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बारिश के मौसम में बढ़ जाता है लेप्टोस्पायरोसिस खतरा, जानें क्या हैं इसके लक्षण और कारण

लेप्टोस्पायरोसिस के मामले मानसून में ज्यादा देखने को मिल सकते हैं। यह संक्रमण जानवरों से इंसानों में फैलता है। दूषित पानी पीने से इस संक्रमण का खतरा बढ़ता है। इसका समय पर इलाज बहुत जरूरी है। वरना, यह किडनी, लिवर और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।

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Written By: Anju Rawat | Updated : July 12, 2026 9:05 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Raman Kumar

बारिश का मौसम भले ही ठंडक और गर्मी से राहत लाता है। लेकिन, इस मौसम में कई तरह के संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड के साथ-साथ लेप्टोस्पायरोसिस रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। Centres for Disease Control and Prevention के अनुसार, यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो आमतौर पर जानवरों से इंसानों में फैलता है। अगर इस बीमारी का समय पर इलाज न मिले, तो किडनी, लिवर, ब्रेन और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार बताते हैं कि लेप्टोस्पायरोसिस Leptospira नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। यह एक जूनोटिक बीमारी है यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। आमतौर पर चूहे, भैंस, सूअर और अन्य कई जानवर इस बैक्टीरिया कैरियर हो सकते हैं। दरअसल, संक्रमित जानवरों के पेशाब से यह बैक्टीरिया मिट्टी तक पहुंच सकता है और मिट्टी से पानी में पहुंच सकता है। मानसून में गलियों और सड़कों में पानी भरने की वजह से इस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

लेप्टोस्पायरोसिस कैसे फैलता है?

CDC के अनुसार, यह संक्रमण कई तरीकों से फैल सकता है। इनमें शामिल हैं-

बाढ़ या जलभराव वाले पानी में नंगे पैर चलने से लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ सकता है। इससे खुले घाव या खरोंच के जरिए बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है।

कई बार पानी में संक्रमित जानवरों का पेशाब मिला होता है, इस दूषित पानी को पीने से भी लेप्टोस्पायरोसिस हो सकता है।

दूषित पानी के आंख, नाक या मुंह के संपर्क में आने से लेप्टोस्पायरोसिस रोग हो सकता है।

आपको बता दें कि यह बीमारी आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती है।

लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण क्या होते हैं?

CDC के अनुसार, संक्रमण के 2 से 30 दिनों के भीतर लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें शामिल हैं-

  • तेज बुखार आना
  • सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द होना
  • ज्यादा ठंड लगना
  • कमजोरी और थकान महसूस होना
  • मतली और उल्टी होना
  • दस्त लगना और पेट दर्द होना
  • त्वचा या आंखों का पीला पड़ना
  • त्वचा पर चकत्ते होना

हालांकि, ये लक्षण डेंगू, मलेरिया या फ्लू जैसे लग सकते हैं। इसलिए अगर ऐसे लक्षण महसूस हो तो जांच जरूर कराएं।

क्या यह जानलेवा हो सकता है?

आमतौर पर अगर बीमारी का समय पर जांच और इलाज किया जाए, तो यह ठीक हो सकता है। लेकिन, कुछ मामलों में यह शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। जैसे-

  • पीलिया हो सकता है।
  • किडनी फेल हो सकती है।
  • लिवर को नुकसान पहुंच सकता है।
  • सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
  • मस्तिष्क की झिल्ली में संक्रमण हो सकता है।
  • सेप्सिस रोग का खतरा हो सकता है।
  • इतना ही नहीं, कुछ गंभीर मामलों में यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।

लेप्टोस्पायरोसिस की जांच कैसे होती है?

लेप्टोस्पायरोसिस की जांच के लिए कुछ टेस्ट कराए जा सकते हैं। इनमें शामिल हैं-

  • ब्लड टेस्ट
  • PCR टेस्ट
  • एंटीबॉडी टेस्ट (IgM)

क्या इसका इलाज संभव है?

CDC के अनुसार, इस बीमारी का इलाज संभव है। इस बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाइयां दे सकते हैं। हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा का सेवन न करें। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है।

लेप्टोस्पायरोसिस से बचाव कैसे करें?

बारिश के मौसम में कुछ सावधानियां अपनाकर आप संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

  • जलभराव वाले पानी में नंगे पैर न चलें, इससे खतरा कम हो सकता है।
  • अगर पानी में जाना है तो वाटरप्रूफ जूते और दस्ताने पहनें।
  • त्वचा पर कट या घाव हो तो उसे अच्छी तरह ढककर रखें।
  • पीने के लिए हमेशा उबला हुआ और फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें।

Disclaimer: बारिश के मौसम में इस बीमारी का खतरा ज्यादा बना रहता है। इसलिए मानसून में आपको ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। अगर आपको तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी आना, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण महसूस हो तो इनकी अनदेखी बिल्कुल न करें। समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है और गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है।