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स्वस्थ मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र के लिए पैरों की कसरत जरूरी है। एक नए शोध में पता चला है कि तंत्रिका तंत्र से जुड़ा स्वास्थ्य पैरों द्वारा दिमाग को भेजे जाने वाले संकेतों पर निर्भर है। शोध के परिणामों से चिकित्सकों को नए संकेत मिले हैं कि क्यों मोटर न्यूरॉन बीमारी, मल्टीपल स्केलेरोसिस, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी व दूसरी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों में मरीजों के स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट आती है। इसकी वजह इन बीमारियों के मरीजों में चलने की गतिविधि सीमित होना है।
शारीरिक व्यायाम कम होने से शरीर को नई तंत्रिका कोशिकाओं के उत्पादन में दिक्कत होती है। यह तंत्रिका कोशिकाएं व्यक्ति को तनाव व जीवन की चुनौतियों से मुकाबले में मदद करती हैं।
इटली के मिलान विश्वविद्यालय की राफेला एडमी ने कहा, "हमारा शोध इस धारणा का समर्थन करता है कि जो लोग वजन उठाने वाले व्यायाम करने में असमर्थ हैं, बिस्तर पर पड़े मरीज या लंबी यात्रा के अंतरिक्ष यात्री, उनमें न सिर्फ मांसपेशियों का भार घटता है, बल्कि कोशिकीय स्तर पर उनके शरीर की केमिस्ट्री में बदलाव हो जाता है और यहां तक कि उनके तंत्रिका तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।"
स्रोत:IANS Hindi.
चित्रस्रोत- Shutterstock Images.