
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : February 16, 2026 7:24 PM IST
Medically Verified By: Dr. Atampreet Singh
Risk of Dementia in Hindi: डिमेंशिया यानी दिमाग से जुड़ी एक ऐसी बीमारी जिसमें मरीज का दिमाग कुछ काम ठीक से नहीं कर पाता है, जैसे सोच-विचार करना, याद करना या तर्क देना आदि। हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि डिमेंशिया दरअसल, कोई एक बीमारी नहीं बल्कि दिमाग से जुड़े कई अलग-अलग लक्षणों का एक समूह है। लोगों को अक्सर लगता है कि डिमेंशिया अक्सर बचपन से ही होने वाली कोई दिमागी बीमारी है, लेकिन शार्दाकेयर हेल्थसिटी के सीनियर डायरेक्टर एवं हेड (न्यूरोसाइंसेज) डॉ. आत्मप्रीत सिंह ने बताया कि लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ खराब आदतें भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकती हैं और ज्यादातर लोग इसे इग्नोर कर देते हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि “डिमेंशिया को अक्सर बढ़ती उम्र की सामान्य समस्या समझ लिया जाता है, लेकिन हाल की रिसर्च यह दिखाती है कि इसके कई मामलों का संबंध हमारी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल से भी है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि डिमेंशिया के लगभग 50 फीसद मामले ऐसे होते हैं, जिनके जोखिम कारकों को लाइफस्टाइल की आदतों में समय रहते सही बदलाव करके बदलाव किया जा सकता है।”
डॉ. सिंह ने कहा कि सबसे पहले समझना जरूरी है कि डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं बल्कि दिमागी समस्याओं से जुड़े कई लक्षणों का एक समूह है जैसे सोचने-समझने व निर्णय लेने की क्षमता धीरे-धीरे कम होना आदि। इसमें अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियां भी शामिल हैं। कई लोग सोचते हैं कि इसे रोका नहीं जा सकता, लेकिन लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारण ऐसे हैं जिन्हें कंट्रोल करके जोखिम कम किया जा सकता है।
रिसर्च में जिन प्रमुख लाइफस्टाइल फैक्टर्स की बात सामने आई है, उनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, शराब का सेवन, धूम्रपान, शारीरिक रूप से एक्टिव न होना और मानसिक डिप्रेशन जैसी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। इसके अलावा भी कुछ जोखिम कारक हो सकत हैं जैसे सामाजिक अलगाव होना, शिक्षा की कमी, सुनने से जुड़ी समस्या और प्रदूषण आदि।
हमारा शारीरिक स्वास्थ्य पूरी तरह से हमारी लाइफस्टाइल हैबिट्स पर ही निर्भर करता है, जैसे नियमित एक्सरसाइज करने से ब्लड फ्लो बेहतर होता है, ब्रेन सेल्स को पर्याप्त ऑक्सीजन व अन्य जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। संतुलित आहार भी अच्छी जीवनशैली का एक हिस्सा है और इसलिए हरी सब्जियां, मौसमी फल और सूखे मेवे जैसे फूड्स का सही मात्रा में सेवन करना दिमाग के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसके साथ ही नींद पूरी लेना, तनाव कम करना और मानसिक रूप से सक्रिय रहना जैसे पढ़ना, पहेलियाँ हल करना या नई चीजें सीखना दिमाग को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।
आजकल डिजिटल लाइफस्टाइल और बैठकर काम करने की आदतों ने भी जोखिम बढ़ाया है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहना या लगातार स्क्रीन पर रहना मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। इसलिए दिनभर में छोटे-छोटे ब्रेक लेना और सक्रिय रहना जरूरी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डिमेंशिया की रोकथाम जीवन के किसी एक चरण तक सीमित नहीं है। युवा अवस्था से ही हेल्दी आदतें अपनाने से उम्र बढ़ने पर भी दिमाग स्वस्थ रहने की संभावना बढ़ जाती है। ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराना, धूम्रपान से दूरी और सामाजिक रूप से जुड़े रहना दिमागी स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी कदम हैं।
अगर परिवार में किसी व्यक्ति में याददाश्त कमजोर होना, बार-बार चीजें भूलना, व्यवहार में बदलाव या रोजमर्रा के कामों में परेशानी जैसे लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज न करें और समय पर न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें। सही समय पर पहचान और लाइफस्टाइल में सुधार से डिमेंशिया की गति को धीमा किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।”
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।