खांसते वक्त महसूस हो कुछ ऐसा तो समझ लीजिए इस अंग में बनने लगा है ट्यूमर! जानें किस तरह पहचानें

जहां तक बात खांसी की है तो अगर आपको बीते कुछ सप्ताह से इसमें कोई फर्क नहीं दिखाई दे रहा है या फिर तीन सप्ताह से ज्यादा वक्त से आपको सांस लेने में परेशानी हो रही है तो ये आपके लिए चिंता का विषय हो सकती है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 4, 2022 6:29 PM IST

बदलते मौसम में अक्सर लोग सीजनल फ्लू का शिकार हो जाते हैं, जिसमें लगातार खांसी और गले में खराश की परेशानी होने लगती है। ये बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है, जिसकी वजह से लोग भ्रमित भी होते हैं। सच कहें तो ये लंग कैंसर के खतरे से भी जुड़ा हुआ है। नेशनल हेल्थ सर्विस ऑफ इंग्लैंड ने हाल ही में कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बताया है, जिनकी समय पर पहचान आपके लिए जीने की नई राह बनाने का काम कर सकती है। समय पर उपचार आपकी जान बचा सकता है और आपको लंग कैंसर की परेशानी से निजात दिला सकता है।

क्या है लंग कैंसर?

जब फेफड़ों में असामान्य कोशिकाएं अनिंयत्रित रूप से बढ़ने लगती है तो शरीर के इस अंग के आस-पास ट्यूमर बनने लगता है, जो हमारे फेफड़ों के काम करने की शक्ति को प्रभावित करता है। ये एक जानलेवा स्थिति और अगर इसका समय पर निदान कर लिया जाता है तो इसका उपचार किया जा सकता है। जहां तक बात खांसी की है तो अगर आपको बीते कुछ सप्ताह से इसमें कोई फर्क नहीं दिखाई दे रहा है या फिर तीन सप्ताह से ज्यादा वक्त से आपको सांस लेने में परेशानी हो रही है तो ये आपके लिए चिंता का विषय हो सकती है।

लंग कैंसर के अन्य लक्षणों में शामिल हैंः

1-बिना वजह के वजन कम होना

2-खांसते वक्त खून आना

3-लगातार थकान रहना

4-बार-बार छाती में संक्रमण होना

5-घरघराहट महसूस होना

6-सिरदर्द

7-हड्डियों में दर्द

8-गला बैठना

9-खांसते वक्त सीने में दर्द

फेफड़ों में कैंसर के लक्षण ?

फेफड़ों में कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, जो श्वसन तंत्र के इस मुख्य अंग से शुरू होती है और धूम्रपान इस बीमारी का सबसे प्रमुख कारक है। लेकिन बात यहीं पर खत्म नहीं होती है। फेफड़ों का कैंसर और भी कई अन्य कारकों की वजह से हो सकता है जैसेः

1-सेकेंड हैंड स्मोकिंग

2-प्रदूषण के अत्याधिक संपर्क में आना

3-रेडिएशन थेरेपी

4-ऐसी जगह काम करना, जहां बहुत ज्यादा धुआं निकलता हो।

5-पारिवारिक इतिहास

ज्यादातर बीमारियों की तरह अगर फेफड़ों का समय पर निदान हो जाए तो इलाज मुमकिन है।

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