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अगर आपका मानना है कि मात्र शराब पीने से ही लीवर फेल होता है तो आप गलतफहमी में है। ऐसा देखा गया है कि लीवर की बीमारी होने में मात्र बहुत ज्यादा शराब का सेवन ही जिम्मेदार नहीं है। दरअसल बहुत से लोग जिन्हें लीवर की बीमारी है, वे बिल्कुल भी शराब का सेवन नहीं कर रहे होते हैं। लीवर फेलियर के कुछ प्रारंभिक लक्षण और संकेतों में आपकी त्वचा तथा आंखों की पुतलियों का पीला हो जाना, आपके ऊपरी दाहिने पेट में दर्द होना, पेट में सूजन, मतली, उल्टी, अस्वस्थ महसूस करने की सामान्य भावना, नींद में रहना या भ्रम होना या मीठी गंध महसूस होना और कंपकंपी लगना शामिल हो सकता है।
इस तथ्य को भूल जाना चाहिए कि लीवर फेलियर की घटना जानलेवा होती है। अगर कोई आँखों या त्वचा में अचानक से पीलापन, ऊपरी पेट में कोमलता; या कोई असामान्य मानसिक स्थिति, व्यक्तित्व या व्यवहार में बदलाव महसूस करता है, तो तुरंत डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए।
अत्यधिक शराब पीने के अलावा लीवर खराब होने के कुछअन्य कारण नीचे बताये गए हैं:
बहुत ज्यादा एसिटामिनोफेन (टाइलेनॉल, पेरासिटामोल, आदि) का सेवन कई देशों में एक्यूट लीवर फेलियर का सबसे बड़ा कारण होता है। भारत में पेरासिटामोल सबसे ज्यादा ज्ञात एसिटामिनोफेन का रूप है। अध्ययन से पता चला है कि कई दिनों तक एसिटामिनोफेन के बहुत ज्यादा सेवन के कारण या कई दिनों तक हर दिन ओवर डोज से लीवर फेलियर की घटना हो सकती है।
कावा, एफेड्रा, स्कलकैप और पेनिरॉयल जैसी हर्बल दवाएं और सप्लीमेंट एक्यूट लीवर फेलियर के लिए जिम्मेदार होते हैं। हालांकि ऐसे केसेस बहुत कम देखे जाते हैं। हमारे पास इस तरह के कारणों पर बहुत ही कम डेटा मौजूद है। इसलिए जब हर्बल सप्लीमेंट लेने की बात आती है, तो इसके बारे में विधिवत जानकारी बढ़ाना और जड़ी-बूटियों तथा हर्बल उत्पादों के संभावित खतरों के बारे में जन जागरूकता फैलाना जरूरी है। ऐसी दवाओं की प्रभावकारिता और सुरक्षा के लिए सख्त नियम और प्री-क्लीनिकल स्टडीज जरूर होनी चाहिए।
हेपेटाइटिस A, हेपेटाइटिस B, और हेपेटाइटिस C से एक्यूट लीवर फेलियर हो सकता है। इन सभी बीमारियों में वायरस मुख्य रूप से हमारे लीवर पर हमला करते है, जिससे लीवर में चोट और सूजन आ जाती है। हेपेटाइटिस C सबसे गंभीर होता है और इस केस में लीवर की सूजन इतनी अधिक होती है कि इससे लीवर आसानी से खराब हो सकता है। एपस्टीन-बार वायरस, साइटोमेगालोवायरस और हर्पीज सिम्प्लेक्स इसी तरह के अन्य वायरस हैं जिससे लीवर ख़राब हो सकता है।
इस वजह से लीवर फेलियर की घटना बहुत ही कम देखी जाती है। गर्म मौसम में शारीरिक मेहनत करने से लीवर पर किस तरह से प्रभाव पड़ता है इसको लेकर कई स्टडी चल रही है। यह देखा गया है कि हेपैटोसेलुलर डैमेज को ठीक नहीं किया जा सकता है।
एंटीबायोटिक्स, नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स और एंटीकॉन्वेलेंट्स आदि प्रिस्क्रिप्शन दवाओं से एक्यूट लीवर फेलियर की घटना हो सकती है। आमतौर पर दवा से होने वाली लीवर की चोट थेरेपी को रोकने के कुछ दिनों से लेकर एक हफ्ते में ठीक होना शुरू हो जाती है। कुछ केसेस (एसिटामिनोफेन, नियासिन) में यह बहुत तेजी से ठीक होता है लेकिन ज्यादातर केसेस में चोट कई हफ्तों या महीनों तक पूरी तरह से ठीक नही हो पाती है।
जिन टॉक्सिन से एक्यूट लीवर फेलियर हो सकता हैं उनमें जहरीला जंगली मशरूम अमानिता फालोइड्स शामिल है। इन्हे अगर कभी-कभी खाया जाए तो यह सुरक्षित हो सकता है। कार्बन टेट्राक्लोराइड, जो वार्निश, वैक्स और अन्य सामग्रियों में पाया जाता है, एक तरह का टॉक्सिन है जो एक्यूट लीवर फेलियर के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
NAFLD कई लोगों में लीवर खराब होने का एक प्रमुख कारण होता है। NAFLD होने पर लीवर की कोशिकाओं में बहुत ज्यादा फैट जमा हो जाता है। NAFLD होने के प्रमुख कारकों में मोटापा, गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी, हाई कोलेस्ट्रॉल और टाइप 2 डायबिटीज हैं।
Inputs By: डॉ प्रवीण झा, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी- कंसल्टेंट, डीएम, एमडी, रीजेंसी सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ