
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : September 22, 2021 6:14 PM IST
Image credits by: DNA टेस्ट के द्वारा अपने सगे संबंधी और खून के रिश्तेदारों का पता लगाया जा सकता है.
डीएनए, मतलब डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड (DNA or Deoxyribonucleic Acid) यह इतना पावरफुल मेडिकल शब्द है कि कुछ लोग इसका नाम सुनकर ही डर जाते हैं। यह एक ऐसा टेस्ट होता है जो हमारे जींस के बारे में एकदम सटीक जानकारी देता है। हमारे शरीर में कई करोड़ सेल्स होते हैं। रेड ब्लड सेल्स को छोड़कर बाकी सभी सेल्स में एक जेनेटिक कोडिंग होती है जो शरीर को बनाती है। डीएनए सीढ़ि की तरह आपस में घूमे हुए होते हैं। अगर मानव शरीर में मौजूद डीएनए को सीधा किया जाए तो ये इतने लंबे होते हैं कि सूर्य तक पहुंचकर 300 बात वापस धरती पर आ सकते हैं। बच्चे का DNA उसके माता-पिता से बनता है। लेकिन बच्चे और उसके माता पिता का DNA एक जैसा नहीं होता है बल्कि कुछ हिस्सा मिलता हुआ हो सकता है। हर व्यक्ति का DNA एकदम अलग और यूनिक होता है।
क्या होते हैं जीन? एक बच्चे को जीन उसके माता-पिता से मिलते हैं। जींस के द्वारा ही बच्चे की शक्ल-सूरत अपने माता-पिता और पूर्वजों से मिलती है। सिर्फ यही नहीं जींस के द्वारा ही बच्चे में अपने माता-पिता से गुण-अवगुण जाते हैं। जेनेटिक डिसऑर्डर यानि कि बीमारियां भी जींस से ही जाती है। DNA टेस्ट से यह पता लगाया जा सकता है कि अगर माता या पिता किसी जेनेटिक बीमारी का शिकार हैं तो वो बच्चे में भी जाएगी या नहीं। अगर हां, तो आप क्या जरूरी सावधानियां ले सकते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या कोई भी व्यक्ति लैब में जाकर DNA टेस्ट करा सकता है या इसके लिए किसी की परमीशन की जरूरत पड़ती है? इस टेस्ट को कहां कराया जा सकता है? कितने दिन में रिपोर्ट आती है? तो आइए इस आर्टिकल में जानते हैं DNA से जुड़ी कुछ जरूरी बातें-
DNA एक बहुत ही साइंटिफिक टर्म है इसलिए हम आपको इसे आसान भाषा में समझाते हैं। एक पंडित या ज्योतिषि किसी व्यक्ति कि जन्म कुंडली देखकर उसके ग्रह-नक्षत्रों को समझते हैं और उस व्यक्ति के भूतकाल, वर्तमान और भविष्य की तस्वीर उसके सामने रख देते हैं। हालांकि ज्योतिष कितना सही और कितना गलत बता रहे हैं इस बात की कोई गारंटी नहीं होती है। लेकिन जब लैब में डीएनए टेस्ट होता है तो डॉक्टर्स रिपोर्ट्स देखकर व्यक्ति के बारे में एकदम सही और सटीक जानकारी देते हैं। हर व्यक्ति के शरीर में एक डीएनए कोडिंग (DNA Coding) होती है और ये कोडिंग जिस तरह से होती है शरीर उसी तरह बनता है। यानि कि कोडिंग ही तय करती है कि बच्चे के नैन-नक्ष कैसे होंगे, आंखों का रंग कैसा होगा, उसकी स्किन का रंग कैसा होगा, लंबाई-चौड़ाई कैसी होगी, मसल्स कितनी मजबूत होंगी, बाल कैसे होंगे, सीना कितने इंच का होगा और बच्चा भविष्य में किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी का शिकार हो सकता है या नहीं आदि।
इस टेस्ट को करने के लिए दो तरीके होते हैं। पहले तरीके में डॉक्टर्स/एक्सपर्ट्स मुंह में स्वाब डालकर सलाइवा लेते हैं और इसे एक डिब्बी में रख देते हैं और दूसरे तरीके में ब्लड सैंपल लिया जाता है और लैब में उसका एनालिसिस होता है। अगर अजन्मे बच्चे का डीएनए टेस्ट करना हो तो इसके लिए नस से खून निकालना, बोन मैरो का सैंपल और एम्नियोसेंटेसिस का सैंपल लिया जाता है।
DNA टेस्ट प्राइवेट और सरकारी दोनों लैब में होता है। सरकारी लैब केवल आपराधिक मामलों और सरकारी ऑर्डर पर ही टेस्ट करती है जबकि प्राइवेट लैब में कोई भी व्यक्ति डॉक्टर की सलाह पर टेस्ट करा सकता है।
dna molecules on abstract technology background , concept of biochemistriy and genetic theory.
DNA टेस्ट को करने में कितने पैसे लगेंगे ये लैब पर निर्भर करता है। वैसे DNA टेस्ट की कीमत की शुरुआत 6 हजार रुपये से हो जाती है जो 2 लाख रुपये तक हो सकती है। हालांकि 15-20 हजार रुपये में DNA टेस्ट हो जाता है। टेस्ट की रिपोर्ट आने में 10 से 25 दिन लग सकते हैं।
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