Multiple Sclerosis क्या है और इसके कारण क्या हैं?

मल्टीपल स्केलेरोसिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।

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Written By: Editorial Team | Published : May 26, 2017 9:55 AM IST

दुनिया भर में लगभग 23 लाख लोग मल्टीपल स्केलेरोसिस (multiple sclerosis) से प्रभावित हैं। एमएसएसआई (मल्टीपल स्केलेरोसिस से पीड़ित लोगों के लिए काम करनेवाली एक संस्था) के अनुसार, भारत में लगभग 2 लाख लोग मल्टीपल स्केलेरोसिस से पीड़ित हैं। हालांकि भारत में माइग्रेन (migraine), मिर्गी और ब्रेन स्ट्रोक की तरह मल्टीपल स्केलेरोसिस उतना आम नहीं है। बहुत से लोगों को मल्टीपल स्केलेरोसिस के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। डॉ. सुधीर कुमार, सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस, हैदराबाद, एमएस और मल्टीपल स्केलेरोसिस के कारणों के बारे में विस्तार से बताया है।

मल्टीपल स्केलेरोसिस क्या है?

मल्टीपल स्केलेरोसिस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र या सेंट्रल नर्वस सिस्टम की एक बीमारी है जो मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और ऑप्टिक तंत्रिका (optic nerve) को प्रभावित करती है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें एंटीबॉडी मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और आंखों के नसों पर प्रभाव डालती है। यह आम तौर पर 10 से 16 साल के आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है। हालांकि, 20 और 30 की महिलाओं को इसका बहुत अधिक ख़तरा होता है। पुरुषों की तुलना में, एमएस महिलाओं में अधिक आम है और यह लोगों को 60 वर्ष की आयु तक प्रभावित कर सकता है।

मल्टीपल स्केलेरोसिस क्यों होता है?

मल्टीपल स्केलेरोसिस के सटीक कारण का पता नहीं है। जैसा कि पहले कहा गया, कि एमएस एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें इम्यून सेल्स म्येलिन म्यान (myelin sheath) पर आक्रमण करती हैं। यह एक वसायुक्त पदार्थ है जो तंत्रिका कोशिकाओं को कोट करती है और मस्तिष्क में और आवेग (impulse) और उत्तेजनाओं (stimuli) को प्रेषित करने में मदद करती है।

नतीजतन, यह मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और ऑप्टिक के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि, समन्वय और संतुलन में कमी और एक या दोनों आंखों की नज़र चले जाना एमएस के सामान्य लक्षणों में से एक है। इसके अलावा, अलग-अलग लोगों में लक्षण भी अलग-अलग दिखायी दे सकते हैं।

चूंकि इस रोग से पीड़ित लोगों को आमतौर पर बार-बार अटैक आता रहता है, इसलिए इसका नाम 'मल्टीपल' स्केलेरोसिस है। इसके अलग-अलग स्तर पर इस बीमारी के लक्षण से राहत मिलती है। लेकिन समय-समय पर यह समस्याएं दोबारा ऊभर सकती हैं। इसके अलावा, कुछ मामलों में, स्थिति समय के साथ धीरे-धीरे और ख़राब होने लगती है। हालांकि, यह कुछ मामलों में यह कमजोर पड़ने वाली स्थिति में बदल सकती है, जहां लक्षण समय के साथ-साथ ख़राब हो जाते हैं। इसलिए, एमएस के साथ एक व्यक्ति की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। ऐसा देखा जाता है कि उपचार के साथ एमएस के कम होने में काफी समय लग सकता है और इसकी गंभीरता कम हो सकती है।

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अनुवादक-Sadhana Tiwari

चित्रस्रोत- Shutterstock