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Stress and Thyroid Disease: मानसिक बीमारियों का गंभीरता से लेना हमारे लिए बहुत जरूरी होता जा रहा है और देखा गया है कि ज्यादातर लोग अभी भी मेंटल हेल्थ को सीरियस नहीं ले रहे हैं। डॉ. विनीता सिंह टंडन, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, ISIC मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी और बताया कि लगातार तनाव से कई ऑटोइम्यून बीमारियां होने का खतरा बढ़ रहा है। ऑटोइम्यून थायराइड डिजीज (AITDs)जैसे हाशिमोटो थायरॉयडिटिस और ग्रेव्स डिजीज दुनिया भर में पाए जाने वाले सबसे आम ऑटोइम्यून रोगों में से हैं। ऑटोइम्यून डिजीज ऐसे रोग होते हैं, जिनमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से शरीर के किसी सुरक्षित व हेल्दी हिस्से को बाहरी कोई हिस्सा समझ कर उसे नुकसान पहुंचाने लगता है। ठीक उसी प्रकार ऑटोइम्यून थायराइड रोगों में हमारा इम्यून सिस्टम थायराइड ग्रंथि को नुकसान पहुंचाने लगता है और इस कारण से थायराइड या तो सामान्य से कम काम करने लगता है (हाइपोथायरायडिज्म) या फिर जरूरत से ज्यादा काम करने लगता है (हाइपरथायरायडिज्म)।
डॉ. टंडन ने के अनुसार हाल ही में हुए कुछ अध्ययनों में यह पाया गया कि पिछले दशक में इन बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं और खासतौर पर महिलाओं में इसके मामले ज्यादा बढ़ रहे हैं। इसके पीछे प्रमुख रूप से तनाव और खराब लाइफस्टाइल इसका कारण बनकर सामने आए हैं। खासतौर पर जो लंबे समय से तनाव से जूझ रहे हैं, उन्हें ऑटोइम्यून थायराइड रोगों का खतरा ज्यादा रहता है।
लंबे समय तक लगातार तनाव बना रहना न सिर्फ मन पर ही भारी रहता है, बल्कि इसका नुकसान शरीर के हार्मोन और इम्यून सिस्टम पर भी पड़ता है। तनाव के समय शरीर में HPA एक्सिस सक्रिय होती है, जिससे कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है। यह हार्मोन थोड़े समय के तनाव में मदद करता है, लेकिन जब लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो इम्यून सिस्टम का संतुलन बिगाड़ देता है।
इसके अलावा जो लोग पहले से थायराइड से जुड़ी किसी ऑटोइम्यून से जूझ रहे हैं या जिन्हें इन समस्याओं का ज्यादा खतरा है, उनमें तनाव की वजह से थायराइड एंटीबॉडीज 40% तक बढ़ सकती हैं, जिससे थकान, सूजन और लक्षण और गंभीर हो जाते हैं। इन बीमारियों में आमतौर पर निम्न शामिल हैं -
जैसा कि ऊपर भी बताया गया है कि ये थायराइड ऑटोइम्यून डिजीज न सिर्फ तनाव के कारण ही बढ़ती है, बल्कि खराब लाइफस्टाइल भी इसके प्रमुख कारणों में से एक है और इसके बारे में हम आपको इस लेख में बताने वाले हैं।
खराब खानपान - ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, मीठा और पोषक तत्वों की कमी सूजन बढ़ाती है। वहीं, एंटीऑक्सीडेंट, सेलेनियम और आयोडीन से भरपूर भोजन थायराइड के लिए फायदेमंद होता है।
कम नींद - नींद की कमी से तनाव हार्मोन बढ़ते हैं और इम्यून सिस्टम कमजोर होता है।
शारीरिक गतिविधि की कमी - बैठी रहने वाली जीवनशैली से तनाव सहने की क्षमता घटती है।
पर्यावरणीय कारण - प्रदूषण, हानिकारक केमिकल्स और धूम्रपान से ऑटोइम्यून रोगों का खतरा बढ़ता है।
ये सभी मिलकर ऐसी स्थिति बनाते हैं, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम थायरॉयड पर हमला करने लगता है।
सबसे पहले आपको यह जानना होगा कि इसमें सबसे ज्यादा भूमिका जेनेटिक्स की ही होती है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव से जोखिम कम किया जा सकता है और बीमारी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है -
तनाव कम करें - ध्यान, योग और गहरी सांस लेने के अभ्यास से शरीर का संतुलन बेहतर होता है।
संतुलित आहार - साबुत और प्राकृतिक भोजन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व थायरॉयड को सहारा देते हैं।
नियमित व्यायाम - हल्का–फुल्का व्यायाम मूड बेहतर करता है और तनाव घटाता है।
अच्छी नींद - रोज 7–8 घंटे की अच्छी नींद हार्मोन संतुलन के लिए ज़रूरी है।
सामाजिक सहयोग - परिवार और दोस्तों का साथ तनाव कम करने में मदद करता है।
ऑटोइम्यून थायराइड रोगों का बढ़ना हमारी तेज रफ्तार जिंदगी, लगातार तनाव और पर्यावरणीय चुनौतियों को दर्शाता है। तनाव और थायरॉयड स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझना न सिर्फ मरीजों के लिए, बल्कि समाज और स्वास्थ्य नीति के लिए भी जरूरी है। सही जीवनशैली अपनाकर हम अपने थायरॉयड और पूरे शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।