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गर्मी बढ़ने पर 14 फीसदी तक बढ़ सकते हैं hyponatremia के मामले! जानें किन लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है ये बीमारी

गर्मी बढ़ने पर 14 फीसदी तक बढ़ सकते हैं hyponatremia के मामले! जानें किन लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है ये बीमारी
गर्मी बढ़ने पर 14 फीसदी तक बढ़ सकते हैं 'hyponatremia'के मामले! जानें किन लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है ये बीमारी

मौसम में बदलाव के कारण ढेर सारी स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं, जिसमें से अब सबसे खतरनाक स्वास्थ्य स्थिति 'लो सॉल्ट कंडीशन' सामने आ रही है, जिसकी वजह से अस्पताल में भर्ती होनी की नौबत तक आन पड़ी है।

Written by Jitendra Gupta |Published : March 22, 2022 4:33 PM IST

डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में तेजी से तापमान में वृद्धि हो रही है, जिसकी वजह से लोगों को काफी ज्यादा नुकसान झेल रहे हैं और नौबत यहां तक आ गई है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती तक होना पड़ रहा है। डब्लूएचओ के मुताबिक, इंसानी शरीर में गर्मी बढ़ने के पीछे की वजह पर्यावरण से पैदा होने वाले गर्मी है और दूसरा हमारे शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रिया के दौरान बनने वाली गर्मी। गर्मी के संपर्क में आने पर तेजी से तापमान बढ़ता है और हमारे शरीर की उस तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता भी प्रभावित होती है, जिसकी वजह से हीट स्ट्रोक, बहुत ज्यादा गर्मी महसूस होना और हाइपरथर्मिया जैसी ढेर सारी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम में बदलाव के कारण ढेर सारी स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं, जिसमें से अब सबसे खतरनाक स्वास्थ्य स्थिति 'लो सॉल्ट कंडीशन' सामने आ रही है, जिसकी वजह से अस्पताल में भर्ती होनी की नौबत तक आन पड़ी है।

दुनियाभर का तापमान बढ़ा 3.6 फीसदी

स्वीडन में हुई एक स्टडी के मुताबिक, बता दें कि दुनियाभर में औसतन 3.6 डिग्री फॉरेनहाइट तापमान में वृद्धि हो रही है, जिसकी वजह से रक्त में नमक की मात्रा काफी हद तक कम हो जाती है, जिसकी वजह से अस्पताल में भर्ती होने वाले रोगियों का आंकड़ा 14 फीसदी ऊपर चला गया है। ये एक ऐसी स्थिति है, जिसे हाइपोनेट्रेमिया कहते हैं।

किन वजह से होता है हाइपोनेट्रेमिया

हाइपोनेट्रमिया गर्मी के महीनों में होने वाली एक आम परेशानी है लेकिन अभी तक मौसम में बदलाव के कारण गर्मी के प्रभाव का संबंध अस्पष्ट है। हाइपोनेट्रेमिया, दिल, किडनी और लिवर फेल्योर जैसी बीमारियों के कारण होने वाली समस्या है। इसके अलावा ये बहुत ज्यादा पसीना बहने या फिर ऐसे ड्रिंक्स को पीने की वजह से होती है, जो सोडियम को रक्त में मिलने से रोकते हैं या फिर उसकी मात्रा को कम कर देते हैं।

क्यों जरूरी है सोडियम

सोडियम की जरूरत हमें ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने, नसों और मांसपेशियों के काम को सही तरीके से करने और कोशिकाओं के आस-पास व कोशिकाओं में तरलता को नियंत्रित करने में पड़ती है। सोडियम लेवल में तेजी से गिरावट मतली, आलसपन, मांसपेशियों में क्रेंप, अकड़न और कोमा जैसी स्थिति तक पैदा हो सकती है।

कैसे हुई ये स्टडी

स्वीडन के सोलना स्थित कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्तां ने देश में व्यस्कों और हाइपोनेट्रमिया से अस्पताल में भर्ती हुए 11000 से ज्यादा लोगों से जुड़े 9 साल से ज्यादा वक्त के डेटा का विश्लेषण किया। इनमें सबसे ज्यादा महिलाएं शामिल थीं। इनकी औसतन उम्र 76 साल थी यानी आधी बुजुर्ग थी और आधी जवान।

किसे कितना खतरा

अध्ययन के मुताबिक, सर्दियों के मुकाबले गर्मी के दिनों में ये खतरा 10 गुना तक ज्यादा था और बुजुर्ग महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा था। वहीं जिनकी उम्र 80 साल और उससे ज्यादा थी उनमें गर्मी के दिनों में इस बीमारी से अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 15 गुना ज्यादा था।

शोधकर्ता कहते हैं कि 14 से 50 डिग्री तक तापमान के बीच ज्यादातर लोग खुद को संभाल लेते हैं लेकिन जैसे ही तापमान 59 साल से ऊपर जाता है परेशानी बढ़नी शुरू हो जाती है।

अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कितना

द जर्नल ऑफ क्लीनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित हालिया अध्ययन के मुताबिक, अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि तापमान में 1.8 फॉरेन्हाइट की बढ़ोत्तरी के कारण हाइपोनेट्रमिया से अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 6.3 फीसदी तक बढ़ जाता है जबकि 3.6 डिग्री बढ़ने पर ये खतरा 13.9 फीसदी तक बढ़ जाता है।

क्या कहते हैं शोधकर्ता

कारोलिंक्सा के डिपार्टमेंट ऑफ क्लीनिकल साइंस एंड एजुकेशन में वरिष्ठ लेक्चरार और अध्ययन के प्रमुख लेखक बस्टर मैन्नहीमर का कहना है कि हमारा अध्ययन अपने आप में पहला है, जो तापमान से हाइपोनेट्रमिया के जोखिम को दर्शाता है। इसके साथ हीन हमारे निष्कर्षों को मौसम में बदलाव के अनुरूप कैसे खुद को ढाला जाए और कैसे हेल्थ केयर प्लानिंग की जाए, इसके लिए प्रयोग किया जा सकता है।