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Written By: Jitendra Gupta | Updated : February 15, 2023 7:30 PM IST
बच्चों में ल्यूकीमिया का इस तरह लगाएं पता! जानें बच्चों में घातक कैंसर के लक्षण और इलाज
leukemia in Kids : ल्यूकेमिया सफेद रक्त कोशिकाओं का एक कैंसर है। आपको ये जानकर होगी कि ये कोशिकाएं संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं और कैंसर का इन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाना आपके लिए काफी घातक साबित हो सकता है। शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशयालिटी हॉस्पिटल, सीनियर कंसलटेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, डॉ. वसीम अब्बास कहते हैं कि चाइल्डहुड ल्यूकेमिया बच्चों में कैंसर का सबसे आम रूप है। ग्लोबोकैन के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 25,000 बच्चों में कैंसर का निदान किया जाता है और इनमें से लगभग 9000 को ब्लड कैंसर होता है। बता दें कि आमतौर पर 2- 8 साल के आयु वर्ग में ब्लड कैंसर पाया जाता है।
बच्चों में ल्यूकेमिया के दो मुख्य प्रकारों के बारे में बता रहे हैं, जो कि अलग-अलग तरीके से बच्चों को अपना निशाना बनाते हैंः
1- एक्यूट लिम्फोसाईटिक ल्यूकेमियाः इसे लिम्फोब्लास्टिक या लिम्फोइड ल्यूकेमिया भी कहा जाता है।
2-एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमियाः इसे माइलोजेनस, ग्रैनुलोसाइटिक, मायलोसाइटिक, माइलॉयड या मायलोब्लास्टिक ल्यूकेमिया भी कहा जाता है।
बच्चों में ल्यूकेमिया के प्रारंभिक लक्षणों की बात करें तो अक्सर उन्हें सबसे ज्यादा समस्या बोन मैरो से संबंधित होती हैं। आइए जानते हैं ल्यूकेमिया के सामान्य लक्षणों के बारे में, जिन्हें पहचानकर आपको तुरंत टेस्ट कराने की सलाह दी जाती हैः
1-एनीमिया: बच्चा थका हुआ और उसकी स्किन पीली दिखाई दे सकती है। इसके अलावा उसकी सांस तेजी से चलती है।
2-पेट में दर्द: दर्द, भूख कम लगना या वजन कम होना जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
3-सूजे हुए लिम्फ नोड्स: बाहों के नीचे या कमर, छाती या गर्दन में लिम्फ नोड्स सूज सकते हैं।
4-रक्तस्राव या चोट लगना: बच्चों को अधिक आसानी से चोट लगना शुरू हो सकता है।
5-बार-बार होने वाले संक्रमण: बच्चे को बुखार, नाक बहने और खांसी के साथ बार-बार वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है।
6-हड्डी और जोड़ों का दर्द: बोन मैरो के दबाव के कारण बहुत तेज दर्द। ठीक वैसा-जैसा गठिया के दौरान जोड़ों में दर्द होता है।
7-सांस लेने में कठिनाई: घरघराहट, खांसी, या सांस लेने के दौरान दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
ल्यूकेमिया का उपचार अलग-अलग हो सकता है और आपका डॉक्टर बच्चे के खतरे के स्तर को देखते हुए ये तय करेगा कि कौन सा उपचार विकल्प ज्यादा बेहतर साबित होगा। बच्चे के लिए जोखिम का स्तर उसकी उम्र, उसकी स्वास्थ्य स्थिति, जेनेटिक, ल्यूकेमिया के प्रकार, बीमारी कैसे बढ़ रही है, बच्चे के उपचार झेलने की क्षमता पर निर्भर करता है। ल्यूकेमिया के उपचार में शामिल हैंः
इस चिकित्सा पद्धति में शक्तिशाली दवाएं आपके बच्चे को खाने या फिर उन्हें आईवी के जरिए दवा दी जाती है। ये दवाएं तेजी से बढ़ रही कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं, जैसा कि कैंसर में होता है।
स्पाइन कोर्ड यानि रीढ़ की हड्डी के आसा-पास वाले हिस्से में सुई के जरिए दवा दी जाती है।
ये तरीका बोन मैरो के बढ़ने के लिवर, लिम्फ नोड्स और स्पलीन में सूजन को कम करने में मदद करता है।
बोन मैरो में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए कीमोथेरेपी की हाई डोज और रेडिएशन थेरेपी दी जा सकती है। उसके बाद बोने मैरो में नष्ट कोशिकाओं को बदलने के लिए हेल्दी स्टेम कोशिकाओं की आवश्यकता होती है। ऐसा करने के लिए डोनर स्टेम सेल IV द्वारा दिए जाते हैं। रक्त प्रवाह के माध्यम से ये स्टेम सेल्स बोन मैरो में अपना रास्ता बनाते हैं। ये ताजा स्टेम कोशिकाएं फिर सामान्य सफेद रक्त कोशिकाओं, लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स बनाना शुरू कर देती हैं।
ये शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं को खोजने और उन्हें मारने में मदद कर सकती हैं।
इस चिकित्सा पद्धति का उपयोग लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स को बदलने के लिए किया जा सकता है।
संक्रमण को रोकने या उनका इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक दी जाती है।