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क्या बच्चे भी अंग दान कर सकते हैं? डॉक्टर से जानिए कैसे 1 बच्चा बचा सकता है कई जान

Can a child donate an organ : हाल ही में एक 10 महीने के बच्चे ने ऑर्गन डोनेट किया, जिसके बाद से यह विषय काफी चर्चा का बना हुआ है। आइए जानते हैं क्या बच्चा ऑर्गन डोनेट कर सकता है?

क्या बच्चे भी अंग दान कर सकते हैं? डॉक्टर से जानिए कैसे 1 बच्चा बचा सकता है कई जान
Child Organ Donation
VerifiedVERIFIED By: Dr. Soonu Udani

Written by Kishori Mishra |Published : February 17, 2026 12:29 PM IST

Who is the youngest c: हाल ही में एक घटना सामने आई है, जिससे न सिर्फ लोगों की आंखें नम हो रही है, बल्कि कई लोगों को गर्व भी महसूस हो रहा है। दरअसल, केरल के पतनमतिट्टा जिले के मल्लापल्ली में 10 महीने के बच्चे  का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया, जिसके बाद उसके माता-पिता ने उसके अंगों को दान करने का फैसला लिया। 10 महीने के बच्चे अलिन शेरिन अब्राहम के अंगदान से 5 लोगों को एक नया जीवनदान मिला। इसके बाद यह खरब न सिर्फ केरल में फैली, बल्कि पूरे देश में आग की तरह फैलने लगी। इस खबर ने कई लोगों के दिल को छू लिया।

आज इसलिए ऑर्गन डोनेशन एक चर्चा का विषय बन गया है। अक्सर हम  डोनर के तौर पर बड़ों पर ही ध्यान देते हैं, लेकिन इस खबर के बाद से काफी लोगों को पता चल गया होगा कि बच्चे की ऑर्गन डोनेट कर सकते हैं। हम में से शायद ही किसी को यह पता हो कि बच्चे भी ऑर्गन डोनर बन सकते हैं, और ऐसा करके वे कई जानें बचा सकते हैं। इस विषय की जानकारी क लिए मुंबई स्थित नारायण हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सूनू उदानी से बातचीत की है। आइए जानते हैं इस बारे में-

क्या कहती हैं एक्सपर्ट?

डॉ. सूनू उदानी का कहना है कि इस विषय में जानकारी की कमी की वजह से जान बचाने के कई मौके हाथ से निकल जाते हैं, जबकि देश भर में हजारों बच्चे और बड़े ऑर्गन ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं। इस विषय पर लोगों को बात करने की जरूरत काफी ज्यादा है।

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बच्चों का ऑर्गन डोनेशन क्यों जरूरी है?

डॉक्टर उदानी का कहना है कि ऑर्गन फेलियर किसी को भी हो सकता है और खास तौर पर, किसी भी उम्र में। छोटे बच्चे, नए जन्मे बच्चे और किसी भी उम्र के बच्चे गंभीर दिक्कतों से जूझते हैं, जैसे जन्म से दिल की बीमारी, लिवर फेलियर, किडनी की बीमारी या मेटाबोलिक डिसऑर्डर जिनका इलाज सिर्फ ऑर्गन ट्रांसप्लांट से ही हो सकता है। इनमें से कई बच्चों के लिए किसी दूसरे बच्चे से मिला सही ऑर्गन जिंदगी और मौत के बीच का फर्क ला सकता है।

लेकिन, भारत में बच्चों के ऑर्गन डोनेशन का कॉन्सेप्ट अभी भी बहुत कम है और ऐसा इसलिए नहीं है कि बच्चे डोनेट नहीं कर सकते, बल्कि इसलिए है क्योंकि हमारे देश में ज्यादातर परिवारों को इसके बारे में पता नहीं है।

[caption id="attachment_1301865" align="alignnone" width="1200"]organ donate kaise kare organ donate kaise kare[/caption]

बच्चे किस उम्र में ऑर्गन डोनर बन सकता है?

बच्चे बड़ों की तरह ही ब्रेन डेथ के मामलों में ऑर्गन डोनर बन सकते हैं। यह गंभीर दुर्घटनाओं या किसी और वजह से ब्रेन में ब्लीडिंग के बाद हो सकता है। ब्रेन डेथ, मेडिकली और कानूनी तौर पर मौत का एक मान्यता प्राप्त रूप है, जिसमें दिमाग के सभी काम हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं, भले ही मशीनें कुछ समय के लिए दिल की धड़कन और सांस को बनाए रख सकती हैं।

कैसे होता है बच्चों का ऑर्गन डोनेट?

ऑर्गन को डोनेशन के लिए सही होने के लिए सपोर्ट दिया जाता है। टीम इस बात का पूरा ध्यान रखती है कि इस फील्ड के एक्सपर्ट्स द्वारा कई टेस्ट और जांच करके, बिना किसी शक के, यह पक्का किया जाए कि बच्चे के ठीक होने की थोड़ी भी उम्मीद न हो। ये टेस्ट करने वाले डॉक्टरों का किसी भी ऑर्गन के संभावित रिसीवर के साथ कोई कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट नहीं होता है।

ऐसे मामलों में, माता-पिता या कानूनी गार्जियन की जानकारी और अपनी मर्ज़ी से सहमति से बच्चे के ऑर्गन कई जानें बचाने के लिए डोनेट किए जा सकते हैं। उम्र और मेडिकल कंडीशन के आधार पर, दिल, लिवर, किडनी, फेफड़े, पैंक्रियास और यहां तक कि टिशू भी डोनेट किए जा सकते हैं। बड़ों को भी बच्चे के ऑर्गन से फ़ायदा हो सकता है।

माता-पिता के लिए है कठिन फैसला

हर एक माता-पिता के लिए अपने बच्चे की मौत के समय ऑर्गन डोनेशन का ख्याल बहुत मुश्किल होता है। यह फैसला कभी भी आसान नहीं होता और इसे कभी भी जल्दबाजी या दबाव में नहीं लेना चाहिए। हालांकि, कई परिवार जो डोनेशन चुनते हैं, बाद में इसे दुखद घटना के बीच मतलब खोजने का एक तरीका बताते हैं, यह जानते हुए कि उनके बच्चे की जिंदगी ने दूसरों को जीने में मदद की।

अक्सर परिवारों को मना करने की वजह से नहीं, बल्कि सही समय पर जानकारी की कमी की वजह से रोका जाता है। जब बच्चों के ऑर्गन डोनेशन के बारे में बातचीत में देरी होती है या इसे पूरी तरह से टाला जाता है, तो परिवार सोच-समझकर फ़ैसला लेने का मौका खो देते हैं। गलतफहमियां जिन्हें दूर करने की ज़रूरत है

बच्चों के ऑर्गन डोनेशन को लेकर गलतफहमियां

  • बच्चों के ऑर्गन का सही इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
  • ऑर्गन डोनेशन से शरीर खराब हो जाता है
  • अगर डोनेशन पर बात की जाती है तो मेडिकल केयर से समझौता होता है।

डॉक्टर कहती हैं कि इन सभी बातों में से कुछ भी सच नहीं है। ऑर्गन डोनेशन इज्जत, आदर और सख्त मेडिकल और नैतिक सुरक्षा उपायों के साथ किया जाता है। बच्चे को हर समय पूरी मेडिकल केयर मिलती है और डोनेशन से अंतिम संस्कार की व्यवस्था में देरी नहीं होती है।

जागरूकता जल्दी क्यों शुरू होनी चाहिए?

डॉक्टर का कहना है कि ऑर्गन डोनेशन पर सिर्फ  मुश्किल समय में ही चर्चा नहीं होनी चाहिए। जागरूकता पहले शुरू होनी चाहिए, परिवारों, स्कूलों और समुदायों में इस विषय पर अच्छे से बातचीत होनी जरूराा है। ताकि माता-पिता इस तरह के फैसले का सामना करने से बहुत पहले ही इस संभावना को समझ सकें।

अस्पतालों, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और पॉलिसी बनाने वालों की भी यह पक्का करने में भूमिका है कि बच्चों के ऑर्गन डोनेशन के बारे में बातचीत को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और सही समय पर किया जाए।

अंग दान है, जीवन दान

एक बच्चे का डोनर कई जानें बचा सकता है, जो न सिर्फ बच्चों को अंगदान कर सकते हैं, बल्कि बड़ों को भी ये जीवनदान दे सकते हैं। ऐसे देश में जहां ऑर्गन डोनेशन रेट बहुत कम है, यह मानना ​​कि बच्चे भी डोनर बन सकते हैं, उन कई परिवारों के लिए उम्मीद और नई ज़िंदगी का दरवाज़ा खोलता है जो ट्रांसप्लांट का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।

Highlights

  • हाल ही में केरल के सिर्फ 10 महीने के बच्चे ने अंगदान किया है।
  • बच्चे भी ऑर्गन डोनर बन सकते हैं, इस बात की जानकारी काफी कम लोगों को हैष
  • एक छोटा सा बच्चा कई लोगों को जान बचा सकता है।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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