
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Medically Verified By: Dr. Raman Kumar
Leptospirosis
बारिश का मौसम भले ही ठंडक और गर्मी से राहत लाता है। लेकिन, इस मौसम में कई तरह के संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड के साथ-साथ लेप्टोस्पायरोसिस रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। Centres for Disease Control and Prevention के अनुसार, यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो आमतौर पर जानवरों से इंसानों में फैलता है। अगर इस बीमारी का समय पर इलाज न मिले, तो किडनी, लिवर, ब्रेन और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार बताते हैं कि लेप्टोस्पायरोसिस Leptospira नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। यह एक जूनोटिक बीमारी है यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। आमतौर पर चूहे, भैंस, सूअर और अन्य कई जानवर इस बैक्टीरिया कैरियर हो सकते हैं। दरअसल, संक्रमित जानवरों के पेशाब से यह बैक्टीरिया मिट्टी तक पहुंच सकता है और मिट्टी से पानी में पहुंच सकता है। मानसून में गलियों और सड़कों में पानी भरने की वजह से इस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
CDC के अनुसार, यह संक्रमण कई तरीकों से फैल सकता है। इनमें शामिल हैं-
बाढ़ या जलभराव वाले पानी में नंगे पैर चलने से लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ सकता है। इससे खुले घाव या खरोंच के जरिए बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है।
कई बार पानी में संक्रमित जानवरों का पेशाब मिला होता है, इस दूषित पानी को पीने से भी लेप्टोस्पायरोसिस हो सकता है।
दूषित पानी के आंख, नाक या मुंह के संपर्क में आने से लेप्टोस्पायरोसिस रोग हो सकता है।
आपको बता दें कि यह बीमारी आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती है।
CDC के अनुसार, संक्रमण के 2 से 30 दिनों के भीतर लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें शामिल हैं-
हालांकि, ये लक्षण डेंगू, मलेरिया या फ्लू जैसे लग सकते हैं। इसलिए अगर ऐसे लक्षण महसूस हो तो जांच जरूर कराएं।
आमतौर पर अगर बीमारी का समय पर जांच और इलाज किया जाए, तो यह ठीक हो सकता है। लेकिन, कुछ मामलों में यह शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। जैसे-
लेप्टोस्पायरोसिस की जांच के लिए कुछ टेस्ट कराए जा सकते हैं। इनमें शामिल हैं-
CDC के अनुसार, इस बीमारी का इलाज संभव है। इस बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाइयां दे सकते हैं। हालांकि, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा का सेवन न करें। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है।
बारिश के मौसम में कुछ सावधानियां अपनाकर आप संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
Disclaimer: बारिश के मौसम में इस बीमारी का खतरा ज्यादा बना रहता है। इसलिए मानसून में आपको ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। अगर आपको तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी आना, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण महसूस हो तो इनकी अनदेखी बिल्कुल न करें। समय पर जांच और इलाज से इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है और गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है।