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इस नई तकनीक से 24 घंटे बाद भी लीवर में रहेगी जान ! liver transplant में मिलेगी सफलता

''नोर्मोथर्मिक मशीन परफ्यूजन'' के जरिए डोनर से अंग को निकाले जाने के 24 घंटे बाद तक इसे जीवित रखा जा सकेगा।

Written by Anshumala |Published : May 10, 2018 5:37 PM IST

भारत में प्रत्येक वर्ष लीवर सिरोसिस से लाखों लोगों की जानें जाती हैं। साथ ही इस क्रोनिक लीवर डैमेज के कारण हजारों लोगों को लीवर प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) करवाने की जरूरत पड़ती है। लीवर ट्रांसप्लांट हेपेटाइटिस ए, बी या सी, लीवर ट्यूमर, लीवर कैंसर आदि गंभीर बीमारियों में भी करवाने की जरूरत पड़ती है। अधिक से अधिक लोगों का लीवर ट्रांसप्लांट हो सके, इसके लिए अधिक अंग का उपलब्ध होना भी जरूरी है। इसके लिए लीवर को देर तक जीवित रखना भी जरूरी है। अब एक ऐसी तकनीक आ गई है, जिससे यह संभव हो सकेगा। डोनर से लीवर को निकाले जाने के 24 घंटे के बाद तक यह तकनीक लीवर को जीवित रखेगी।

ऑर्गनऑक्स और भारत में इसके विशिष्ट भागीदार ड्यूरेंट लाइफसाइंसेज ने एक नई अत्याधुनिक लीवर प्रत्यारोपण तकनीक पेश की है। ''नोर्मोथर्मिक मशीन परफ्यूजन'' (एनएमपी) नामक इस अनोखे प्रक्रिया को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा स्थापित कंपनी ऑर्गनऑक्स ने डेवलप किया है। यह कंपनी कोल्ड प्रिजर्वेशन तकनीक को प्रतिस्थापित करेगी और डोनर से अंग को निकाले जाने के 24 घंटे बाद तक इसे जीवित रखेगी।

कैसे काम करती है तकनीक

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एनएमपी तकनीक लीवर में ऑक्सीजनयुक्त ब्लड और पोषक तत्वों को पंप करती है और बर्फ में लीवर के संरक्षण से जुड़ी ग्राफ्ट इंजरी के खतरे पर काबू पाने में मदद करती है। भारत में इस मशीन का पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है। यह मशीन मस्तिष्क से मृत डोनर द्वारा नए दान किए गए लीवर को लंबे समय तक जीवित रखने में मदद करेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह डॉक्टरों को यह जांचने में मदद करेगी कि दान दिए गए लीवर प्रत्यारोपण से पहले मशीन पर कितनी अच्छी तरह काम करेंगे, जिससे प्रत्यारोपण के सफल होने की संभावना बढ़ जाएगी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

मेदांता इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर ट्रांसप्लांटेशन के अध्यक्ष, मुख्य सर्जन और ऑर्गनऑक्स (ऑक्सफोर्ड, ब्रिटेन) के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. ए.एस. सोइन ने कहा, ‘‘यह मशीन पिछले 20 वर्ष में अंग प्रत्यारोपण में सबसे महत्वपूर्ण प्रगति में से एक है। लीवर को प्रत्यारोपण से पहले एनएमपी पर रखने से यह बेहतर ढंग से काम करेगा, जिससे प्रत्यारोपण सुरक्षित हो जाएगा। इस तकनीक के जरिए लीवर को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में मदद मिलेगी, क्योंकि यह मशीन 24 घंटे तक अंग को जीवित रख सकती है।

इस तकनीक का दूसरा फायदा यह है कि दान दिए गए अंगों में हल्का-सा नुकसान होने पर भी इनका प्रत्यारोपण नहीं किया जाता था, लेकिन अब इस तकनीक का उपयोग करके, इन्हें पुनर्जीवित किया जा सकता है। मुझे उम्मीद है कि एनएमपी के अब भारत में उपलब्ध होने से, बेहतर परिणामों के साथ 30 प्रतिशत अधिक ट्रांसप्लांट करना संभव होगा। इस मशीन की मदद से भारत में पहला लीवर ट्रांसप्लांट पिछले महीने बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल में 56 वर्षीय मरीज में किया गया।

हैदराबाद के ड्यूरेंट लाइफसाइंसेज के सीईओ श्री सुबिथ कुमार ने कहा, ‘‘इससे पहले निकाले गए लीवर को प्रीजर्वेशन फ्ल्यूड से धोकर बर्फ पर रखा जाता था, जिसके कारण कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती थीं, खासकर जब इसे 10-12 घंटे से अधिक समय तक संरक्षित रखा जाता था। इस नई तकनीक के आने से डॉक्टरों को इस तरह के नुकसान के बिना प्रत्यारोपण के लिए लीवर मिल जाएगा। यह मशीन प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त अंगों के अस्वीकृति दर को कम कर देती है। इससे लीवर फेलियर से पीड़ित मरीजों के जीवन बचाने वाले लीवर ट्रांसप्लांट को सफल बनाना संभव हो जाएगा।

स्रोत:Press release. 

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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