हफ्ते से ठीक न हो रहा हो। या सांस लेते-छोड़ते सीटी जैसी आवाज आना भी लंग कैंसर का लक्षण होता है।
  4. छाती में दर्द होना- छाती में चुभन जैसा दर्द जो गहरी सांस लेने पर बढ़े। या हर 2 महीने में छाती का इंफेक्शन होना भी छिपे हुए लंग कैंसर की निशानी हो सकती है।

डॉ. नवीन संचेती कहते हैं समस्या ये है कि ये सभी लक्षण सर्दी, अस्थमा, TB या सिर्फ कमजोरी में भी होते हैं। इसलिए मरीज और कई बार डॉक्टर भी पहले इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

किसे करवानी चाहिए लंग कैंसर की स्क्रीनिंग

कैंसर का इलाज तब सबसे आसान होता है जब वो स्टेज 1 में पकड़ा जाए। और लंग कैंसर को स्टेज 1 में पकड़ने का सिर्फ एक तरीका है - स्क्रीनिंग।स्क्रीनिंग का मतलब है - लक्षण आने से पहले ही जांच करवा लेना। खासकर हाई-रिस्क लोगों के लिए।

1. उम्र और स्मोकिंग हिस्ट्री

अगर आपकी उम्र 50 से 80 साल के बीच है और आपने अपनी लाइफ में 20 पैक-ईयर से ज्यादा स्मोकिंग की है। पैक-ईयर = रोज कितने पैकेट x कितने साल, जैसे रोज 1 पैकेट 20 साल = 20 पैक-ईयर और आपने पिछले 15 साल में स्मोकिंग छोड़ी है या अभी भी करते हैं। अगर ये 3 बातें आप पर लागू होती हैं, तो आप हाई-रिस्क कैटेगरी में हैं। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह पर साल में एक बार लंग कैंसर की स्क्रीनिंग जरूर करवानी चाहिए।

2. परिवार का इतिहास

घर में कोई 30 साल से स्मोकर है और आप उसी धुएं में रहे हैं। इसके अलावा आपके माता-पिता, भाई-बहन में से किसी को लंग कैंसर हुआ है तो भी आप लंग कैंसर की हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से बात करके लंग कैंसर की स्क्रीनिंग जरूर करवानी चाहिए।

डॉ. नवीन संचेती कहते हैं कि लंग कैंसर खतरनाक है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन खतरनाक इसलिए है क्योंकि हम इसे देर से पकड़ते हैं। इसलिए 3 बातें गांठ बांध लीजिए कि हमेशा अपने शरीर की सुनिए - 3 हफ्ते से ज्यादा खांसी, बिना वजह वजन घटना, लगातार थकान को नॉर्मल मत कहिए। अगर आप हाई-रिस्क में हैं तो LDCT स्क्रीनिंग कराइए - ये 10 मिनट की जांच आपकी जिंदगी बचा सकती है। अपने फेफड़े के डॉक्टर या फिजिशियन से इस बारे में पूछें।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी लक्षण या स्क्रीनिंग के लिए अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।