
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri
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फिट रहने के लिए कई लोग साइकलिंग का सहारा लेते हैं। नियमित रूर से साइकलिंग करने से न सिर्फ हार्ट हेल्थ को बेहतर करने में मददद मिलती है, बल्कि यह शरीर के वजन को भी कंट्रोल करने में प्रभावी हो सकता है। इसके अलावा साइकलिंग करने से पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और तनाव कम करने में भी फायदेमंद मानी जाती है। यही वजह है कि आजकल फिटनेस के लिए साइकलिंग करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति घंटों तक लगातार बाइक या साइकिल चलाता है और सही पोस्चर या सही बाइक फिटिंग का ध्यान नहीं रखता, तो इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। खासकर पुरुषों में लंबे समय तक सीट पर बैठने से पेल्विक एरिया, रीढ़ की हड्डी और नसों पर दबाव बढ़ सकता है।
यशोदा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरो एंड स्पाइन सर्जन एंड क्लिनिकल डायरेक्टर- एडवांस एंडस्कोपी स्पाइन सर्जरी डॉ. बाला राजा शेखर चंद्रा येतुकुरी का कहना है कि साइकलिंग एक बेहतरीन लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज है, लेकिन लंबे समय तक बिना ब्रेक लिए बाइक चलाने से पेरिनियम पर लगातार दबाव पड़ सकता है। इससे कुछ पुरुषों में सुन्नपन, ग्रोइन पेन और अस्थाई रूप से ब्लड फ्लो प्रभावित होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

नियमित रूप से अगर आप साइकलिंग करते हैं, तो पूरे पूरे शरीर के लिए फायदेमंद मानी जाती है। यह एक लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज है, इसलिए दौड़ने की तुलना में जोड़ों पर कम दबाव पड़ता है। इसके अलावा यह हार्ट और लंग्स की कार्य क्षमता को बढ़ाने, वजन कम करने और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने में भी मदद करती है।
ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, नियमित साइक्लिंग करने वाले लोगों में हृदय रोग और समय से पहले मृत्यु का खतरा कम देखा गया।
डॉ. येतुकुरी का कहना है कि जब कोई व्यक्ति कई घंटों तक लगातार बाइक चलाता है, तो शरीर का पूरा वजन सीट पर पड़ता है। इससे पेरिनियम पर दबाव बढ़ सकता है, जहां महत्वपूर्ण नसें और ब्लड वेसेल्स मौजूद होती हैं। लगातार दबाव के कारण कुछ पुरुषों में जननांगों में सुन्नपन, झुनझुनी, ग्रोइन पेन या अस्थाई रूप से यौन स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां महसूस हो सकती हैं।
द जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, लंबे समय तक गलत प्रकार की सीट पर साइकलिंग करने से पेरिनियल प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे कुछ पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
सिर्फ पेल्विक एरिया ही नहीं, बल्कि गलत पोस्चर में लंबे समय तक बाइक चलाने से कमर, गर्दन और घुटनों में दर्द की समस्या भी हो सकती है। सीट की ऊंचाई गलत होने या हैंडलबार का सही एडजस्टमेंट न होने से रीढ़ की हड्डी और घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। समय के साथ यह दर्द क्रॉनिक भी हो सकता है।

डॉ. येतुकुरी सलाह देते हैं कि लंबे समय तक बाइक चलाने वालों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए। हमेशा अपनी लंबाई के अनुसार सही साइज की बाइक चुनें। सीट और हैंडलबार की ऊंचाई सही रखें।
प्रेशर-रिलीफ सैडल का इस्तेमाल करें और अच्छी क्वालिटी की पैडेड साइक्लिंग शॉर्ट्स पहनें। हर 30 से 60 मिनट के बीच कुछ मिनट का ब्रेक लें, खड़े होकर स्ट्रेचिंग करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में प्रकाशित एक समीक्षा भी बताती है कि सही बाइक फिटिंग, उपयुक्त सीट और नियमित ब्रेक लेने से साइक्लिंग से जुड़े अधिकांश जोखिमों को कम किया जा सकता है।
अगर बाइक चलाने के बाद बार-बार जननांगों में सुन्नपन, तेज दर्द, पेशाब करने में परेशानी, यौन स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कत, लगातार कमर या गर्दन का दर्द महसूस हो रहा है और आराम करने के बाद भी ये लक्षण ठीक नहीं हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
Disclaimer : साइक्लिंग पुरुषों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद एक्सरसाइज है, लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से किया जाए। सही बाइक फिटिंग, आरामदायक सीट, बेहतर पोस्चर और समय-समय पर ब्रेक लेने जैसी छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आप लंबे समय तक सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से साइक्लिंग का आनंद ले सकते हैं।