
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr. S K Agarwal
Indian organ donation day (AI generated image)
जिन लोगों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट के जरिए एक नया जीवन मिलता है, वह उनके जीवन की एक नई शुरुआत ही मानी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब किडनी, लिवर, हार्ट या लंग्स जैसा शरीर का कोई महत्वपूर्ण अंग काम करना लगभग बंद ही कर दे, तो उसके बिना जीवन जीवन संभव नहीं होता है। ऐसे में जब ऑर्गन ट्रांसप्लांट के जरिए किसी व्यक्ति को नया जीवन मिलता है, तो उसे एक तरह के नया जीवन ही मिलता है। हालांकि, क्या ट्रांसप्लांट से नया अंग मिलते के बाद एक व्यक्ति का जीवन पूरी तरह से सामान्य हो जाता है या फिर जीवनभर के लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव आ सकते हैं? एक्सपर्ट्स के अनुसार जब व्यक्ति के शरीर में कोई ऑर्गन ट्रांसप्लांट किया जाता है, तो उसके जीवन में क्या बदलाव आते हैं और उसे जीवनभर के लिए किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है।
लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में प्रो. एसके अग्रवाल के अनुसार हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम बेहद बाहर की चीजों को लेकर बेहद सेंसिटिव होता है और ट्रांसप्लांट किया हुआ अंग भी उसके लिए बाहर का ही होता है। उसे अपनाने के लिए जीवनभर इम्यूनोसप्रासांट्स दवाएं खानी पड़ती हैं। इन दवाओं का समय और खुराक डॉक्टर द्वारा ही निर्धारित की जाती है, जिनका ध्यानपूर्वक पालन करना जरूरी होता है। ये दवाएं मरीज को जीवन भर खानी पड़ती हैं और अगर एक भी खुराक छूट जाए तो इससे ट्रांसप्लांट किए गए नए अंग को नुकसान पहुंच सकता है।
ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद दी जाने वाली इम्यूनोसप्रासांट्स दवाएं आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कंट्रोल करके रखती हैं, जिससे वह बाहरी अंग पर रिएक्ट नहीं कर पाती है और अंग सुरक्षित रहता है। लेकिन इम्यूनोसप्रासांट्स दवाओं के प्रभाव के कारण इम्यून सिस्टम भी इतने अच्छे से काम नहीं कर पाता है और इस कारण से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, मरीजों को नियमित रूप से हाथ धोने, भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचने और बीमार व्यक्तियों के संपर्क में न आने की सलाह दी जाती है। यदि बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में कठिनाई या अन्य किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण महसूस हो रहे हैं तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।
ट्रांसप्लांट से ऑर्गन प्राप्त करने वाले के साथ-साथ ऑर्गन डोनर के जीवन में भी काफी बदलाव आ सकते हैं, जो इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति ने कौन सा अंग डोनेट किया है। ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजी - रीनल साइंस के एक्सपर्ट डॉ. उदित गुप्ता के अनुसार अगर किसी व्यक्ति ने एक अपनी एक किडनी को डोनेट किया है, तो उसे आगे अपने जीवन के लिए खास ध्यान रखना होगा। क्योंकि उसके शरीर की फिल्ट्रेशन प्रक्रिया का लोड उठाने के लिए अब उसके पास सिर्फ एक ही किडनी है। ऐसे में उसे निम्न सलाह दी जाती है -
इसके अलावा जिस व्यक्ति ने अपनी किडनी को किसी दूसरे व्यक्ति को डोनेट किया है, तो उसे नियमित रूप से डॉक्टर से जांच कराते रहना चाहिए। डॉक्टर समय-समय पर किडनी फंक्शन टेस्ट व अन्य जरूरी टेस्ट करके यह पता लगाते रहेंगे कि आपके शरीर की किडनी अच्छे से काम कर पा रही है या नहीं।
ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद जीवन पूरी तरह के बदल जाता है और उससे व्यक्ति को नया जीवन तो मिलता है इसके साथ-साथ अपने स्वास्थ्य को लेकर नई जिम्मेदारियां भी मिलती हैं। यह एक तरह के जीवन के लिए दूसरा मौका है और इस दूसरे मौके को सफल बनाने के लिए जिम्मेदारियां और ज्यादा बढ़ जाती हैं। इसलिए ऑर्गन डोनर डे के मौके पर हम हर उस व्यक्ति को जिनका ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ है या फिर जिन्होंने ऑर्गन डोनेट किया है, यह सलाह देते हैं कि अपनी हेल्थ को एक अनमोल गिफ्ट की तरह रखें।
डिसक्लेमर: आज इंडियन ऑर्गन डोनर डे है और इसके मौके पर पब्लिश किए गए इस लेख का उद्देश्य केवल इसका उद्देश्य केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है। इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और और Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।