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Written By: Yogita Yadav | Published : June 9, 2019 4:42 PM IST
बढ़ती गर्मी का असर शरीर के साथ-साथ दिमाग पर भी पड़ता है जिससे उसमें तनाव और हिंसक भावनाओं में इजाफा हो जाता है। ©Shutterstock.
इन दिनों एक के बाद एक इस तरह की खबरें आ रहीं हैं कि जिससे दिलो-दिमाग दहल जाए। इस तरह की हिंसक और हौलनाक खबरों में पिछले डेढ़-दो माह में खासा इजाफा हुआ है। जैसे-जैसे माहौल में गर्मी बढ़ रही है, इस तरह की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। तो क्या यह बढ़ते हुए तापमान का असर है? आइए देखें कि गर्मी के साथ किस तरह रिएक्ट करता है हमारा मस्तिष्क।
बहुत से लोगों पर गर्मी के मौसम में गुस्सा और चिड़चिड़ापन हावी रहता है। पोलैंड की एक टीम ने एक स्टडी की जिसमें बढ़ते तापमान और स्ट्रेस लेवल के बीच क्या संबंध है यह जानने की कोशिश की। इस स्टडी में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
बढ़ती गर्मी में गुस्से और हिंसक वारदातों का बढ़ना ऐसी समस्या है, जो मनुष्य ही नहीं कानून-व्यवस्था के लिए भी समस्या बन गई है। यह एक ऐसी चीज है जिसने सालों तक एक्सपर्ट्स को परेशान किया है।
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कई थिअरीज में भी इस बात को साबित किया गया है कि जब तापमान गर्म होता है तो हमारे दिल की धड़कन बढ़ जाती है। साथ ही में शरीर में टेस्टोस्टेरॉन और मेटाबॉलिक रिऐक्शन भी बढ़ जाता है जिससे नर्वस सिस्टम की प्रक्रिया तेज होने लगती है।
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इस स्टडी में यह बात सामने आयी है कि कॉर्टिसोल जिसे स्ट्रेस हॉर्मोन भी कहते हैं, उसका स्तर सर्दियों में तो कम रहता है, लेकिन जैसे-जैसे गर्मी बढ़ने लगती है शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर भी बढ़ने लगता है। इससे हमारे स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। कॉर्टिसोल हमारे शरीर में नमक, चीनी और तरल पदार्थों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में शरीर में ज्यादा कॉर्टिसोल सर्कुलेट हो रहा था। इस स्टडी के डेटा का पहला सैंपल क्राइम स्टैटिस्टिक्स से लिया गया था कि अपराध का मौसम से क्या संबंध है। इस रिपोर्ट में यह बात सामने आयी थी कि अपराधी, गर्म मौसम में हिंसक गतिविधियों में ज्यादा शामिल रहते हैं। इसलिए बेहतर है कि इस मौसम में खुद को कूल रखें।