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बच्ची अपने घर के पीछे बहने वाली ब्रजोस नदी में तैराकी कर रही थी। बच्ची की जान जाने का कारण उस अमीबा को बताया जा रहा है, जिसे ब्रेन ईटिंग अमीबा भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम नेगलेरिया फाउलरली है। ©Fox4news
अमेरिका के टेक्सस शहर में एक दस साल की बच्ची की जान चली गई है। वह अपने घर के पीछे बहने वाली ब्रजोस नदी में तैराकी कर रही थी। बच्ची की जान जाने का कारण उस अमीबा को बताया जा रहा है, जिसे ब्रेन ईटिंग अमीबा (Brain eating amoeba) भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम नेगलेरिया फाउलरली है। आइए जानें क्या है और क्यों है इतना खतरनाक ?
अमेरिका के टेक्सस शहर में एक दस वर्षीय बच्ची लिली (Lily Mae Avant died after brain eating amoeba) अपने परिवार और दोस्तों के साथ तैराकी कर रही थी। उनके घर के पास ही एक नदी बहती है, ब्रजोस। जिसमें वे सभी अकसर तैराकी किया करते हैं। पर सितंबर में वकेशन के दौरान उसके लिए यह काफी खतरनाक साबित हुआ। तैराकी के बाद लिली के सिर में तेज दर्द होने लगा। टेक्सस के कुक चिल्ड्रन्स मेडिकल सेंटर में जब बच्ची को लाया गया तो वह तेज सिर दर्द और बुखार से पीडि़त थी। उसके कुछ ही समय बाद वह कोमा में चली गई।
बच्ची के मस्तिष्क में ब्रेन ईटिंग अमीबा पाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि जांच के दौरान पाया गया कि वह अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस से पीडि़त है। इसके लिए उसे मिल्टेफोसिन नामक दवा दी गई, ताकि वह अमीबा के संक्रमण से लड़ सके। यह एक तरह का परजीवी है जो साफ पानी की झीलों, तालाब आदि में पाया जाता है। पर यह इतना ज्यादा खतरनाक है कि इससे पीडि़त 97 फीसदी लोगों की मौत हो चुकी है।
इस ब्रेन ईटिंग अमीबा का वैज्ञानिक नाम नेगलेरिया फाउलेरी है। यह एक किस्म का परजीवी है। जो तैराकी यानी स्विमिंग के दौरान नाक के रास्ते प्रवेश कर जाता है और इसके बाद यह दिमाग में चला जाता है। ©insider
इस ब्रेन ईटिंग अमीबा का वैज्ञानिक नाम नेगलेरिया फाउलेरी है। यह एक किस्म का परजीवी है। जो तैराकी यानी स्विमिंग के दौरान नाक के रास्ते प्रवेश कर जाता है और इसके बाद यह दिमाग में चला जाता है। यह सूक्ष्म परजीवी दिमाग के टिश्यू को खाने लगता है। यह इतना ज्यादा खतरनाक है कि अमेरिका में 1962 से लेकर अब आए 145 लोगों में से केवल चार ही जीवित बच पाए हैं। पर लिली इस संक्रमण से ज्यादा दिन नहीं लड़ सकी और उसकी मौत हो गई।
लिली की मौत के बाद से ही लोगों में इस बात को लेकर गहन चिंता फैल गई है कि वे इससे कैसे बचें। असल में यह इतना छोटा होता है कि आसानी से नजर भी नहीं आता। तैराकी यानी स्विमिंग के दौरान ज्यादातर लोग आंखों और कानों को तो कवर करते हैं। पर नाक को कवर करने की ओर कोई भी ध्यान नहीं देता।
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