इलाज मुफ्त, फिर भी विकलांगता क्यों? कुष्ठ रोग के मामले में देरी बन रही है जानलेवा
इलाज मुफ्त, फिर भी विकलांगता क्यों? कुष्ठ रोग के मामले में देरी बन रही है जानलेवा
Leprosy Treatment Available But Disability Is Increasing Reasons: भारत में कुष्ठ रोग का इलाज मुफ्त में होने के बावजूद इस बीमारी से विकलांगता के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आइए जानते हैं आखिरकार क्यों ऐसा हो रहा है।
Written By: Ashu Kumar Das | Updated : January 30, 2026 5:29 PM IST
Leprosy Treatment Available But Disability Is Increasing: कुष्ठ रोग (Leprosy) को लेकर एक आम धारणा यह है कि यह अब खत्म हो चुकी बीमारी है। लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी भारत में हर साल हजारों नए कुष्ठ रोग के मामले सामने आते हैं। हैरानी वाली बात तो ये है कि भारत में कुष्ठ रोग का इलाज पूरी तरह से मुफ्त है, लेकिन इसके बावजूद कुष्ठ रोग से पीड़ित मरीज विकलांग (Disability) हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 तक भारत में हर साल 10 हजार से ज्यादा कुष्ठ रोग के मामले दर्ज किए जा रहे थे। आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है? कुष्ठ रोग के मामलों में विकलांगता क्यों हो रही है, आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब।
कुष्ठ रोग क्या है?-What is Leprosy in Hindi
मायो क्लीनिक पर छपी एक रिपोर्ट बताती है कि कुष्ठ रोग एक संक्रामक रोग है, जो Mycobacterium leprae नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। कुष्ठ रोग मुख्य रूप से व्यक्ति की त्वचा, नसों, आंख, हाथ-पैर को प्रभावित करता है। कुष्ठ रोग की सबसे बड़ी खामी यही है कि किसी भी व्यक्ति के शरीर में ये धीरे-धीरे बढ़ता है। कुष्ठ रोग के लक्षण सालों तक व्यक्ति के शरीर में स्पष्ट रूप से नजर नहीं आते हैं, जिससे इस बीमारी का पता लगाने में मुश्किल आती है।
बीमारी की देर से पहचान (Late Diagnosis)- भारत जैसे देशों में कुष्ठ रोगियों में विकलांगता की पहचान देरी से होने का मुख्य कारण है इसके लक्षणों की देरी से पहचान होना। कुष्ठ रोगियों की त्वचा पर हल्के रंग के दाग, दाग वाले हिस्से में सुन्नपन, हल्की झनझनाहट होती है। 10 में से 8 लोग इसे मामूली फंगल इंफेक्शन, दाग-खाद, खुजली और एलर्जी समझकर इग्नोर कर देते हैं। जब तक सही जांच होती है, तब तक मरीज की नसों को नुकसान पहुंच चुका होता है। यही नुकसान भविष्य में विकलांगता का कारण बनता है।
नसों को होने वाला स्थायी नुकसान (Irreversible Nerve Damage)- कुष्ठ रोग की सबसे खतरनाक बात यह है कि सीधे Peripheral Nerves पर हमला करता है। इसका इलाज किया जाए तो बैक्टीरिया का तो खात्मा हो जाता है। लेकिन नसों को होने वाला नुकसान ठीक नहीं होता है। इससे हाथ- पैर का सुन्न हो जाना, उंगलियों का मुड़ जाना, पैर लटकना (Foot Drop) और हाथों की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। जिसकी वजह से कुछ लोगों में कुष्ठ रोग का इलाज होने के बावजूद स्थायी विकलांगता होती है।
इलाज अधूरा छोड़ देना (Incomplete Treatment)- एक रिपोर्ट बताती है कि भारत समेत ज्यादातर विकासशील देशों में लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज अधूरा छोड़ देते हैं। कुष्ठ रोग जैसी बीमारी में भी यही परेशानी देखी जाती है। दिल्ली के यथार्थ हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर संजय गुप्ता का कहना है कि कुष्ठ के रोग में मरीज को MDT कोर्स करने की सलाह दी जाती है। MDT का पूरा कोर्स करने के लिए 6 से 12 महीने का वक्त लगता है। लेकिन कई मरीज लक्षण ठीक होते ही दवा छोड़ देते हैं या नियमित दवा नहीं लेते हैं। इससे कुछ समय के लिए तो बीमारी दब जाती है, लेकिन नसों में सूजन और इंटरनल डैमेज जारी रहता है। जो भविष्य में विकलांगता का कारण बनता है।
सुन्न अंगों में बार-बार चोट लगना- 10 में 9 कुष्ठ रोग के मामलों में दर्द महसूस नहीं होता है। इस कारण जलना, कट लगना, छाले बनने पर मरीज को पता ही नहीं चलता और घाव बिगड़ते जाते हैं। ये घाव शरीर के एक हिस्से से दूसरे में फैलते हैं। यही प्रक्रिया विकलांगता को बढ़ाती है।
सामाजिक डर- ग्रामीण इलाकों में आज भी रोग कुष्ठ रोग को छिपाते हैं। परिवार में अगर किसी सदस्य को कुष्ठ रोग होता है तो अन्य सदस्यों को लगता है कि ये बात आसपास के लोगों को पता चलेगी, तो उनका बहिष्कार शुरू हो जाएगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुष्ठ रोग को छुआ-छूत की बीमारी से जोड़कर देखा जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि मरीज को इलाज कब मिलता है, जब बीमारी गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी होती है।
फॉलोअप में कमी- कुष्ठ रोग का इलाज खत्म होने के बाद भी नियमित नर्व जांच, फिजियोथेरेपी और सेल्फ केयर ट्रेनिंग बहुत जरूरी होता है। लेकिन हमारे देश में कुष्ठ रोग का इलाज कराने के बाद लोग फॉलोअप नहीं लेते हैं। इससे विकलांगता की समस्या होती है।
गरीबी और कुपोषण- भारत में आज भी एक बड़ा तबका मध्यम या गरीब परिवार से आता है। जिससे कुपोषण की संभावना ज्यादा रहती है। कुष्ठ रोगी को इलाज के दौरान सही पोषण न मिले तो शरीर की रिकवरी धीमी होती है। इससे घाव जल्दी नहीं भरते और इंफेक्शन का खतरा पहले से ज्यादा बढ़ने लगता है। गरीबी और कुपोषण कुष्ठ रोगियों को विकलांगता की धकेलती है।
कुष्ठ रोग का इलाज आज पूरी तरह संभव है, लेकिन इलाज और विकलांगता के बीच की कड़ी- नर्व डैमेज अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। भारत में कुष्ठ रोग के लिए समस्या इलाज की कमी नहीं, बल्कि समय, जागरूकता और फॉलो-अप की कमी है। कुष्ठ रोग जैसी बीमारी को शुरुआती चरण में पहचान लिया जाए, इलाज पूरा किया जाए और नसों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए, तो कुष्ठ रोग से होने वाली विकलांगता को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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