रात- रात भर जागना हो ओवरथिंकिंग की निशानी, दिमाग को शांत रखने के लिए करें ये 5 काम
छोटी- छोटी बातों पर ज्यादा सोचना, रात को देर तक जागना और पुरानी चीजों को याद करके परेशान होना ओवरथिकिंग की निशानी है। आइए जानते हैं इस स्थिति में हमें क्या करना चाहिए, ताकि ओवरथिकिंग से बचा जा सके।
मेरा पति रात भर जागता रहता है। दिनभर ऑफिस में काम करने के बाद मैं बहुत थक जाती हूं और जब रात को सुकून की नींद सोना चाहती हूं तो अपने पति को मोबाइल चलाता हुआ पाती हूं। रात को देर तक जगकर वो मोबाइल चलाता है और फिर अगले कुछ समय के बाद हमारी लड़ाई बिना वजहों की बातों पर हो जाती है। कई बार समझ नहीं आता कि इससे बात करूं या फिर किसी डॉक्टर से बात करूं? ये कहानी है गुड़गांव की रहने वाली प्रियंका गुप्ता की। प्रियंका के पति की तरह ही रात- रात भर मोबाइल चलाना कई लोगों की इन दिनों आदत बन चुकी है। कोई काम के तनाव में जागता है, तो कोई मोबाइल और सोशल मीडिया में घंटों बिताता रहता है। लेकिन लगातार रात-रात भर जागने का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। यही वजह है कि नींद की कमी कई बार ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचने की समस्या को बढ़ा देती है।
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, जब शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों को लेकर भी जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है। धीरे-धीरे यह आदत चिंता, तनाव और मानसिक थकान का कारण बन सकती है।
क्यों बढ़ती है ओवरथिंकिंग?
नींद हमारे दिमाग के लिए रिचार्ज की तरह काम करती है। जब हम पूरी नींद नहीं लेते, तो दिमाग लगातार एक्टिव बना रहता है। इससे पुराने विचार, डर और तनाव बार-बार दिमाग में घूमते रहते हैं।
कम नींद लेने से शरीर में कॉर्टिसोल नाम का तनाव हार्मोन बढ़ जाता है। इसका असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है और व्यक्ति अधिक चिंतित महसूस कर सकता है।
जब दिमाग थका हुआ होता है, तो निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में व्यक्ति हर छोटी समस्या को जरूरत से ज्यादा गंभीर मानने लगता है।
नींद की कमी से इंसान जल्दी गुस्सा, उदासी या घबराहट महसूस कर सकता है। यही स्थिति ओवरथिंकिंग को और बढ़ा देती है।
ओवरथिंकिंग कम करने के लिए क्या करें?
खास बात यह है कि ओवरथिंकिंग की परेशानी को कम करने के लिए आप घर पर ही कुछ आसान उपायों को अपना सकते हैं। ओवर थिंकिंग को कम करने के लिए नीचे बताए गए उपायों को अपनाएं।
1. नींद का समय तय करें
रात को देर तक जागने और ओवरथिंकिंग से बचने के लिए रोजाना सोने का एक समय तय कर लें। सोने के साथ- साथ सुबह उठने का समय भी निश्चित करें। इससे शरीर की बॉडी क्लॉक बेहतर तरीके से काम करती है। रात को सोने से कम से कम 1 घंटे पहले तक मोबाइल का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की ब्लू लाइट दिमाग को ज्यादा एक्टिव रखती है।
2. कैफीन इनटेक को कम करें
रात में चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक लेने से बचें। ये नींद को प्रभावित कर सकती हैं और बेचैनी बढ़ा सकती हैं। रात का डिनर करने से 2 घंटे पहले तक किसी प्रकार की कॉफी, चाय और शराब का सेवन करने से बचें।
3. एक्सरसाइज करें
रोजाना हल्की वॉक, योग या एक्सरसाइज करने से तनाव कम होता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।
4. मेडिटेशन और गहरी सांस लें
रोजाना कुछ मिनट मेडिटेशन या डीप ब्रीदिंग करने से दिमाग शांत होता है और तनाव कम महसूस होता है। रोजाना मेडिटेशन करने से दिमाग को ज्यादा एक्टिव करने में मदद मिलती है और ओवरथिकिंग की परेशानी धीरे- धीरे कम होने लगती है।
5. डायरी लिखें
अगर दिमाग में बहुत सारी बातें चल रही हों तो उस दौरान मोबाइल या स्क्रीन का इस्तेमाल करने की बजाय डायरी लिखना शुरू कर दें। कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कागज पर विचार उतारने से मन और दिमाग हल्का महसूस करने लगता है।
ओवरथिंकिंग में कब जरूरी है डॉक्टर की सलाह?
अगर ओवरथिंकिंग की वजह से लंबे समय तक नींद न आए, घबराहट बनी रहे, काम में मन न लगे या लगातार उदासी महसूस हो, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी हो जाता है। प्रियंका के पति जैसी परेशानी आपको भी हो रही है तो इस विषय पर तुरंत डॉक्टर से बात करें। रात को जागने और ओवर थिंकिंग को सामान्य समझने की गलती कभी भी नहीं करनी चाहिए।
Disclaimer: रात-रात भर जागना धीरे-धीरे मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर सकता है और ओवरथिंकिंग की समस्या को बढ़ा सकता है। ओवरथिकिंग से बचने के लिए ऊपर बताई गई बातों को फॉलो करें। इन चीजों को फॉलो करने के बाद भी आपकी ओवरथिकिंग कम नहीं हो रही है, तो इस विषय पर अपने डॉक्टर से बात करें और इलाज करवाएं।