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Written By: Anshumala | Updated : October 22, 2018 7:58 AM IST
ऑस्टियोपोरोसिस में समय के साथ हड्डियों की डेंसिटी कम हो जाती है। © Shutterstock
हड्डियों का कम होना उम्र से जुड़ी एक प्रक्रिया है। आमतौर पर 50-60 की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। अधिकतर लोगों को इसके कारण जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस और आॅस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उम्र बढ़ने केे साथ-साथ धीरे-धीरे बीमारी ठीक होने की क्षमता कम होती चली जाती है। ऐसे में हड्डियां कमजोर होने के कारण हड्डियों की बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। ऐसी कई बीमारियां हैं, जिनका असर हमारी हड्डियों पर पड़ता है, लेकिन अक्सर लोग इनके बीच का अंतर नहीं समझ पाते हैं। इसे भी पढ़ें- वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे 2018 : ऑस्टियोपोरोसिस से बचना है, तो कैल्शियम से भरपूर लें डायट
इन बीमारियों में क्या अंतर है?
इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स डॉ. यश गुलाटी कहते हैं कि अर्थराइटिस और आॅस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी आम बीमारियां हैं। हालांकि, इन दोनों के बीच अंतर है। अर्थराइटिस में तकरीबन 100 तरह की हड्डियों की बीमारियां शामिल हैं। अर्थराइटिस के कारण होने वाला दर्द हल्का या बहुत तेज हो सकता है। इसके लक्षण हैं जोड़ों में अकड़न, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी।ऑस्टियोपोरोसिस में समय केे साथ हड्डियों की डेंसिटी कम हो जाती है। हड्डियों के टिशू नियमित रूप से नवीनीकृत होते रहते हैं। हालांकि, जब यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है, तो हड्डिया कमजोर हो जाती हैं और इनमें फ्रैक्चर की संभावना बढ़ जाती है। आॅस्टियोपोरोसिस के लक्षण बहुत हल्के या बहुत गंभीर हो सकते हैं। इसके कारण कभी कभी व्यक्ति की उंचाई भी कम हो जाती है। गर्दन या पीठ के नीचले हिस्से में दर्द होना इसका आम लक्षण है।
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दोनों बीमारियों के कारण कुछ इस तरह हैं-
इनका पुरुषों और महिलाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है
प्रदूषण का प्रभाव
हाल ही में पाया गया है कि प्रदूषण के कारण हड्डियों के कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है। बुजुर्ग लोग जो वाहनों एवं उद्योगों के कारण होने वाले वायु प्रदूषण के संपर्क में रहते हैं, उनमें हड्डियों की बीमारियां और फ्रैक्चर की संभावना अधिक होती है इसलिए अपने आप को वायु प्रदूषण से सुरक्षित रखें। इसे भी पढ़ें- वर्ल्ड अर्थराइटिस डे 2018: रखेंगे इन बातों का ख्याल, तो अर्थराइटिस के दर्द से मिलेगी राहत
हड्डियों की बीमारियों से बचें