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क्या सिर्फ डेंगू में ही कम होते हैं प्लेटलेट्स? जानें Low Platelets के लक्षण, कारण और इलाज

ज्यादातर लोगों को लगता है कि सिर्फ डेंगू होने पर ही प्लेटलेट्स गिरते हैं। जबकि, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुछ अन्य बीमारियों और संक्रमण की वजह से भी प्लेटलेट्स गिर सकते हैं। जानें, क्या होते हैं इसके लक्षण और कारण-

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Written By: Anju Rawat | Published : June 26, 2026 8:22 AM IST

"फलां व्यक्ति को डेंगू हो गया है और उसके प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हैं"- ऐसी बातें आपने अक्सर सुनी ही होंगी। यही वजह है कि ज्यादातर लोग प्लेटलेट्स कम होने को डेंगू से ही जोड़ते हैं। लेकिन, क्या प्लेटलेट्स सिर्फ डेंगू में ही कम होते हैं या इसके लिए कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं? तो इसका जबाव है नहीं... प्लेटलेट्स कई बीमारियों, संक्रमण, दवाइयों और कुछ बीमारियों के इलाज के दौरान भी कम हो सकते हैं। प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य से कम होने को मेडिकल भाषा में थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (Thrombocytopenia)  कहा जाता है। आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि प्लेटलेट्स क्यों कम हो सकते हैं, इसके लक्षण क्या हैं और इलाज कैसे किया जाता है?

harvard health publishing के अनुसार, प्लेटलेट्स का निर्माण बोन मैरो (अस्थि मज्जा) में होता है। ये खून को जमाने में मदद करते हैं। लेकिन, प्लेटलेट्ल कम होने वाले लोगों में ज्यादा मात्रा में रक्तस्त्राव हो सकता है। इतना ही नहीं, जब प्लेटलेट काउंट कम होता जाता है, तो रक्तस्त्राव का खतरना भी बढ़ता जाता है। कुछ लोगों में यह समस्या लंबे समय तक चलती है और कुछ मामलों में यह कुछ ही समय में ठीक हो सकता है।

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शरीर में प्लेटलेट्स कम क्यों हो जाते हैं?

harvard health publishing में बताया गया है कि कई बार बोन मैरो पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट्स नहीं बना पाता है। वहीं, कुछ मामलों में बोन मैरो प्लेटलेट्स तो बनाता है लेकिन शरीर इनको नष्ट करने लगता है। आइए, जानते हैं ये दोनों मामले क्यों होते हैं-

बोन मैरो में प्लेटलेट्स न बनने के कारण

  1. जब कैंसर बोन मैरो तक पहुंचता है, तो प्लेटलेट्स बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो सकती हैं।
  2. एप्लास्टिक एनीमिया एक ब्लड डिसऑर्डर है, जिसकी वजह से भी प्लेटलेट्स का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
  3. रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी प्लेटलेट्स बनाने वाली कोशिकाओं को नकसान पहुंचा सकती हैं। इससे बोन मैरों में प्लेटलेट्स का  उत्पादन नहीं हो पता है।
  4. कुछ दवाइयों की वजह से प्लेटलेट्स बनाने वाली कोशिकाओं की कार्यक्षमता खराब हो सकती है।
  5. जो लोग शराब पीते हैं उनमें भी प्लेटलेट्स का उत्पादन सही तरीके से नहीं हो पाता है। दरअसल, अत्यधिक शराब पीने से बोन मैरो की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और इससे प्लेटलेट्स का उत्पादन कम हो सकता है।

इन सभी स्थितियों में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है। इसलिए कम प्लेटलेट्स को सिर्फ डेंगू से जोड़कर देखना सही नहीं है।

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प्लेटलेट्स कम होने के लक्षण क्या हैं?

Harvard Health के अनुसार, शरीर में प्लेटलेट्स कम होने पर कई लक्षण महसूस हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं-

  • जब शरीर में प्लेटलेट्स कम होते हैं, तो मुंह, मसूड़ों, नाक या मलाशय से खून आ सकता है।
  • थूक, उल्टी, मल या पेशाब में खून दिखाई देना प्लेटलेट्स कम होने का संकेत हो सकता है।
  • अगर पीरियड्स के दौरान सामान्य से ज्यादा रक्तस्त्राव होता है, तो इसे भी प्लेटलेट्स कम होने का लक्षण माना जा सकता है।
  • शरीर पर बड़े-बड़े नीले निशान पड़ना लो प्लेटलेट काउंट का संकेत हो सकते हैं।
  • प्लेटलेट्स कम होने पर पैरों पर छोटे लाल या बैंगनी रंग के धब्बे दिखाई दे सकते हैं।
  • प्लेटलेट्स कम होने पर कुछ लोगों को तेज सिरदर्द या धुंधला दिखाई दे सकता है।
  • अगर आपको हर वक्त कमजोरी या थकान बनी रहती है, तो ये भी लो प्लेटलेट काउंट का संकेत हो सकते हैं।
  • जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द होने पर एक बार प्लेटलेट काउंट का टेस्ट जरूर कराना चाहिए।

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो संकेतों की अनदेखी बिल्कुल न करें। इस स्थिति में डॉक्टर से कंसल्ट करें और प्लेटलेट काउंट की जांच कराएं।

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प्लेटलेट्स कम होने पर इलाज कैसे किया जाता है?

प्लेटलेट्स कम होने का इलाज, इसके कारण पर निर्भर करता है। american cancer society के अनुसार-

  • अगर प्लेटलेट्स बहुत कम हो जाए या खून बहने लगे तो मरीज को प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ सकती है।
  • अगर कीमोथेरेपी या किसी अन्य इलाज की वजह से प्लेटलेट्स कम हुए हैं, तो इस स्थिति में डॉक्टर दवा की डोज कम कर सकते हैं। इस स्थिति में डॉक्टर दूसरे उपचार का विकल्प भी चुन सकते हैं।
  • अगर किसी संक्रमण या इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारी की वजह से प्लेटलेट्स कम हुए हैं, तो उस बीमारी का इलाज करने पर प्लेटलेट्स की संख्या में सुधार हो सकता है।
  • कुछ दवाइयां भी ब्लीडिंग को रोकने और प्लेटलेट्स को बढ़ाने में असरदार हो सकती हैं।

हालांकि, प्लेटलेट्स कम होने का इलाज, हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है। इसलिए अगर प्लेटलेट्स काउंट कम है, तो इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

प्लेटलेट्स कम होने पर आप क्या करें?

american cancer society के अनुसार, अगर प्लेटलेट्स कम होते हैं तो कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। जैसे-

  • प्लेटलेट्स कम है तो सबसे पहले खुद को चोट लगने से बचाएं। ऐसी गतिविधियों को करने से बचें, जिनमें चोट लगने, फिसलने या गिरने का खतरा ज्यादा हो।
  • प्लेटलेट्स कम है तो रेजर ब्लेड की जगह इलेक्ट्रिक शेविंग मशीन का इस्तेमाल करना सही माना जाता है।
  • सॉफ्ट टूथब्रश का इस्तेमाल करें। इससे मसूड़ों से खून नहीं आएगा।

अगर कब्ज या अपच जैसी समस्याएं रहती हैं तो डॉक्टर की सलाह पर मल को नरम बनाने वाली दवाइयों का उपयोग किया जा सकता है।

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प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए?

National Library of Medicine (nlm) के अनुसार, प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए आपको अपनी डाइट का भी खास ख्याल रखना चाहिए। अपने दैनिक आहार में इन चीजों को शामिल करें।

  • प्लेटलेट्स कम होने पर आप कीवी का सेवन कर सकते हैं। कई डाइटिशियन भी प्लेटलेट्स कम होने पर कीवी का सेवन करने की सलाह देते हैं।
  • प्लेटलेट्स कम होने पर अंगूर या अंगूर का जूस पीना फायदेमंद हो सकता है। इनमें पॉलीफेनॉल्स और फ्लेवोनॉयड्स होते हैं, जो प्लेटलेट्स को नष्ट होने से बचा सकते हैं।
  • इनके अलावा, हेल्थ एक्सपर्ट्स फल, सब्जियां, दालें, नट्स और सीड्स को भी डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं।

हाालंकि, इन फूड्स से प्लेटलेट्स बढ़ते हैं, इन दावों के समर्थन में मजबूत क्लिनिकल प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स और प्रोटीन होते हैं, जो शरीर को मजबूत बनाने में समर्थन करते हैं। हालांकि, कई डाइटिशियन प्लेटलेट्स कम होने पर इन फूड्स का का सेवन करने की सलाह देते हैं।

Disclaimer: तो अब आप समझ ही गए होंगे कि प्लेटलेट्स सिर्फ डेंगू की वजह से कम नहीं होते हैं। प्लेटलेट्स कम होने के पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। प्लेटलेट्स कम होने पर रक्तस्त्राव हो सकता है, थकान और कमजोरी का अनुभव हो सकता है। अगर आपको लो प्लेटलेट्स से जुड़े कोई लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और एक बार सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) टेस्ट जरूर कराएं।