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रात को 12 बजे के बाद सोना शरीर के किन अंगों पर सबसे ज्यादा असर डालता है?

मोबाइल, इंटरनेट, टीवी और कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में हम इतने ज्यादा व्यस्त हो गए हैं कि हमें सोने की सुध नहीं रहती है। इसके चलते कई लोग रात में 12 बजे के बाद सोते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इससे आपका शरीर प्रभावित हो सकता है। आइए जानते हैं कैसे?

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Written By: Kishori Mishra | Published : June 14, 2026 9:55 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Ambrish Kumar Garg

Late Night Sleep Affect on body : आज की व्यस्त जीवनशैली में देर रात तक मोबाइल चलाना, ओटीटी देखना या काम करना आम बात बन जाती है। लेकिन जब रोजाना सोने का समय रात 12 बजे के बाद खिसक जाता है, तो इसका असर सिर्फ नींद पर ही नहीं पड़ता, बल्कि शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों और प्रणालियों पर भी पड़ता है। शरीर की जैविक घड़ी, जिसे सर्केडियन रिद्म कहा जाता है, एक निश्चित समय पर आराम और जागने के लिए तैयार की जाती है। जब इस नैचुरल साइकल को बार-बार बाधित किया जाता है, तो कई स्वास्थ्य समस्याएं विकसित होने लगती हैं। इस विषय को अच्छे से समझने के लिए हमने जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, डॉ. अंबरीश कुमार गर्ग से बातचीत की है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं डॉक्टर

ब्रेन पर पड़ता है सबसे पहला असर

2022 में प्रकाशित एक रिव्यू स्टडी के अनुसार, रात में लंबे समय तक जागे रहने से निर्णय लेने की क्षमता, मूड रेगुलेशन और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। वहीं, डॉक्टर अंबरीश का कहना है कि देर रात तक जागने से सबसे अधिक प्रभाव ब्रेन पर देखा जाता है। पर्याप्त और समय पर नींद न मिलने से याददाश्त प्रभावित होती है, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम होती है और निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। ब्रेन दिनभर की जानकारी को नींद के दौरान व्यवस्थित करता है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो मानसिक कार्यक्षमता कमजोर होने लगती है।

नींद की कमी के कारण चिड़चिड़ापन, तनाव और मूड में उतार-चढ़ाव भी अधिक महसूस किए जाते हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ता है।

हार्ट को भी झेलना पड़ता है दबाव

कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि अनियमित या बहुत देर से सोने की आदत हृदय रोग और कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं के जोखिम को बढ़ा सकती है।  डॉक्टर कहते हैं कि जब व्यक्ति देर रात तक जागता है, तो शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन अधिक एक्टिव रहते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। लगातार खराब नींद के कारण हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और अनियमित धड़कनों का जोखिम बढ़  सकता है।

लिवर की कार्यप्रणाली होती है प्रभावित

NIH की रिसर्च के अनुसार, रात में जागने और शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी से छेड़छाड़ करने पर मेटाबॉलिज्म से जुड़े कई जैविक प्रोसेस प्रभावित हो सकते हैं, जो लंबे समय में मोटापा और डायबिटीज जैसी समस्याओं से जुड़े हैं।

रात का समय शरीर की मरम्मत और पुनर्निर्माण का समय माना जाता है। इस दौरान लिवर भी कई महत्वपूर्ण मेटाबॉलिज्म प्रोसेस को पूरा करता है। जब सोने का समय लगातार देर से होता है, तो लिवर की नैचुरल कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इससे शरीर में थकान, सुस्ती और चयापचय संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

बिगड़ सकता है हार्मोनल संतुलन

देर रात तक जागने से मेलाटोनिन, कोर्टिसोल और ग्रोथ हार्मोन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन प्रभावित होते हैं। इसका असर शरीर की ऊर्जा, भूख, वजन और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। कई लोगों में देर रात जागने की आदत के कारण अधिक भूख महसूस होती है, जिससे वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रतिरक्षा प्रणाली हो सकती है कमजोर

नींद के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। यदि पर्याप्त और समय पर नींद नहीं मिलती, तो प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ सकती है। परिणामस्वरूप संक्रमण, सर्दी-जुकाम और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

आंखों और स्किन पर भी दिखाई देते हैं संकेत

देर रात तक जागने वालों में आंखों की थकान, सूखापन और डार्क सर्कल्स अधिक दिखाई देते हैं। साथ ही त्वचा की मरम्मत प्रक्रिया भी प्रभावित होती है, जिससे त्वचा बेजान और थकी हुई नजर आ सकती है।

बेहतर स्वास्थ्य के लिए क्या करें?

डॉक्टर का कहन है कि हर दिन एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत बनाई जाती है। सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का उपयोग कम किया जाता है। शाम के बाद कैफीन का सेवन सीमित रखा जाता है और शांत वातावरण में नींद ली जाती है।

Disclaimer : रात को 12 बजे के बाद नियमित रूप से सोना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर बोझ डालने वाला व्यवहार बन सकता है। मस्तिष्क, हृदय, लिवर, हार्मोनल सिस्टम और प्रतिरक्षा तंत्र सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवन के लिए समय पर सोना उतना ही जरूरी माना जाता है जितना संतुलित आहार और नियमित व्यायाम।