लिवर कोएगुलोपैथी क्या है? क्या हैं इस बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीके

लिवर कोएगुलोपैथी क्या है? डॉक्टर बता रहे हैं कैसे लिवर की बीमारी खून जमने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है-

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 8, 2026 11:06 AM IST

लिवर हमारे शरीर का एक ऐसा अंग है, जो खून में मौजूद जहरीले पदार्थ, शराब, दवाइयों और टॉक्सिन्स को फिल्टर करने का काम करता है। लिवर की सबसे खास बात यह है कि जब तक इसमें कोई गंभीर बीमारी न हो जाए यह कोई खास संकेत नहीं देता है। यही कारण है कि 10 में से 8 मामलों में लिवर की बीमारी का पता काफी देर से चलता है। लिवर से जुड़ी कई बीमारियां हैं, इन्हीं में से एक है लिवर कोएगुलोपैथी। लिवर कोएगुलोपैथी में खून जमने की परेशानी होने लगती है। अगर इसका इलाज समय पर न किया जाए तो यह गंभीर होकर जानलेवा तक साबित हो सकता है। तो चलिए नई दिल्ली स्थित एस्टर RV हॉस्पिटल के हेपेटोलॉजी और ट्रांसप्लांट विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नवीन गंजू से जानते हैं लिवर कोएगुलोपैथी क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?

लिवर कोएगुलोपैथी क्या है?

डॉक्टर बताते हैं कि आसान भाषा में कहें तो लिवर कोएगुलोपैथी वह समस्या है जिसमें लिवर खून जमाने के लिए जरूरी प्रोटीन ठीक से नहीं बना पाता है। इसके कारण शरीर में जरूरत से ज्यादा ब्लीडिंग होने लगती है या कई बार खून की नसों में क्लॉट बनने का खतरा भी बढ़ जाता है। आमतौर पर जब लिवर कोएगुलोपैथी की बीमारी की बात आती है तो लोग इसे शराब पीने वालों की बीमारी मानते हैं, लेकिन इन दिनों खराब खानपान, फैटी लिवर, मोटापा, डायबिटीज और वायरल इंफेक्शन के कारण भी लोगों लिवर कोएगुलोपैथी की समस्या हो रही है।

लिवर की बीमारी देर से पता चलती है। लिवर की बीमारी देर से पता चलती है।

लिवर और खून जमने का क्या संबंध है?

डॉ. नवीन गंजू के अनुसार, जब शरीर में चोट लगती है तो खून बहना रोकने के लिए कुछ खास क्लॉटिंग फैक्टर की जरूरत होती है। ये फैक्टर लिवर बनाता है। अगर लिवर कमजोर हो जाए तो शरीर पर्याप्त मात्रा में ये प्रोटीन नहीं बना पाता है। जिसके कारण खून देर से जमता है और ब्लीडिंग बढ़ सकती है। इसके साथ ही, लिवर ऐसे तत्व भी बनाते हैं जो खून को जरूरत से ज्यादा जमने से रोकते हैं। इसलिए लिवर खराब होने पर शरीर में ब्लीडिंग और ब्लड क्लॉट दोनों का खतरा बना रहता है।

लिवर कोएगुलोपैथी के मुख्य कारण

किसी व्यक्ति को लिवर कोएगुलोपैथी होने का कोई एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैः

  1. फैटी लिवर
  2. हेपेटाइटिस वायरस
  3. डायबिटीज और मोटापा
  4. विटामिन K की कमी
  5. अधिक मात्रा में शराब का सेवन

लिवर कोएगुलोपैथी के लक्षण

लिवर की अन्य बीमारियों की तरह ही लिवर कोएगुलोपैथी के लक्षण सामान्य तौर पर पहली स्टेज में नजर नहीं आते हैं। जैसे- जैसे यह बीमारी लिवर को अपनी चपेट में लेने लगती है, तब शरीर कुछ संकेत देने लगता है। लिवर कोएगुलोपैथी के लक्षणों में शामिल हैः

  1. शरीर पर नीले निशान पड़ना
  2. छोटी चोट लगने पर भी ज्यादा देर तक खून बहना
  3. बार-बार ब्लीडिंग होना
  4. ब्रश करते समय नाक से खून आना
  5. शारीरिक थकान और कमजोरी
  6. पेट में सूजन
  7. त्वचा और आंखों का पीला पड़ना
  8. पैरों में सूजन दिखाई देना
  9. खून की उल्टी होना

लिवर कोएगुलोपैथी शराब पीने के कारण भी होता है।

लिवर कोएगुलोपैथी क्यों खतरनाक है?

डॉ. नवीन गंजू का कहना है कि लिवर कोएगुलोपैथी में सबसे बड़ी समस्या यह है कि मरीज को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि लिवर खराब हो रहा है। जब तक बीमारी सामने आती है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। कई मामलों में मरीज को अचानक गंभीर ब्लीडिंग हो सकती है। वहीं कुछ लोगों में नसों में खून का थक्का बन सकता है जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक भी आ जता है। इसलिए लिवर कोएगुलोपैथी को घातक माना जाता है। यही कारण है कि लिवर कोएगुलोपैथी के शुरुआती लक्षणों पर गौर करना बहुत जरूरी है। अगर शुरुआती स्टेज में लिवर कोएगुलोपैथी के लक्षण पता चल जाए तो इसका इलाज तुरंत करवाना जरूरी है।

लिवर कोएगुलोपैथी से बचाव के लिए क्या करना चाहिए?

  1. लिवर कोएगुलोपैथी से बचाव करने के लिए सही खानपान को अपनाना जरूरी है। इसलिए खाने में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
  2. लिवर कोएगुलोपैथी और लिवर से जुड़ी बीमारी न हो इसके लिए शराब और सिगरेट से पूरी तरह से दूरी बनाकर ही रखें।
  3. लिवर की बीमारियां होने का एक मुख्य कारण मोटापा और अनियंत्रित वजन होना भी है। इसलिए वजन को कंट्रोल करने की कोशिश करें। अगर आपका वजन ज्यादा है तो इसे कम करने के लिए एक्सरसाइज करें।
  4. लिवर की बीमारियों से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह पर हेपेटाइटिस B की वैक्सीन जरूर लें।

Disclaimer: लिवर कोएगुलोपैथी ऐसी समस्या है जिसमें लिवर और खून जमने की प्रक्रिया दोनों प्रभावित हो जाते हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और अक्सर देर से पता चलती है। इसलिए इस बीमारी से बचाव करने के लिए खानपान, एक्सरसाइज और जीवनशैली को सुधारें।

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