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आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान समय में देशभर में करीब 7 करोड़ से ज्यादा लोग बीपी की समस्या से जूझ रहे हैं। जिसमें लो ब्लड प्रेशर और हाई ब्लड प्रेशर दोनों शामिल हैं। © Shutterstock.
ब्लड प्रेशर लो (Tips to control low BP) और हाई दोनों ही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। पर अभी तक लोग लो ब्लड प्रेशर को बहुत गंभीरता से नहीं लेते। जबकि रक्त संचार का लगातार कम रहना ब्रेन हेल्थ के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
लाइफ स्टाइल बदलने के साथ ही कुछ नई बीमारियां भी हमारे जीवन में शामिल हो गईं हैं। हाई और लो ब्लड प्रेशर (Tips to control low BP) की बीमारी ऐसी ही लाइफ स्टाइल डिजीज में शामिल है। आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान समय में देशभर में करीब 7 करोड़ से ज्यादा लोग बीपी की समस्या से जूझ रहे हैं। जिसमें लो ब्लड प्रेशर और हाई ब्लड प्रेशर दोनों शामिल हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि 6 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को यह पता ही नहीं है कि वह इस रोग की चपेट में हैं।
अगर आपकी उम्र 35 क्रॉस कर रही है तो आपको अपनी सेहत के प्रति और भी ज्यादा सजग हो जाना चाहिए। इस रोग से बचने से लिए हम युवाओं को यह सलाह देते हैं कि 35 वर्ष की आयु के बाद से ही नियमित रक्तचाप(ब्लड प्रेशर) (Tips to control low BP) की जांच करावानी चाहिए। यदि रिपोर्ट में ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ या घटा हुआ आता है तो तुरंत ही इसका इलाज करावाएं।
लो ब्लड प्रेशर (Tips to control low BP) ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकता है। इसलिए इसे हल्के में न लें। ब्लड प्रेशर (90-60) को डॉक्टरी भाषा में हाइपो टेंशन कहते हैं। दुनिया की बहुत बड़ी आबादी को इसने प्रभावित किया हुआ है, लेकिन अक्सर लोगों को यह पता नहीं होता कि वे लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं। वैसे लो ब्लड प्रेशर अपने आपमें कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह शरीर में पल रही किसी गंभीर बीमारी जैसे हृदय रोग, तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
छाती में दर्द, सांस फूलना, अनियमित धड़कनें, तेज बुखार, गर्दन का अकड़ जाना, अगर ज्यादा लंबे समय तक लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो उल्टी और डायरिया भी हो सकती है, बेहोशी, अत्यधिक थकान, कुछ समय के लिए धुंधला या कुछ दिखाई न देना।
अत्यावश्यक विटामिनों जैसे बी-12 और आयरन की कमी एनीमिया का कारण बन सकती है, जो लो ब्लड प्रेशर में बदल सकता है।
गर्भावस्था, हार्मोन असंतुलन जैसे कि थायरॉइड की सक्रियता कम हो जाना।
डायबिटीज या लो ब्लड शुगर, दवाओं का प्रभाव, हृदय की असामान्य धड़कनें, हार्ट फेलियर, रक्त नलिकाओं का फैल जाना
स्ट्रोक, लीवर की बीमारियां
लो बीपी को कंट्रोल में करना है तो आपको अपनी डाइट पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इसमें आप हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, गहरे रंग के खाद्य पदार्थ जैसे काले अंगूर, काले खजूर व आलू बुखारा आदि, ड्राई फ्रूट्स, लो फैट मीट, साबुत अनाज और लहसुन को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। इनमें प्रोटीन, विटामिन और फाइबर की उचित मात्रा होती है। जो बीपी को लेवल पर लाने में मदद करती है। कम से कम आठ गिलास पानी और तरल पदार्थ रोज पिएं। खाने में नमक की मात्र बढ़ा दें। डॉक्टर की सलाह से खाने के साथ एक कप चाय या कॉफी पिएं। अगर आप हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं ले रहे हैं तो शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दें।
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