Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
-
- हिंदी
Lung Health in Hindi: धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। यह हर धूम्रपान करने वाला व्यक्ति जानता है, फिर भी लत ऐसी ही छुडाए नहीं छुटती। धूम्रपान करने वाले हर व्यक्ति का कहना होता है कि यह उनके तनाव को कम करता है। लेकिन यह आपके फेफड़े, हृदय और रक्त वाहिकाओं पर भी बहुत ही गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। आप लोग इस बात को जानकार भी इसे जारी रखते हैं, क्योंकि निकोटीन की निर्भरता मानसिक और शारीरिक दोनों रूपों में गहरी हो जाती है। इसलिए समझदारी और सही मार्गदर्शन के बिना इसे छोड़ना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में आपको स्वस्थ रहने के लिए धूम्रपान करने के साथ ही सही दिनचर्या भी अपनानी होगी।
फेफड़ों को स्वस्थ रखने का सबसे प्रभावी तरीका है, धूम्रपान की मात्रा को कम करना। कोई भी चीज एकदम से अपना असर नहीं दिखाती है। ऐसे में यदि आपको यह पूरी तरह छोड़ने में परेशानी हो रही है तो धीरे‑धीरे संख्या घटाएं और एक दिन “स्मोक‑फ्री डे” तय करें। इससे फेफड़ों में जमा हानिकारक रसायनों की मात्रा कम होगी और वह स्वस्थ रहेंगे।
स्मोकिंग अगर आप पूरी तरह से छोड़ नहीं पा रहे हैं तो फेफड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए रोजाना व्यायाम करें। योग, प्राणायाम और गहरी सांस लेने की तकनीक फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाती हैं। कार्डियो‑वर्कआउट जैसे- वॉकिंग, जॉगिंग और स्विमिंग भी फेफड़ों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाते हैं और श्वसन प्रणाली को मजबूत करते हैं।
अगर आप धूम्रपान के साथ साथ फल और सब्जियों को सेवन करें तो यह आपके फेफड़ों को होने वेले नुकसान से बचा सकते हैं। इनमें मौजूद विटामिन सी, ई और बीटा‑कैरोटीन फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं। ब्रोकली, गाजर, पालक, बेरीज और नारंगी जैसे फल भी लाभदायक साबित होते हैं। साथ ही पर्याप्त पानी का सेवन करें, जिससे फेफड़ों की म्यूकस झिल्लियां साफ रहती हैं।
धूम्रपान के साथ ही प्रदूषण युक्त हवा भी आपके फेफड़ों को कमजोर करती है। ऐसे में अपने फेफड़ों को दोहरी मार से बचाने के लिए मास्क पहनें, धुएं वाले क्षेत्र से बचें और घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। यह फेफड़ों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम कर सकता है। फेफड़ों को स्वस्थ रखने ये लिए इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
अगर आप स्मोकर्स हैं तो आपके लिए समय‑समय पर फेफड़ों की जांच करवाना जरूरी हो जाता है। स्पाइरोमीटर या एक्स‑रे जैसे टेस्ट फेफड़ों की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करते हैं और किसी भी समस्या को प्रारंभिक चरण में ही पकड़ लेते हैं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।