
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. Kundan
risk of health problems in doctors (AI generated image)
भारत में ज्यादातर पेरेंट्स का अक्सर यही सपना होता है कि उनके बच्चे आगे जाकर डॉक्टर व इंजीनियर बनें और इसके पीछे उनका विचार मोटी सैलरी से जुड़ा नहीं होता है बल्कि पेरेंट्स को लगता है कि डॉक्टर व इंजीनियर का करियर और हेल्थ दोनों ही सुरक्षित होती हैं। लेकिन किसी भी व्यक्ति का करियर भी सिर्फ तभी सुरक्षित रह पाता है, जब उसकी हेल्थ सुरक्षित होती है। अब अगर आप ये सोच रहे हैं, कि हेल्थ तो डॉक्टर्स की ज्यादा सेफ होती होगी क्योंकि वे खुद डॉक्टर होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। बल्कि वास्तविकता इससे पूरी तरह से अलग है। डॉक्टर अपना पूरा जीवन मरीजों की देखभाल में बिता देते हैं। चाहे इमरजेंसी हो या महामारी, मरीजों के इलाज के लिए वो अपनी सेहत को भी दांव पर लगा देते हैं। डॉ. कुंदन सिंह, कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट एवं रोबोटिक कैंसर सर्जन ने इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी।
घंटों तक काम करना, पूरी नींद न ले पाना और काम का स्ट्रेस बढ़ना यह सिर्फ कॉर्पोरेट लाइफ का हिस्सा नही है, बल्कि एक डॉक्टर को भी ऐसी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। डॉक्टरों को अपनी सेहत का ख्याल रखने का मौका भी नहीं मिल पाता है। नतीजा यह होता है कि दूसरों का इलाज करने वाले डॉक्टर अपने स्वास्थ्य को नजरंदाज करते चले जाते हैं, जिसके कारण उन्हें क्रोनिक बीमारियों का खतरा बढ़ है।
ऐसा नहीं है कि डॉक्टर्स हमेशा हेल्दी रहते हैं और उन्हें किसी तरह की बीमारियां ही नहीं होती, बल्कि हेल्थ प्रोफेशनल लाइन में होने वाली एक आम बीमारी वैरिकोज वेन्स है। सर्जन, एनेस्थेटिक्स और ऑपरेटिंग रूम की नर्सें सर्जरी के दौरान 6 से 12 घंटे तक लगातार खड़े रहते हैं। घंटों तक खड़े रहने के कारण पैरों की नसों में दबाव बढ़ जाता है, जिससे नसों के वॉल्व कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में आगे चलकर वैरिकोज वेन्स डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, इसके अलावा पैरों में अन्य समस्याएं भी होने लगती हैं जैसे -
(और पढ़ें - ज्यादा देर तक खड़े रहने से बढ़ रहा वैरिकोज वेन्स का खतरा)
डीवीटी पैरों में होने वाली ऐसी बीमारी है, जो आमतौर पर लंबे समय तक गतिहीन रहने से होती है और यही कारण है कि डॉक्टरों के लिए इसका खतरा ज्यादा रहता है। कुछ सर्जरी कई घंटों लंबी होती है, जिस दौरान एक सर्जन लगातार खड़ा होकर सर्जरी प्रोसीजर कर रहा होता है और बीच में उसे पानी पीने या कुछ खाने का भी समय नहीं होता है। ऐसे में लंबे समय तक खड़े रहना और डिहाइड्रेशन होना इन बीमारियों का खतरा बढ़ाता है।डॉक्टर ऑपरेशन की व्यस्त सूची के बीच अक्सर पानी पीना या ब्रेक लेना भूल जाते हैं, जिससे खून के थक्के बन सकते हैं।
अगर आप एक डॉक्टर की दृष्टि से देखें तो सर्जरी करते समय एक डॉक्टर को बहुत स्ट्रेस रहता है, क्योंकि कई कुछ मामलों में मरीज के पास समय कम होता है और जल्द से जल्द व सही सर्जरी करके उसे बचाना होता है। ऐसे में एक डॉक्टर की जीवनशैली भी तनावपूर्ण रहती है जो उन्हें डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ाती है। इसके अलावा काम के कारण डॉक्टर कई बार समय पर खाना नहीं खा पाते हैं और यहां तक कि उन्हें कम समय होने के कारण कैफेटेरिया फूड्स पर निर्भर रहना पड़ता है जिसमें कई बार प्रोसेस्ड फूड्स भी होते हैं।
आज कम समय में एक डॉक्टर की हेल्थ के लिए सबसे ज्यादा खतरा कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का बढ़ रहा है। घंटों तक लगातार मरीजों का इलाज करने से हाई बीपी, मोटापा, डिस्लिपिडेमिया और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। नींद की कमी और लंबे समय तक साईकोलॉजिकल तनाव सूजन, एंडोथेलियल डिस्फंक्शन और अस्वस्थ जीवनशैली का कारण बनते हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
(और पढ़ें - कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम स्कैन क्या है)
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य काम के दबाव के कारण बढ़ रही बीमारियों के खतरे के बारे में जानकारी देना है। इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।