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Written By: Yogita Yadav | Published : September 7, 2018 3:45 PM IST
इन देशों में जाने से पहले जरूर करवाएं येलो फीवर वेक्सीनेशन। © Shutterstock
येलो फीवर मछर की एक विशेष प्रजाति द्वारा अपना संक्रमण फैलता है| भारत से जब आप विदेश जाते हैं तो कुछ ऐसे देश हैं जैसे अफ्रीका और साउथ अमेरिका, जहाँ जाने से पहले आपको इसका वैक्सीन लगवाना जरुरी है क्योँकि ऐसे देशों में येलो फीवर का काफी प्रकोप है। इन देशों की यात्रा करते वक्त आपको संक्रमण लग सकता है|
क्या है येलो फीवर
येलो फीवर (पीत ज्वर-पीला बुखार) विषाणु द्वारा उत्पन्न एक तीव्र हेमोरेजिक ( क्षतिग्रस्त रक्तवाहिनियों में रक्त प्रवाह होने वाला) रोग है, जो मनुष्यों में संक्रमित मच्छर के काटने से होता है। रोग के नाम में येलो शब्द पीलिया को इंगित करता है जो कुछ रोगियों को प्रभावित करता है। यह ऐसा रोग है जो पूरे शरीर को प्रभावित करता है।
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येलो फीवर का इलाज
येलो फीवर से संक्रमित करीब 50 प्रतिशत लोग इसके संक्रमण से मर जाते हैं। परन्तु इससे वेक्सीनेशन के द्वारा पूरी तरह बचा जा सकता है। येलो फीवर के संक्रमण से बुखार, सर दर्द और उलटी (मितली) जैसे लक्षण पैदा होते हैं। गंभीर स्थितियों में यह ह्रदय, लिवर और किडनी से सम्बंधित जानलेवा लक्षण पैदा कर सकते हैं।
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येलो फीवर के लक्षण
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येलो फीवर के वेक्सीनशन की खुराक/मात्रा
त्वचा के भीतर दिए जाने वाले 0.5 मिली के केवल एक इंजेक्शन से 10 दिनों में प्रतिरोधक शक्ति विकसित होती है जो अगले 10 साल तक बनी रहती है। हर देश में टीकाकरण कार्ड की आवश्यकता नहीं होती। यह येलो फीवर की अधिकता वाले केवल कुछ देशों में ही अनिवार्य है। सेंटर्स फोर डिजीज कण्ट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC- center for disease control and prevention) द्वारा येलो फीवर वितरण में परिवर्तन और येलो फीवर की वैक्सीन की जरूरत का समय रहते पता किया जा सकता है।